रीवा में आयोजित पर्यटन कान्क्लेव ने विंध्य क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चित्रकूट, मुकुंदपुर, संजय दुबरी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने की पहल न केवल क्षेत्रीय विकास, बल्कि रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को भी गति देगी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
विंध्य क्षेत्र के लिए यह गर्व का क्षण है, जब मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं रीवा पहुंचकर पर्यटन उद्योग की संभावनाओं पर मंथन कर रहे हैं। यह संभवत: पहली बार है, जब प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री विंध्य की धरोहरों, धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक विरासतों और प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने की गंभीर पहल कर रहा है। रीवा में आयोजित पर्यटन कान्क्लेव विंध्य क्षेत्र को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। चित्रकूट में प्रभु श्रीराम की की तपोस्थली, गैबीनाथ धाम, बौद्धकालीन भरहुत, त्रिकूट वासिनी मां शारदा का मंदिर, मुकुंदपुर की श्वेत बाघ सफारी, बघेला म्यूजियम, पुरवा जलप्रपात, बसामन मामा गौ अभ्यारण्य जैसे स्थल वर्षों से अपनी पहचान के बावजूद विकास से दूर थे। वहीं सीधी जिले का संजय दुबरी टाइगर रिजर्व, सोन घड़ियाल अभयारण्य, चंदरेह, घोघरा और सिंगरौली की मांडा गुफाएं तथा वर्दी का किला भी महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र बनने की क्षमता रखते हैं। इन स्थलों की लोकप्रियता के बावजूद पर्याप्त सुविधाएं न होने से पर्यटक अपेक्षित संख्या में नहीं पहुंचते थे। लेकिन अब इस कान्क्लेव से उम्मीद जगी है कि सरकार इन स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह प्रयास विंध्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि विंध्य के सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के उन प्रयासों को भी एक नया आयाम देगा जो प्रयास शुक्ल बीते कई वर्षों से करते रहे हैं। विंध्यवासियों ने इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया है और आशा व्यक्त की है कि यह कान्क्लेव विंध्य के विकास को नई उड़ान देगा।
लेखक: राजेश द्विवेदी

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