ईरान ने अमेरिका के साथ सीजफायर के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। जानें क्यों ओमान इस मांग का विरोध कर रहा है और इसका वैश्विक तेल व्यापार पर क्या असर पड़ेगा।

ओमान। स्टार समाचार वेब
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच आखिरकार सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा हो गई है। शांति बहाली की दिशा में ईरान ने एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, लेकिन इसमें शामिल एक शर्त ने वैश्विक व्यापार जगत और पड़ोसी देश ओमान की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने अपनी आर्थिक क्षति की भरपाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर 'ट्रांजिट फीस' (टोल) लगाने की मांग रखी है।
ओमान के परिवहन मंत्री अहमद बिन मोहम्मद अल फुतैसी ने ईरान के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओमान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को बिना किसी शुल्क के आवाजाही की गारंटी देते हैं। ओमान का कहना है कि वे इस मार्ग को स्वतंत्र और सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में देश के बुनियादी ढांचे (रक्षा, प्रशासनिक और नागरिक) को भारी नुकसान पहुँचा है। ईरान का तर्क है कि:
टोल से प्राप्त राशि का उपयोग युद्ध के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में किया जाएगा।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी के अनुसार, वे एक ऐसा प्रोटोकॉल बनाना चाहते हैं जिससे जहाजों को परमिट और लाइसेंस लेना पड़े, ताकि आवागमन सुगम हो सके।
चौड़ाई: ईरान और ओमान के बीच यह जलमार्ग मात्र 34 किलोमीटर चौड़ा है।
व्यापारिक केंद्र: दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% (पाँचवां हिस्सा) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
ऐतिहासिक स्थिति: आज तक इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का टोल नहीं लगाया गया है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीवनरेखा बना हुआ है।
जहाँ ईरान इस जलमार्ग को राजस्व का जरिया बनाना चाहता है, वहीं ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे मुक्त व्यापार के लिए अनिवार्य मानते हैं। अब देखना यह है कि स्थायी शांति समझौते में इस बिंदु पर क्या सहमति बन पाती है।

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