हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह व न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ के समक्ष यूनियन कार्बाइड परिसर, भोपाल के जहरीले कचरे से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश के पालन में राज्य व प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से जानकारी पेश की गई।

दिसंबर 1984 की रात भोपाल में हुई गैस त्रासदी ने दुनिया को झकझोर दिया था।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह व न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ के समक्ष यूनियन कार्बाइड परिसर, भोपाल के जहरीले कचरे से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश के पालन में राज्य व प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से जानकारी पेश की गई। अवगत कराया गया कि 899.08 मीट्रिक टन जहरीले कचरे का विनिष्टीकरण पीथमपुर में किया जा चुका है। यह कार्रवाई हाई कोर्ट द्वारा तीन दिसंबर 2024 और 10 दिसंबर 2025 को पारित आदेशों के अनुपालन में की गई है। कोर्ट ने इस जानकारी को अभिलेख पर ले लिया। इसके साथ आगामी प्रक्रिया के बारे में जवाब मांग लिया। अगली सुनवाई 13 मार्च को नियत की गई है।
गैस त्रासदी का काला इतिहास
दरअसल, दिसंबर 1984 की रात भोपाल में हुई गैस त्रासदी ने दुनिया को झकझोर दिया था। फैक्ट्री से जहरीली गैस के रिसाव के कारण 3,828 लोगों की मौत हुई, जबकि 18,922 लोग घायल हुए। हजारों लोग विकलांग हो गए।
दशकों से जारी कानूनी लड़ाई
इस त्रासदी से जुड़े मामलों को लेकर वर्ष 2004 में स्वर्गीय आलोक प्रताप सिंह द्वारा जनहित याचिका दायर की गई थी। बाद में वर्ष 2012 में गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन का मामला सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट को मानिटरिंग के लिए भेजा। तब से यह न्यायालय की निगरानी में है।


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