Zomato ने प्लेटफॉर्म फीस में 19% की बढ़ोतरी की है। अब ग्राहकों को ₹12.50 के बजाय ₹14.90 देने होंगे। जानें क्यों महंगा हुआ ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना और जोमैटो का अब तक का सफर।
By: Ajay Tiwari
Mar 20, 20265:21 PM
नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क।
यदि आप ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने के शौकीन हैं, तो अब आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। देश की दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) ने शुक्रवार से अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 19% का इजाफा कर दिया है। पिछले 7 महीनों में यह दूसरी बार है जब कंपनी ने अपने शुल्कों में बढ़ोतरी की है।
जोमैटो के यूजर्स को अब हर फूड ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय ₹14.90 की प्लेटफॉर्म फीस देनी होगी। यानी सीधे तौर पर प्रति ऑर्डर ₹2.40 की वृद्धि की गई है। ध्यान रहे कि यह फीस GST, रेस्टोरेंट चार्ज और डिलीवरी फीस से अलग है। GST जुड़ने के बाद ग्राहकों के लिए यह अंतिम राशि और भी अधिक हो जाएगी।
जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी (Swiggy) वर्तमान में टैक्स सहित लगभग ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है।
जोमैटो ने मुनाफा कमाने और मार्जिन सुधारने के लिए अगस्त 2023 में पहली बार ₹2 की प्लेटफॉर्म फीस शुरू की थी। इसके बाद जनवरी 2024: फीस बढ़कर ₹4 हुई। सितंबर 2025: 20% का इजाफा किया गया। मार्च 2026: अब इसे बढ़ाकर ₹14.90 कर दिया गया है।
कच्चे तेल की कीमतें: पेट्रोल-डीजल महंगा होने से डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च और कंपनी की लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ गई है।
प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफा): जोमैटो अपनी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने के लिए समय-समय पर इन शुल्कों में बदलाव करती रहती है।
जोमैटो की शुरुआत दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने साल 2008 में 'फूडीबे' (FoodieBay) नाम से एक रेस्टोरेंट डायरेक्टरी के रूप में की थी।
2010: कंपनी का नाम बदलकर 'जोमैटो' किया गया।
विस्तार: 2012 तक कंपनी श्रीलंका, यूएई और यूके जैसे देशों में पहुंच गई।
उपलब्धि: जोमैटो भारत का पहला फूड-टेक यूनिकॉर्न बना।
अधिग्रहण: अगस्त 2022 में जोमैटो ने ग्रॉसरी डिलीवरी के लिए ब्लिंकिट (Blinkit) का अधिग्रहण किया था।