सतना जिला अस्पताल में 13 महीनों में 26 नवजात जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित पाए गए, जांच सुविधाओं की कमी से इलाज में बाधा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जन्मजात हृदय दोष (कॉन्जेनिटल हार्ट डिफेक्ट या सीएचडी) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो नवजात शिशुओं को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले 40 शिशुओं में से करीब 2 को हृदय संबंधी समस्याएं होने की संभावना होती है। चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार हर 1000 डिलीवरी में लगभग 4 प्रतिशत बच्चों का जन्म जन्मजात हृदय दोष के साथ होता है। शिशु रोग विशेषज्ञ एवं पीडियाट्रिक आईसीयू प्रभारी डॉ. संजीव प्रजापति ने बताया कि जिला अस्पताल में जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के दरमियान 26 बच्चे सीएचडी रोग से पीड़ित मिले थे जिन्हे प्राथमिक इलाज के लिए पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया था। लगातार इस रोग से पीड़ित बाल रोगियों के मिलने के बाद भी सरदार बल्लभ भाई पटेल चिकित्सालय में हार्ट जांच की सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं। मजबूरन रोगियों को हायर सेंटर का रुख करना पड़ता है।
ईको जांच के लिए रीवा रेफर
जिले के सबसे बड़े अस्पताल में ह्रदय रोग को जांचने के लिए सिर्फ ईसीजी की ही सुविधा उपलब्ध है इस मर्ज से पीड़ित बच्चों को ईको जांच के लिए रीवा हायर सेंटर में रेफर किया जा रह है सीएचडी रोग की पुष्टि होने पर इन बच्चों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) योजना में पंजीकृत कर नि:शुल्क सर्जरी कराई जाती है
बढ़ जाता है हार्ट फेलियर का जोखिम
यह एक जन्मजात विकृति है, जिसमें हृदय का संरचनात्मक विकास सही तरीके से नहीं हो पाता। कुछ मामलों में यह समस्या हल्की होती है और समय पर इलाज मिलने से ठीक हो सकती है लेकिन गंभीर मामलों में जीवनभर इलाज की जरूरत पड़ सकती है और जान का भी खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं में इस बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इतनी कम उम्र में इकोकार्डियोग्राफी जांच कई बार संभव नहीं हो पाती। ऐसे में क्लीनिकल जांच और अन्य स्वास्थ्य परीक्षणों के आधार पर ही इस बीमारी का पता लगाया जाता है। इन बच्चों को बार-बार निमोनिया, वजन कम, दूध न पीना, शरीर का विकाश न होना, आॅक्सीजन लेवल कम होने एवं ब्लूबेबी सिंड्रोम जैसी स्थिति जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। यहां तक कि विकृति बढ़ने से हार्ट फेलियर का जोखिम बढ़ जाता है।
आमने-सामने: डॉ. एलपी सिंह, डीएम कार्डियोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज, सतना

स्टार समाचार: जन्मजात हृदय दोष (सीएचडी) क्या है?
डॉक्टर: यह दो प्रकार के होते हैंं। सायनोटिक सीएचडी : इसमें रक्त का प्रवाह इस प्रकार होता है कि आॅक्सीजन की कमी के कारण त्वचा, नाखून और होंठ नीले (सायनोसिस) हो जाते हैं। एसायनोटिक सीएचडी : इसमें रक्त में आॅक्सीजन की कमी नहीं होती, इसलिए त्वचा, नाखून और होंठ नीले नहीं पड़ते। इसमें रक्त का प्रवाह सामान्य दिख सकता है, लेकिन हृदय की संरचना में कुछ दोष होते हैं।
स्टार समाचार: कब और कैसे लगाया जा सकता है पता?
डॉक्टर: जन्म के पहले टारगेट स्कैन और फिटल इकोकार्डियोग्राफी करके इसका पता लगाया जा सकता है।
स्टार समाचार: सीएचडी के मुख्य कारण क्या हैं?
डॉक्टर: सीएचडी में मुख्य रूप से जेनेटिक कारण, नशा (दवाएं, धूम्रपान, शराब), मधुमेह (डायबिटीज), हाई ब्लड प्रेशर शामिल हैं।
स्टार समाचार: प्रमुख उपचार क्या हैं?
डॉक्टर: अधिकतर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है। कुछ बीमारियों को छतरी (डिवाइस) से ठीक किया जा सकता है। कुछ बीमारियां समय के साथ स्वयं ठीक हो जाती हैं।
स्टार समाचार: माता-पिता को किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
डॉक्टर: अधिकतर सीएचडी मरीज वयस्कता तक जीवित रहते हैं। माता-पिता को तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) का सामना करना पड़ सकता है।
स्टार समाचार: क्या सीएचडी से प्रभावित बच्चे एक सामान्य जीवन जी सकते हैं?
डॉक्टर: सीएचडी से प्रभावित बच्चों का जीवन सामान्य नहीं रहता। इन्हें बार-बार संक्रमण (इन्फेक्शन) और निमोनिया का सामना करना पड़ता है।
स्टार समाचार: जागरूकता बढ़ाने के लिए क्या प्रमुख कदम उठाने चाहिए?
डॉक्टर: समय-समय पर जागरूकता अभियान, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान करें और फिटल इकोकार्डियोग्राफी कराने की सलाह दें।


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