पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 21 सांसदों ने बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर बैठक की। इससे पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने इस्तीफा देकर ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को अराजक बताया।

नई दिल्ली/कोलकाता। स्टार समाचार वेब
पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों के विद्रोह के बाद अब सांसदों ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ छोड़ने की तैयारी कर ली है। सोमवार दोपहर को टीएमसी के 21 सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक की।
इस बैठक के दौरान बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी सांसदों से मिलने पहुंचे, जिससे बंगाल की सियासत में बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, बैठक में शामिल 21 सांसदों में से लोकसभा और राज्यसभा के कितने-कितने सदस्य थे, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
भूपेंद्र यादव के घर हुई इस गोपनीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज चेहरे नजर आए। इनमें काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर्, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी हैं। शेष अन्य सांसदों के नामों का खुलासा अभी नहीं किया गया है। बता दें कि वर्तमान में लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं।
इस सियासी हलचल के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा सांसद पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। सुखेंदु शेखर का कार्यकाल 2029 तक था, लेकिन उनके इस्तीफे के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा।
इस्तीफे के बाद सुखेंदु ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए सुखेंदु शेखर रे ने कहा-
"ममता बनर्जी मनमाने ढंग से पार्टी चला रही हैं। पार्टी के भीतर कई नेता इस तानाशाही से बेहद नाराज हैं।"
अराजक शासन: बंगाल में ममता बनर्जी का 15 साल का शासन भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार, और स्वास्थ्य-शिक्षा-रोजगार के मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम रहा।
बीजेपी को जनादेश: इतिहास में पहली बार बंगाल की जनता ने भाजपा के पक्ष में भारी जनादेश दिया है, जो टीएमसी के कुशासन को खत्म करने के लिए है।
नेताओं की अनदेखी: पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है। स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं है और न ही बड़े फैसलों पर नेताओं की राय ली जाती है।
आत्ममंथन की कमी: पार्टी के भीतर यह घुटन लंबे समय से थी। चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी ने हार के कारणों को जानने या आत्ममंथन करने की कोशिश नहीं की।
बीजेपी सरकार की तारीफ: सुखेंदु ने नई चुनी गई भाजपा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि वे घोषणापत्र के अनुसार राज्य के विकास और पुनर्निर्माण के लिए सही कदम उठा रहे हैं।
टीएमसी के बागी विधायक और नए गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु शेखर के बयानों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ सुखेंदु जी की निजी राय नहीं है। मैं उनकी बातों से पूरी तरह सहमत हूँ। राज्यसभा के कामकाज को लेकर जो उन्होंने कहा वह सच है, संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है।"
बता दे कि इससे पहले 3 जून को ही टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी से अलग होकर अपना एक नया गुट बना लिया है, जिसका नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। विधायकों के बाद अब सांसदों की इस बगावत ने ममता बनर्जी की सरकार और पार्टी दोनों को संकट में डाल दिया है।
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