देशभर में प्रतिदिन लाखों की संख्या में सड़क हादसे होते हैं। जहां हादसे के शिकार लोगों की जिंदगियां तक तबाह हो जाती हैं। लेकिन अनदेखी और उदासीनता का आलम यह है कि करोड़ों वाहन ऐसे दौड़ रहे हैं जिनके पास जरूरी बीमा तक नहीं है। यह हम नहीं, बल्कि केंद्र सरकार ने खुद सदन में स्वीकार किया है।
By: Arvind Mishra
Mar 15, 202611:07 AM

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देशभर में प्रतिदिन लाखों की संख्या में सड़क हादसे होते हैं। जहां हादसे के शिकार लोगों की जिंदगियां तक तबाह हो जाती हैं। लेकिन अनदेखी और उदासीनता का आलम यह है कि करोड़ों वाहन ऐसे दौड़ रहे हैं जिनके पास जरूरी बीमा तक नहीं है। यह हम नहीं, बल्कि केंद्र सरकार ने खुद सदन में स्वीकार किया है। संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार देश की सड़कों पर करीब 44 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। यानी हर दो गाड़ियों में लगभग एक गाड़ी ऐसी है जो कानून के दायरे से बाहर सड़क पर दौड़ रही है।
गडकरी ने राज्यसभा में दी जानकारी
सरकार की ओर से यह जानकारी राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी गई। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह आंकड़े वाहन डेटाबेस के आधार पर तैयार किए गए हैं। यह डेटा 6 मार्च 2026 तक एक्टिव वाहनों की जानकारी पर बेस्ड है, जिसमें वाहनों के रजिस्ट्रेशन और फिटनेस स्टेटस को भी ध्यान में रखा गया है।
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हर वाहन के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। 1988 के मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने के लिए थर्ड पार्टी बीमा होना जरूरी है। अगर कोई वाहन बिना बीमा के चलता पाया जाता है तो धारा 196 के तहत उस पर जुर्माना और अन्य सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद देश में इस नियम का पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।
राज्यों का दिखानी होगी सख्ती
समस्या को देखते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई बार एडवाइजरी जारी की है। राज्यों से कहा है कि वे नियमों को सख्ती से लागू करें और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाएं। साथ ही सरकार डिजिटल वेरिफिकेशन जैसे तकनीकी उपायों को अपनाने पर भी जोर दे रही है ताकि बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान आसानी से की जा सके। हालांकि इन नियमों को लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों की ही है।
पीड़ितों के लिए राहत के कुछ नियम बनाए गए
सरकार ने यह भी बताया कि अगर किसी हादसे में बिना बीमा वाले वाहन शामिल होते हैं तो पीड़ितों के लिए राहत के कुछ नियम बनाए गए हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 164 या 166 के तहत मुआवजे के लिए दावा कर सकते हैं। इसके साथ ही सेंट्रल मोटर व्हीकल नियमों के तहत भी सहायता का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड के जरिए भी पीड़ितों को मदद दी जाती है। जनवरी 2026 में इस फंड के नियमों को अपडेट किया गया है। इसमें बिना बीमा वाले वाहनों से जुड़े हादसों और हिट एंड रन मामलों के लिए अलग खाते बनाए गए हैं। इन फंड के जरिए हादसे में घायल लोगों के इलाज और मुआवजे में मदद दी जाती है।