US-Iran Peace Talks in Islamabad: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचे। क्या ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच युद्धविराम सफल होगा?

इस्लामाबाद। स्टार समाचार वेब
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच छह सप्ताह से जारी भीषण संघर्ष को रोकने के लिए प्रस्तावित 'शांति वार्ता' एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, लेकिन ईरान की तरफ से अंतिम समय में बनी संशय की स्थिति ने इस शांति प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत के रूप में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार (10 अप्रैल, 2026) को इस्लामाबाद पहुंचे हैं। उनके साथ इस प्रतिनिधिमंडल में ट्रम्प के करीबी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। वेंस, जो लंबे समय से विदेशी सैन्य हस्तक्षेपों के आलोचक रहे हैं, इस बार एक कठिन मिशन पर हैं। उनका प्राथमिक उद्देश्य ईरान के साथ एक स्थायी समझौते की रूपरेखा तैयार करना है, ताकि क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरों को टाला जा सके।
भले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है, लेकिन ईरान का रुख अब भी अनिश्चित बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के मूल प्रस्ताव को खारिज करते हुए अपनी '10-सूत्रीय योजना' सामने रखी है।
ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का पूर्ण संप्रभु नियंत्रण।
ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तत्काल हटाना।
क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की पूर्ण वापसी।
युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग।
इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक को लेकर अनिश्चितता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ईरान के भीतर से विरोधाभासी बयान आ रहे हैं। जहाँ ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने शांति प्रयासों की सराहना की है, वहीं ईरानी संसद के अध्यक्ष ने द्विपक्षीय वार्ता को 'तर्कहीन' करार दिया है। इसके अलावा, इजरायल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम लेबनान के मोर्चे पर लागू नहीं होगा, जिससे समझौते की सफलता पर खतरा मंडरा रहा है।
इस शांति वार्ता की सफलता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि वार्ता सफल होती है, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल हो सकेगी। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की सहित कई वैश्विक नेताओं ने भी इस सीजफायर का समर्थन किया है, क्योंकि इससे ऊर्जा संकट कम होने की उम्मीद है।

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