अमित सिंह सेंगर का साप्ताहिक कॉलम

बात साहब तक पहुंच जाएगी
वैसे तो साहबान कम बातचीत करते हैं,जो भी बातें करेंगे मुद्दे की करेंगे वह भी बेहद सौम्य तरीके से,बावजूद महकमे में एक शख्स से नीचे से लेकर ऊपर तक के लोग जरा सहमे रहते हैं, क्या पता किसकी बात किस तरह बड़े साहब के सामने पेश कर दे, बात गलत तरीके से पेश हुई तो साहबान के कोप-भाजन का शिकार होना पड़ सकता है, वैसे इन शख्स की पूंछ-परख भी खाकी के बीच खूब है, महकमे के लोग इनसे बड़े आदर से मिलते हैं, वजह साहब से करीबी, ताकि इनके जरिए साहबान के पास अपने नंबर बढ़वा सकें। जानकारी के लिए बता दें ये शख्स महकमे के ही और बड़े थाने की कमान इनके पास है, यह अलग बात है कि ये स्वयं अपने थाने में जुड़े गांवों की गिनती लेकर बल की मांग करते थक गए, लेकिन अजीज साहबान चाहकर भी अतिरिक्त बल उपलब्ध नहीं करा पा रहे।
बदल गई चौखट अब
खाकी हो या अन्य महकमा,अब जो हालात है उसमें बिना पॉलिटिकल अपोर्च के काम संभव नहीं। अब वक्त और हालात बदल चुके हैं, पहले खाकी के छोटे-बड़े साहब लोग सिर्फ एक चौखट पर माथा टेकने जाते थे, इन नेताजी का जलवा दशकों से जिले में कायम है,पर पिछले कुछ समय से स्थितियां जरा बदल गईं, पालक मंत्री के पहले दौरे के बाद इसकी झलक खाकी की पहली जिला स्तरीय लिस्ट में देखने को भी मिली, जिससे साफ जाहिर हो गया कि सत्ता का केंद्रबिंदु अब कोई एक नहीं,कई हो गए, सो बेहतर पोस्टिंग के लिए छोटे-बड़े कर्मचारी अब सत्ता के बने अगल-अलग केंद्रों पर पहुंचने प्रयासरत हैं, ऐसे लोगों की खोज तेजी से शुरू हो गई जो इन केंद्रों में मजबूत पकड़ रखता हो, अब ऐसे नजारे दिख रहे,जो पहले एक चौखट पर दिखते वो अलग-अलग चौखट में माथा टेक रहे।
पत्राचार ने पकड़ी रफ्तार
इन दिनों विंध्य में बड़के साहब के पत्राचार से खाकी परेशान है,बड़के साहब के पत्राचार अनुसार उन्हें सन्तुष्ट करें कि अपने साहब को। दरअसल दोनों साहबों के बीच द्वंद्व चल रहा है, पिस रहे मातहत। बड़के साहब की कार्यशैली अलग अंदाज की है। इस अंदाज की वजह से वे आला अफसर के गुस्से के शिकार भी हो चुके हंै, फिर भी कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं हुआ,अब टसल रेंज के दो साहबों तक पहुंच गई है, ये दोनों साहब बेहद ईमानदार छवि के अफसर हैं, इनकी कार्यप्रणाली से राजधानी के अफसर भी वाकिफ हैं।
अकेला ही सब पर भारी
यूं तो जिले के साहब बेहद ईमानदार माने जाते है इसकी चर्चा राजधानी तक है साहब के कारण मातहत उल्टे-सीधे काम करने से बच रहे,जो कुछ कर रहे वो भी चोरी-छिपे, लेकिन बडी डील से बच रहे कंही बात साहब के कानों तक न पहुँच जाए।इतने के बाद भी एक मुंशीजी की सेहत पर कोई फर्क नही पड़ा,वो अपनी ही धुन में नोट गिनने में व्यस्त हैं, ये मुंशीजी इतने शातिर हंै कि इनका गड़बड़झाला वर्षों बाद भी काबिल अफसर नहीं पकड़ पाए, साहब के आते ही लाइन में पोस्टिंग ले ली, फिर उड़नखटोला की तकवारी की। लूप लाइन में रहकर मुंशीजी सारे शहर के दो नंबर के काम की परमीशन जारी करते हैं,आईपीएल मैच के दांव में लाखों की वसूली कर डाली साहबों के नाम,पर किसी भी साहब को न मिली एक चवन्नी, पुलिस गलियारे में चर्चा है कि इनके दरबार मे सारे दो नम्बरी दस्तक देते है,साहबों के नाम से दाम तय होता है लेकिन दाम के बारे में सारे के सारे साहब अंजान है, अब नई चाल चर्चा है नए साहब के आमद के बाद इन्होंने सब जगह रेट बड़ा दिया, रेट भी बढ़ाया महज हजार रुपए। ताकि सिकवा-शिकायत हो तो कोई भरोसा न करे।

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