सुप्रीम कोर्ट ने ने राज्यों द्वारा अपनाई जा रही फ्री सेवा संस्कृति की कड़ी आलोचना की। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यह विकास में बाधा डालती है। केवल फ्रीबीज बांटने के बजाय पार्टियों को ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए जो लोगों की जिंदगी बेहतर करें, जैसे बेरोजगारी दूर करने की योजनाएं। जब राज्य पहले से घाटे में चल रहे हैं, तो फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों दी जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने ने राज्यों द्वारा अपनाई जा रही फ्री सेवा संस्कृति की कड़ी आलोचना की।
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
सुप्रीम कोर्ट ने ने राज्यों द्वारा अपनाई जा रही फ्री सेवा संस्कृति की कड़ी आलोचना की। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यह विकास में बाधा डालती है। केवल फ्रीबीज बांटने के बजाय पार्टियों को ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए जो लोगों की जिंदगी बेहतर करें, जैसे बेरोजगारी दूर करने की योजनाएं। जब राज्य पहले से घाटे में चल रहे हैं, तो फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों दी जा रही हैं। सालाना आय का 25 प्रतिशत विकास कार्यों में क्यों नहीं लगाया जाता। हम केवल तमिलनाडु के संदर्भ में ही बात नहीं कर रहे हैं। हम इस तथ्य पर विचार कर रहे हैं कि चुनाव से ठीक पहले योजनाएं क्यों घोषित की जा रही हैं। सभी राजनीतिक दलों समाजशास्त्रियों को अपनी विचारधारा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। यह कब तक चलता रहेगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीबीज को लेकर सख्त टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि राज्य घाटे में चल रहे हैं। इसके बाद भी कई सुविधाएं मुफ्त में दी जा रही हैं। खाने से लेकर बिजली और साइकिल तक राज्यों की तरफ से फ्री दी जा रही है। सीजेआई ने कहा कि इस तरह की फिजूलखर्ची से देश का आर्थिक विकास बाधित होगा। कोर्ट ने यह टिप्पणियां तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम केंद्र सरकार केस की सुनवाई के दौरान की है।
सिर्फ दो काम हो रहे- वेतन और नीतियों पर खर्च
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि राज्य को रोजगार के अवसर खोलने के लिए काम करना चाहिए। अगर आप सुबह से ही मुफ्त भोजन देना शुरू कर दें, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली और अब हम उस स्थिति तक पहुंच रहे हैं, जहां हम सीधे लोगों के खातों में नकद राशि स्थानांतरित कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि कल्पना कीजिए। अधिकांश राज्य राजस्व घाटे में हैं, लेकिन, फिर भी केवल इन्हीं नीतियों के कारण वे ऐसा करने को मजबूर हैं। फिर विकास के लिए कोई पैसा नहीं बचता। इसलिए केवल दो ही काम हो रहे हैं। एक अधिकारियों को वेतन देना और दूसरा इन नीतियों पर खर्च करना।
कहां से मिलेगी धनराशि
सीजेआई ने कहा कि राज्य घाटे में चल रहे हैं, फिर भी मुफ्त सुविधाएं बांट रहे हैं। देखिए, आप एक साल में जो राजस्व इकट्ठा करते हैं, उसका 25 प्रतिशत राज्य के विकास के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता। राज्य को यह हलफनामा दाखिल करना चाहिए कि उसे ये धनराशि कहां से मिलेगी। फिजूलखर्ची से देश का आर्थिक विकास बाधित होगा। हां, कुछ लोग इसे वहन नहीं कर सकते हैं। कुछ लोग शिक्षा या बुनियादी जीवन की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते हैं।
जमींदारों को भी मुफ्त बिजली मिलती...
यह राज्य का कर्तव्य है कि वह ये सुविधाएं प्रदान करे, लेकिन, जो लोग मुफ्त सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, उनकी जेब में सबसे पहले पैसा जा रहा है। क्या यह ध्यान देने योग्य बात नहीं है। हम ऐसे राज्यों को जानते हैं जहां बड़े जमींदारों को भी मुफ्त बिजली मिलती है। आप लाइट जलाते हैं, मशीन चलाते हैं। अगर आपको कोई सुविधा चाहिए तो उसके लिए आपको भुगतान करना पड़ता है, लेकिन यह पैसा जो राज्य सरकार देने की बात कर रही है। उसका भुगतान कौन करेगा। यह टैक्स का पैसा है।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर (SIR) को रोकने समेत तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पढ़ें पूरी खबर।
बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान अर्नब देर रात उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों से टकरा गया। लैंडफॉल के दौरान तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश और 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। तूफान के असर से कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सेवा संकल्प यात्रा में शामिल प्रतिभागियों से संवाद किया। उन्होंने यात्रियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि जीवन में सेवा ही हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए। हमें सिर्फ उपदेशों से नहीं, बल्कि अपने आचरण और कर्मों से सेवा का संदेश देना है।
झारखंड के जमशेदपुर स्थित सोनारी मरीन ड्राइव पर गुरुवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। अनियंत्रित ट्रक ने एक स्विफ्ट डिजायर कार को पीछे से टक्कर मार दी। इस हादसे में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय की छोटी बेटी तृषा समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
यमुना एक्सप्रेसवे पर देर रात एयरपोर्ट इंटरचेंज के पास 35 किमी माइलस्टोन पर डबल डेकर स्लीपर बस आग का गोला बन गई। हादसे में बस के अंदर फंसे नौ यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मृतकों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल बताए जा रहे हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तानाशाही का आरोप लगाया है। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने और संसद से सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में CJI को शामिल करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच का बंटा हुआ फैसला। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की टिप्पणियां और 5 जजों की बेंच के गठन की संभावना।
पटना हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें सलवार उतारने और सीने को दबाने की कोशिश को रेप की कोशिश नहीं माना गया था। जानें इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए प्रभारियों और सह-प्रभारियों की घोषणा कर दी है। संजय भाटिया को राजस्थान और बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश का प्रभार सौंपा गया है। जानिए किस नेता को मिली कौन सी जिम्मेदारी।
बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत विभिन्न गंगा घाटों पर कर्मा-धर्मा पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसे सामने आए हैं। अथमलगोला, बख्तियारपुर और बाढ़ थाना क्षेत्रों में गंगा नदी में स्नान और विसर्जन के दौरान 11 लोग डूबने लगे।