उज्जैन शाही मस्जिद विवाद पर जमीयत उलमा मप्र के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कोर्ट में तथ्य छिपाने, सड़क चौड़ीकरण के लिए तीन फीट जमीन के वैकल्पिक उपायों और गिरफ्तारियों पर तीखे सवाल उठाए हैं।

उज्जैन शाही मस्जिद विवाद
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर उपजे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। जमीयत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने प्रशासन और अदालत में पेश किए गए तथ्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया और स्थानीय समाज को भरोसे में लिए बिना कार्रवाई की गई।
हाजी मोहम्मद हारून का कहना है कि अदालत के सामने मामले की वास्तविक स्थिति और सही तथ्य स्पष्ट रूप से रखे जाने चाहिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शाही मस्जिद को महाकाल मंदिर के बिल्कुल करीब बताकर अदालत को गुमराह किया गया, जबकि वास्तविकता में मस्जिद मंदिर से काफी दूरी पर स्थित है। यदि पूरी जानकारी सही रूप से अदालत के सामने आती, तो इस मामले की तस्वीर कुछ और ही होती। इसके अलावा, उन्होंने सिंगल बेंच से लेकर डबल बेंच तक चली सुनवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पक्षकारों को उपलब्ध न्यायिक विकल्पों का पूरी तरह इस्तेमाल करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए था।
सड़क चौड़ीकरण को लेकर हारून ने तर्क दिया कि यदि केवल तीन फीट जगह की ही आवश्यकता थी, तो प्रशासन को अन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था। उन्होंने शाही मस्जिद के सामने स्थित 'संदल वाली इमारत' का उदाहरण देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर मुआवजा देकर दूसरी संपत्ति का अधिग्रहण किया जा सकता था, और मुस्लिम समाज इसके लिए आर्थिक सहयोग देने को भी तैयार था। इसके अतिरिक्त, रास्ते का डिजाइन बदलने या आसपास की अन्य संपत्तियों को शामिल करने जैसे उपायों से भी धार्मिक स्थलों को बचाकर रास्ता निकाला जा सकता था।
प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच हुई बातचीत और सहमति के दावों को खारिज करते हुए हारून ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार केवल आठ लोगों ने प्रशासन से चर्चा की थी। कुछ चुनिंदा लोगों की सहमति को पूरे मुस्लिम समाज की रजामंदी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में आम जनता को पूरी स्थिति से अवगत कराकर और भरोसे में लेकर ही कदम उठाया जाना चाहिए था। मस्जिद की सुरक्षा के लिए लंबे समय से डटे लोगों को अचानक कार्रवाई के बजाय स्थिति समझाई जानी चाहिए थी।
मस्जिद की मीनार को हटाने के तरीके पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जिस हिस्से को मैनुअल तरीके से अलग करने की बात कही गई थी, वहां मशीनों के इस्तेमाल से मीनार गिर गई जिससे ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग की है। साथ ही, तकिया मस्जिद को पार्किंग के नाम पर हटाने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था न किए जाने पर भी चिंता जताई। अंत में, उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों और गिरफ्तारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून तोड़ने वालों की जांच होनी चाहिए, लेकिन सभी प्रदर्शनकारियों को एक नजर से देखना गलत है। जमीयत आगे भी लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से अपनी बात मजबूती से रखती रहेगी।
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