पुतिन की भारत यात्रा के बीच अमेरिका चिंतित दिखा। US कांग्रेस की सब-कमेटी 10 दिसंबर को भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर सार्वजनिक बैठक करेगी, जिसमें रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक नीति की समीक्षा होगी।

अमेरिका. स्टार समाचार वेब
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिनों की भारत यात्रा पर दिल्ली में मौजूद हैं, और इसी दौरान अमेरिका से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हलचल सामने आई है। ऐसा माना जा रहा है कि वॉशिंगटन को यह आशंका होने लगी है कि भारत कहीं रणनीतिक रूप से रूस के और करीब न पहुंच जाए। रूस से तेल खरीदने को लेकर हाल ही में भारत पर टैरिफ लगाने की कोशिश करने वाला अमेरिका अब भारत संबंधी अपनी नीति पर विशेष समीक्षा करने जा रहा है।
अमेरिकी कांग्रेस की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की साउथ और सेंट्रल एशिया सब-कमेटी ने घोषणा की है कि 10 दिसंबर को भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर एक सार्वजनिक बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में दोनों देशों के रक्षा, आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक संबंधों की मौजूदा दिशा और भविष्य पर गहराई से चर्चा की जाएगी। समिति ने ‘अमेरिका-भारत स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप: एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा’ को बैठक का मुख्य विषय बनाया है।
अमेरिकी कांग्रेस 10 दिसंबर को भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर विशेष बैठक करेगी।
बैठक की टाइमिंग पुतिन की भारत यात्रा के कारण महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रक्षा, तकनीक, इंडो-पैसिफिक और सप्लाई-चेन सुरक्षा प्रमुख एजेंडा रहेंगे।
विशेषज्ञ जेफ स्मिथ, ध्रुव जयशंकर और समीर लालवानी समिति के सामने अपने आकलन पेश करेंगे।
इस सुनवाई में हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विशेषज्ञता रखने वाले तीन प्रमुख विश्लेषक—हेरिटेज फाउंडेशन के एशियन स्टडीज सेंटर के निदेशक जेफ स्मिथ, ओआरएफ अमेरिका के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर ध्रुव जयशंकर और जर्मन मार्शल फंड के इंडो-पैसिफिक प्रोग्राम के सीनियर फेलो समीर लालवानी—अपना दृष्टिकोण पेश करेंगे। तीनों अनुभवी विशेषज्ञ वॉशिंगटन में भारतीय मामलों पर गहरी पकड़ रखते हैं और उनके सुझाव भारत-अमेरिका नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में भारत के रक्षा आधुनिकीकरण, उभरती सैन्य साझेदारी, तकनीकी सहयोग, क्षेत्रीय कूटनीति और इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती देने जैसे मुद्दों पर विस्तृत विचार होगा। यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका उच्च तकनीक, समुद्री सुरक्षा और सप्लाई-चेन रेजिलिएंस को लेकर संयुक्त पहलें आगे बढ़ा रहे हैं।
कांग्रेस सदस्यों द्वारा भारत-अमेरिका संबंधों को लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है, और वॉशिंगटन में भारत को इंडो-पैसिफिक रणनीति का "मुख्य स्तंभ" माना जाता है। इसलिए यह बैठक सांसदों को नीति संबंधी चिंताओं की समीक्षा करने, चुनौतियों का आकलन करने और भारत के साथ दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी। यह भी माना जा रहा है कि रूस-भारत समीकरण में बढ़ती नजदीकियां अमेरिकी रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं, जिसके कारण यह बैठक और भी अहम हो जाती है।

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