अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को 'गाजा पीस बोर्ड' में शामिल होने का न्योता भेजा है। जानें कैसे भारत और रूस की जुगलबंदी से बदलेगी मध्य-पूर्व की राजनीति।
By: Ajay Tiwari
Jan 19, 20265:04 PM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने के बाद, अब ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ‘गाजा पीस बोर्ड’ (Board of Peace on Gaza) में शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा है। क्रेमलिन ने इस न्योते की पुष्टि करते हुए कहा है कि वे फिलहाल इसके विवरणों और इसमें रूस की भूमिका का अध्ययन कर रहे हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां ट्रंप दुनिया की महाशक्तियों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच हुए शांति समझौते के बाद, गाजा के भविष्य को संभालने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संस्था की कमी महसूस की जा रही थी। ‘गाजा पीस बोर्ड’ का मुख्य उद्देश्य गाजा पट्टी का प्रशासनिक प्रबंधन देखना, सीजफायर का पालन सुनिश्चित करना और युद्ध से तबाह हुए क्षेत्र में मानवीय सहायता व पुनर्निर्माण कार्यों की निगरानी करना है। ट्रंप की रणनीति यह है कि इस बोर्ड में केवल पश्चिमी देश न हों, बल्कि भारत और रूस जैसी ताकतें भी शामिल हों, ताकि इसे निष्पक्ष और सर्वमान्य माना जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन को इस बोर्ड में बुलाकर ट्रंप एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं। पहला, सीरिया और ईरान पर रूस की गहरी पकड़ है, जिसका उपयोग ईरान समर्थित गुटों को शांत रखने में किया जा सकता है। दूसरा, भारत और रूस को इस प्रक्रिया के केंद्र में रखकर ट्रंप मध्य-पूर्व की शांति प्रक्रिया से चीन को दूर रखना चाहते हैं। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति को भी इसमें शामिल करना ग्लोबल साउथ को साधने की इसी कड़ी का हिस्सा है।
अमेरिका-रूस संबंधों में बदलाव: यूक्रेन युद्ध के बाद अलग-थलग पड़े रूस को इस बोर्ड में बुलाना यह स्वीकार करना है कि वैश्विक शांति के लिए रूस को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पीएम मोदी की 'विश्वबंधु' छवि: भारत का इस समूह में होना यह दर्शाता है कि दुनिया अब भारत को एक निष्पक्ष मध्यस्थ मानती है जिस पर इजराइल और अरब देश, दोनों भरोसा करते हैं।
ट्रंप की 'डीलमेकर' इमेज: ट्रंप यह संदेश दे रहे हैं कि वे विचारधारा के बजाय नतीजों पर ध्यान देते हैं और वे वह कर सकते हैं जो पिछले प्रशासन के लिए असंभव था।
गाजा समाधान की ठोस उम्मीद: जब अमेरिका, रूस और भारत जैसे देश एक टेबल पर होंगे, तो इजराइल या हमास के लिए समझौते की शर्तों से मुकरना मुश्किल होगा।
यूक्रेन युद्ध पर संभावित असर: गाजा के बहाने शुरू हुई यह बातचीत भविष्य में अमेरिका और रूस के बीच 'ट्रस्ट बिल्डिंग' का काम कर सकती है, जिससे यूक्रेन संकट के समाधान का रास्ता भी खुल सकता है।