मनुष्य के जीवन का आधार पर्यावरण है, अगर पर्यावरण सुरक्षित होगा तो ही, जीवसृष्टी का संरक्षण संभव हैं। हमारे आसपास के वातावरण में मौजूद आवश्यक तत्वों की मौजूदगी पर्यावरण का अमूल्य हिस्सा है, जैसे - हवा, पानी, धूप, पहाड़, नदियां, समुद्र, जंगल, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, जमीन, आकाश, धातु, खनिज, हिमखंड व अन्य मिलकर पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाते हैं।

(विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस विशेष - 26 नवंबर 2025)
मनुष्य के जीवन का आधार पर्यावरण है, अगर पर्यावरण सुरक्षित होगा तो ही, जीवसृष्टी का संरक्षण संभव हैं। हमारे आसपास के वातावरण में मौजूद आवश्यक तत्वों की मौजूदगी पर्यावरण का अमूल्य हिस्सा है, जैसे - हवा, पानी, धूप, पहाड़, नदियां, समुद्र, जंगल, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, जमीन, आकाश, धातु, खनिज, हिमखंड व अन्य मिलकर पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाते हैं। यह तत्व भी एक-दूसरे के पूरक होते है एवं हमारे जीवन के प्रत्येक गतिविधि पर असर डालते हैं। पर्यावरण हमारे लिए सबसे ज्यादा जरूरी है, इसकी रक्षा अर्थात मनुष्य जीवन की रक्षा है, परंतु विकास के नाम पर, लापरवाही और स्वार्थ के कारण हमारा पर्यावरण बेहद तेजी से बर्बाद हुआ हैं। जिसके कारण जानलेवा बीमारियों ने तेजी से पैर पसारे है और असमय मौत की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धी हुयी हैं। अब बीमारियां उम्र के हिसाब से नहीं बल्कि प्रदूषण और खराब जीवनशैली के हिसाब से होती हैं। आज देश में शुद्ध हवा पानी भोजन और सुख-शांति से जीने के लिए पोषक वातावरण मिलना दुर्लभ हो रहा हैं। इसी समस्या के प्रति जागरूकता हेतु पर्यावरण बचाने के लिए हर साल 26 नवंबर को "विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस" पूरी दुनिया में मनाया जाता हैं।
हमारे देश में पाश्चात्य देशों की तुलना में बहुत अधिक प्रदूषण, लोगों में लापरवाही, अपराधवृत्ति, स्वार्थ और सहने की आदत हैं। हमारे आसपास के छोटे-छोटे देश भी पर्यावरण के संरक्षण में हमसे आगे है, उदाहरण के लिए भूटान देश अपने प्राकृतिक सौंदर्य को बेहतर ढंग से संजोकर आगे बढ़ रहे है, जिसका असर वहां के नागरिकों के सेहत पर भी नजर आता हैं। विकसित राष्ट्रों में सख्त नियम-कानून का कड़ाई से पालन किया जाता है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न हों, पर्यावरण संरक्षण के प्रति वहां सरकार सख्ती से पेश आती है और जनता को भी परेशानी न हों, उसका भी खास ख्याल रखा जाता है, संभावित विविध पर्यायों का क्रियान्वयन किया जाता हैं। ऐसे माहौल में जनता भी सरकार के पर्यावरण और स्वास्थ्य पूरक बेहतर कार्यों में पूरा सहयोग देती है, इसके मुकाबले हम आज भी बहुत पिछड़े हुए नजर आते है, जीवन के लिए सबसे आवश्यक शुद्ध वातावरण है, लेकिन हम आज भी पर्यावरण को खराब करने पर तुले हुए हैं। जागरूकता केवल दिन विशेष पर और दिखावे के लिए की जाती है, ऐसा अक्सर प्रतीत होता हैं।
हमारे शहरों से बहने वाली अधिकाधिक नदियों का स्वरूप नालों की भांति नजर आता है, अरबों रुपये खर्च कर नदियों के स्वच्छता के दावो की सच्चाई भी हम देखते है, भ्रष्टाचार और लीपापोती का साम्राज्य पर्यावरण को तेजी से बर्बाद कर रहा हैं। स्विस कंपनी आयक्यूएअर द्वारा जारी वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2024 में भारत को दुनिया का पांचवा सबसे प्रदूषित देश बताया गया है। दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी हैं। दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 6 और शीर्ष 20 में से 13 शहर भारत में हैं। हाल ही के अध्ययन अनुसार, एयर पॉल्यूशन से भारत में हर साल 1.7 मिलियन से 2 मिलियन लोगों की मौत होती हैं। स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर 2025 रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में करीब 2 मिलियन मौतें और 2022 की लैंसेट रिपोर्ट के मुताबिक 1.7 मिलियन से ज़्यादा मौतों का अंदाज हैं। आउटडोर और इनडोर एयर पॉल्यूशन की वजह से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और सीओपीडी जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों से होने वाली मौतें होती हैं। इसी प्रकार जल प्रदूषण, प्लास्टिक प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और अस्वच्छता के कारण बड़ी मात्रा में असमय मासूम जिंदगियां छीन जाती है, साथ ही बीमारियों का जंजाल तन-मन के साथ-साथ जीवन के हर स्थिति पर गंभीर आघात करता हैं। रेडियोधर्मी प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, तापीय प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण हमें मौत के आगोश में धकेलता हैं।
