मध्यप्रदेश में अब दुकानों का डिजिटल सत्यापन होगा। सड़क किनारे से लेकर हॉकर्स कॉर्नर और बड़े भवनों में खान-पान की दुकानों की जियो टैगिंग होगी। उसके बाद ही खाद्य लाइसेंस मिलेगा। खाद्य एवं सुरक्षा ने नए नियम लागू किए हैं जिसकी शुरुआत राजधानी भोपाल में होने जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दुकानदार को लाइसेंस मिल पाएगा।

अनरजिस्टर्ड दुकानों पर लगेगे सरकार का ताला
मध्यप्रदेश में दुकानों का डिजिटल सत्यापन होगा
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में अब दुकानों का डिजिटल सत्यापन होगा। सड़क किनारे से लेकर हॉकर्स कॉर्नर और बड़े भवनों में खान-पान की दुकानों की जियो टैगिंग होगी। उसके बाद ही खाद्य लाइसेंस मिलेगा। खाद्य एवं सुरक्षा ने नए नियम लागू किए हैं जिसकी शुरुआत राजधानी भोपाल में होने जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दुकानदार को लाइसेंस मिल पाएगा। यहां खास बात यह भी है कि दुकानदार को भी लाइसेंस के लिए कार्यालयों में भटकना नहीं होगा। प्रशासन को पता होगा कि शहर में किस लोकेशन पर किस तरह की दुकान है, जिससे दुकानों की निगरानी मजबूत होगी। एक क्लिक में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड के पोर्टल से डिटेल मिल जाएगी। दरअसल, मध्यप्रदेश में खान-पान की वस्तुएं बेचने वालों पर सख्ती की जा रही है। खुलेआम नकली और मिलावटी खान-पान की वस्तुओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से सभी संस्थानों के लिए फूड लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। फूड सेफ्टी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अनरजिस्टर्ड दुकानें बंद की जाएंगी। भोपाल जिले से इसकी शुरुआत की जा रही है। जिसके बाद प्रदेश भर में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
जियो टैगिंग के बाद ही मिलेगा लाइसेंस
फूड विभाग के रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड करने के लिए प्रतिष्ठानों की जियो टैगिंग की जाएगी। बिना जियो टैगिंग के फूड सेफ्टी लाइसेंस भी जारी नहीं किए जा सकेंगे। यह नई व्यवस्था भोपाल में शुरू की जा रही है। इससे अनरजिस्टर्ड दुकानों की सटीक संख्या सामने आएगी।
अब ऐसे मिलेगा फूड सेफ्टी लाइसेंस
फूड विभाग की नई व्यवस्था के तहत अब फूड सेफ्टी आॅफिसर दुकानों पर पहुंचेंगे। मोबाइल एप के जरिए संबंधित दुकानों की फोटो खींची जाएगी। जीपीएस लोकेशन पर लेकर सभी जरूरी जानकारी आनलाइन दर्ज करेंगे। जियो टैगिंग के बाद ही फूड लाइसेंस जारी किया जाएगा।
दुकानों के नाम पर नहीं होगा फर्जीवाड़ा
खाद्य सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस कदम से दुकानों के नाम पर होता फर्जीवाड़ा रुक जाएगा। बिना दुकान के भी लाइसेंस ले लेने पर अंकुश लगेगा। जियो- टैगिंग से हर हाल में केवल वास्तविक दुकानदारों को ही लाइसेंस मिल सकेगा। पहले पते में दिए मौके पर कई बार कोई दुकान ही नहीं होती थी। अब दुकान के पते पर उपस्थित होने पर ही लाइसेंस सुनिश्चित होगा। ऐप भी तभी काम करेगा जब विभागीय अधिकारी दुकान के आसपास होगा।


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