अमेरिका में टैरिफ को लेकर टकराव और तेज हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि यह निर्णय बेहद खराब तरीके से लिखा गया है और अमेरिका के हितों के खिलाफ जाता है।

व्हाइट हाउस ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
अमेरिका में टैरिफ को लेकर टकराव और तेज हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि यह निर्णय बेहद खराब तरीके से लिखा गया है और अमेरिका के हितों के खिलाफ जाता है। ट्रंप ने ऐलान किया कि वह तत्काल प्रभाव से दुनियाभर के देशों पर लगाए गए 10 फीसदी टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहे हैं। कई देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते रहे हैं और अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने हितों की रक्षा करे। दरअसल, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने भारत सहित कई देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती की घोषणा की है। इस फैसले के तहत भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर लगने वाला अतिरिक्त आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। नई दरें 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगी और यह व्यवस्था 150 दिनों के लिए अस्थायी रूप से लागू रहेगी। व्हाइट हाउस ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को गति
इस फैसले को भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। पहले चरण के व्यापार समझौते का कानूनी मसौदा तैयार करने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार से वाशिंगटन में बातचीत करेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देश अगले महीने इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
इन वस्तुओं को मिली छूट
अमेरिका ने घरेलू जरूरतों को देखते हुए कुछ जरूरी वस्तुओं को 15 प्रतिशत टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें दवाएं, दवा बनाने की सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक, यात्री वाहन, बसें और एयरोस्पेस से जुड़े कुछ उत्पाद शामिल हैं। यह नई व्यवस्था करीब जुलाई 2026 तक लागू रहेगी। इसके बाद अमेरिका आगे क्या रुख अपनाएगा, यह साफ नहीं है।
एक नजर में रेसिप्रोकल टैरिफ
रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब है पारस्परिक शुल्क। यानी अगर कोई देश अमेरिकी उत्पादों पर जितना आयात शुल्क लगाता है, अमेरिका भी उस देश से आने वाले सामान पर उतना ही शुल्क लगाएगा। ट्रंप प्रशासन ने 2 अप्रैल 2025 को भारत समेत लगभग 60 देशों पर इस नीति को लागू करने की घोषणा की थी। यह शुल्क पहले से लागू एमएफएन (सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र) ड्यूटी के ऊपर लगाया जाता है।
भारत पर टैरिफ का सफर
अमेरिका ने पिछले साल भारत पर 26 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। इसके बाद अगस्त 2025 में रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति बनने के बाद अमेरिका ने दंडात्मक शुल्क हटाया और टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया। अब इसे और कम कर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
भारत में किन क्षेत्रों को होगा फायदा
भारत से अमेरिका को दवाएं, जैविक उत्पाद, टेलीकॉम उपकरण, कीमती पत्थर, पेट्रोलियम उत्पाद, आॅटो पार्ट्स, आभूषण और रेडीमेड कपड़ों का बड़ा निर्यात होता है। टैरिफ घटने से इन क्षेत्रों की कंपनियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि कुछ सेक्टोरल टैरिफ पहले की तरह लागू रहेंगे। स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50 प्रतिशत शुल्क जारी रहेगा, जबकि कुछ आॅटो कंपोनेंट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ बना रहेगा। कुछ आॅटो कंपोनेंट्स पर 25 फीसदी का शुल्क भी लागू रहेगा। सेवाओं के क्षेत्र में भारत ने 28.7 अरब डॉलर का निर्यात और 25.5 अरब डॉलर का आयात किया। कुल मिलाकर भारत को 44.4 अरब डॉलर का व्यापार लाभ मिला।


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