हमारे देश में जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे तब तक ये व्यवस्था नहीं सुधरेंगी। पर्यावरण के रक्षा के लिए स्वार्थ और लालच छोड़कर अनमोल जीवन की कीमत समझनी होंगी। अनाज के लिए हानिकारक रसायनों के उपयोग को खत्म करके जैविक खेती को अपनाना समय की मांग है, हम अपने आसपास रोज पर्यावरण और स्वास्थ्य प्रणाली को नुकसान पहुंचानेवाले घटनाओं को देखते है, लेकिन ऐसी समस्याओं पर अधिकतर लोग अपने कर्तव्य को निभाने की कोशिश भी नहीं करतें। आवश्यकता, मांग और विकास के नाम पर शहरों से जमीन गायब होकर सीमेंट में तब्दील हो रही है, पनपने के लिए पर्याप्त मिट्टी न होने के कारण शहरों में पेड़ कम हो रहे है, बरसात के मौसम में हल्की हवा से बचे हुए चंद पेड़ भी सड़कों पर उखड़कर गिर जाते हैं। बारिश का पानी सोखने के लिए शहरों में जमीन नजर नहीं आती। तापमान लगातार बढ़ रहा है, ऋतुओं का चक्र बिगड़ रहा है, जिससे लगातार फसलों को नुकसान पहुंचता है, मानवीय शरीर कमजोर हो रहा हैं।
अक्सर देखते है कि, सड़कों पर नल का पानी बहता है, दिन में सड़कों के पथदीप शुरू रहते है, लोग बेखौफ सड़कों के किनारे कचरा फेंकते है, खुले में कचरा जलाते है, राह चलते थूकते जाते हैं। प्रतिबंधित प्लास्टिक का धड़ल्ले से उपयोग होता है, कारखानों का घातक रासायनिक जल खुले में या खेतों में छोड़ा जाता है, नदियों में कचरा डालते है, बायोमेडिकल कचरा और यांत्रिकी कचरे का योग्य पद्धति से निपटान नहीं करते है, प्राकृतिक संसाधनों और ईंधन का अत्यधिक प्रयोग पर्यावरण के साथ संपूर्ण जीवसृष्टि के लिए खतरा बन रहा हैं। अस्वच्छता के कारण बीमारियों का साम्राज्य भी चरम पर होता हैं। अपशिष्ट के पुनर्चक्रण प्रणाली को गति नहीं मिल रही। बिना डर के मिलावटखोरी चलती है, अधिकतर बस्तियों, सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का आलम बरकरार दिखता हैं। लोगों को आँगन में पेड़ की जगह एक अधिक कमरा चाहिए, हर तरफ अतिक्रमण नजर आता हैं।
पर्यावरण को बचाने और अपनी सेहत को स्वस्थ रखने के लिए हम जितना संभव हो सके पैदल चलकर, साइकिल चलाकर या सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करके कार्बन फुटप्रिंट कम कर सकते हैं। घरों या संस्थानों में ग्रीन ऊर्जा का प्रयोग कर सकते है, पुनर्चक्रण के द्वारा वस्तुओं का फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं। प्लास्टिक के बजाय उसके अन्य पर्याय पर ध्यान दें, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक प्रयोग से बचें। बचे हुए खाद्य को फेंकने के बजाय उनसे कम्पोस्ट बनाएं और सस्टेनेबल सोर्स से बने प्रोडक्ट, इको-फ्रेंडली सफाई प्रोडक्ट इस्तेमाल करें, स्वच्छता भागीदारी बढ़ाएं, अधिकाधिक पेड़ लगायें।
मनुष्य अपनी असीमित आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्यावरण के रक्षा के बजाय उसका दोहन कर रहा हैं। मनुष्य से बेहतर तो पशु-पक्षी, जानवर, जीव-जंतु है, जो प्रकृति को बचाने में अनमोल भूमिका निभाते हैं। हमें अपना आलस और स्वार्थ छोड़कर पर्यावरण की रक्षा और अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी बखूबी निभानी होंगी, यह सुन्दर, स्वच्छ, अनुकूल पर्यावरण बचेगा, तभी हम पृथ्वी पर आराम से जी पायेंगे, यह सच्चाई सबने समझनी होंगी। जैसे प्रकृति हमें निस्वार्थ भाव से हमेशा देती जाती है, उसी प्रकार हमें भी उसका ख्याल रखना जरुरी बन जाता हैं। पैसों से हम सांसे नहीं खरीद सकते, जीवनावश्यक संसाधनों की पूर्ति प्रकृति द्वारा ही होती हैं। मनुष्य पर्यावरण से छेड़छाड़ करने से बचें, वरना प्रकृति अपना विनाशकारी रौद्र रूप दिखा ही रही हैं। जो वस्तु हमें सहज उपलब्ध होती है, जैसे - शुद्ध हवा, पानी, सूर्यप्रकाश, पोषक भोजन, पेड़-पौधे, हरियाली पर प्रत्येक मनुष्य, प्राणी, जीवजंतु का समान अधिकार है, इसे दूषित नहीं करना, बल्कि इसका संरक्षण करना हैं।

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