भोपाल रेलवे स्टेशन के पास पात्रा पुल से लगे टिंबर मार्केट में बीती रात लगी भीषण आग ने शासन-प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। आगजनी की घटना के बाद से स्थनीय लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है।

भोपाल रेलवे स्टेशन के पास पात्रा पुल से लगे टिंबर मार्केट में बीती रात भीषण आग लग गई।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
भोपाल रेलवे स्टेशन के पास पात्रा पुल से लगे टिंबर मार्केट में बीती रात लगी भीषण आग ने शासन-प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। आगजनी की घटना के बाद से स्थनीय लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। शुक्र है! मौके पर पहुंची 40 दमकलों ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। आसपास के रहवासियों के साथ ही भोपाल स्टेशन तक आग की चपेट में आ जाते। आग कितनी भीषण थी इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुबह तक धुआं उठ रहा है। वहीं भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और पुलिस अधिकारी रात में ही मौके पर पहुंचे। विधायक आरिफ मसूद ने भी पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। साथ ही कहा कि टालों की अवैध मशीनों को हटाने का मुद्दा पहले भी उठाया गया था, लेकिन कुछ नहीं किया गया। अब जिसकी एक बार फिर समीक्षा की जाएगी।
राजनीतिक खींचतान
लकड़ी बाजार राजनीति का अखाड़ा भी बन गया है। जब भी प्रशासन सक्रियता दिखाता है तो राजनीतिक खींचतान शुरू हो जाती है। सभी दलों के नेता अलग-अलग राग अलापने लगते हैं। इसका फायदा टाल संचालक उठाते हैं और बेखौफ शहर के बीचोंबीच अपना धंधा संचालित कर रहे हैं।
दरअसल, शहर के बीचोंबीच संचालित टाल न सिर्फ मेट्रो के रूट के लिए बड़ी अड़चन बने हैं, बल्कि बारूद के ढेर जैसे हो गए गए हैं। इसकी शिफ्टिंग के लिए डेढ़ साल से हवा में ही कवायद चल रही है। दावा किया जा रहा है कि 18 एकड़ जमीन और 5.85 करोड़ रुपए भी दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक टिंबर मार्केट शिफ्ट नहीं हो सका है।
पातरा पुल क्षेत्र में स्थित इसी 108 आरा मशीनों वाले टिंबर मार्केट में रविवार रात को आग लग गई। छह आरा मशीनें पूरी तरह से जल गईं। ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान का दावा किया जा रहा है। पूरी रात इलाके में दहशत व्याप्त रही। लोग सो नहीं पाए, सड़कों पर टहलते नजर आए। टिंबर मार्केट के पिछले हिस्से से रेलवे ट्रैक भी गुजरा है।
शहर में संचालित टिंबर मार्केट में आगजनी की यह पहली घटना नहीं है। 2016 में भी ऐसी ही भीषण लगी थी। तीन आरा मशीनों की आग 4 घंटे में 36 दमकलों ने बुझाई थी। पिछले साल भी ऐसी ही घटना हुई। इसके बावजूद आरा मशीनें शिफ्ट नहीं हुईं। आए दिन लग रही आग के बाद भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं।
दावा किया जा रहा है कि यह टिंबर मार्केट 50 साल पुराना है। धीरे-धीरे इस मार्केट के आसपास रहवासी इलाके बस गए। आरा मशीनों में हर साल आग की बड़ी घटनाओं को देखते हुए मेट्रो के बहाने इन्हें 30 किलोमीटर दूर परवलिया के छोटा रातीबड़ में शिफ्ट करने का प्रोजेक्ट बना।
आरा मशीनों को शिफ्ट करने के लिए 50 बार प्रशासन स्तर पर मंथन हो चुका है। दर्जन भर स्थानों का चयन भी किया गया। जद्दोजहद के बाद छोटा रातीबड़ में 18 एकड़ जमीन अलॉट की गई। यहां बुनियादी सुविधाएं देने के लिए मेट्रो कॉरपोरेशन ने साढ़े 5 करोड़ भी दे दिए। कुछ महीनों तक तो टेंडर की प्रक्रिया के बीच ही फाइल दौड़ती रही। जब काम की शुरुआत हुई तो वह कछुए की चाल जैसा चल रहा है।
आरा मशीनों को छोटा रातीबड़ से पहले कबाड़खाना, ऐशबाग स्टेडियम के पास, गोविंदपुरा से लेकर ट्रांसपोर्ट नगर और चांदपुर में शिफ्ट करने के प्रयास हुए थे, लेकिन बात नहीं बन सकी। दो साल पहले पहली बार आरा मशीन संचालकों को नोटिस जारी कर छोटा रातीबड़ में शिफ्ट होने का आप्शन दिया गया। कहा गया कि वे शिफ्ट नहीं होंगे तो हटा दिया जाएगा। इसके बाद सभी संचालकों ने लिखित में दिया था कि वे शिफ्ट होने के लिए तैयार हैं। जमीन जिला उद्योग केंद्र को दी गई थी। फिर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग ने टेंडर कॉल किए थे। आरा मशीनों की शिफ्टिंग के बारे में सबसे पहले साल 2007 में बात हुई थी।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
सतना में वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने भोज मुक्त विश्वविद्यालय और संतोष विहार कॉलोनी से सांपों को सुरक्षित पकड़ा। प्री-मानसून मौसम में बढ़ती वन्यजीव गतिविधियों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
सतना के नैना-सगमनिया गांव में वन विभाग ने डॉग स्क्वाड की मदद से संदिग्ध के घर से खून से सने हथियार, तराजू और वन्य प्राणी के बाल बरामद किए। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
सतना-मैहर के सौ से अधिक निजी स्कूलों ने चेतावनी और समय-सीमा बढ़ने के बाद भी फीस संबंधी जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं की। अब नियमों के तहत इन संस्थानों पर पांच गुना तक अर्थदंड लगाया जा सकता है।
मध्यप्रदेश में सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 'नगर वन योजना' सतत शहरी विकास का मॉडल बन रही है। प्रदेश में 3141 हेक्टेयर क्षेत्र में 94 नगर वन और वाटिकाएं विकसित की गई हैं, जो आधुनिक सुविधाओं और इको-टूरिज्म का केंद्र हैं।
भोपाल के सप्रे संग्रहालय में 'पुरखों को प्रणाम' पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने युवा पीढ़ी से हिन्दी पत्रकारिता के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया और उनकी जीवनी 'पीर पराई जाने रे' का लोकार्पण हुआ।
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल भेजा गया। जानें जेल में कैसी कटी उनकी पहली रात और क्या है कैदी नंबर।
सतना शहर में बिजली आपूर्ति बाधित होने से बढ़ीं शिकायतों पर डीई सिटी ने अधिकारियों की बैठक ली। सीएम हेल्पलाइन और 1912 में दर्ज शिकायतों के त्वरित एवं संतोषजनक निराकरण के निर्देश दिए गए।
सतना जिले में 800 से अधिक संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। संजीवनी क्लीनिक, टीकाकरण और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का संचालन बाधित रहा, जबकि कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
पहला विवाह छुपाकर दूसरी शादी करने के केस में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति गजेंद्रसिंह ने दूसरी शादी और भरण-पोषण से संबंधित एक केस में फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि अंतरिम भरण-पोषण तय करते समय कोर्ट पक्षकारों के आचरण और संबंधों की वास्तविकता को ध्यान में रखती है।
देशभर में आंधी-बारिश से पारा नीचे आ गया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून 4 जून को केरलम के तट पर पहुंच जाएगा।