कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को निर्देश दिया कि, वे जांच में सहयोग करें और बुलाए जाने पर थाने में पेश होंगे। साथ ही सबूतों को प्रभावित करने या उनके साथ छेड़छाड़ करने से बचेंगे।

पवन खेड़ा को शर्तों के साथ मिली अग्रिम जमानत
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को निर्देश दिया कि, वे जांच में सहयोग करें और बुलाए जाने पर थाने में पेश होंगे। साथ ही सबूतों को प्रभावित करने या उनके साथ छेड़छाड़ करने से बचेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे है। कोर्ट ने खेड़ा को यह भी बताया कि, वे कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को यह अनुमति भी दी कि, अगर जरूरत हो तो वह इन शर्तों में और शर्तें जोड़ सकते है। साथ ही निर्देश दिया कि जमानत की सुनवाई में पेश किए गए दस्तावेजों या तथ्यों पर ध्यान न दें।
कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया था फैसला
दरअसल, एक दिन पहले दोनों पक्षों की ओर से तीखी टिप्पणियों से भरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे एक अभूतपूर्व मामला बताया था और मुख्यमंत्री के लिए व्यंग्यात्मक रूप से अभियोजक के बॉस के बॉस के बॉस जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
सिंघवी ने कोर्ट में की थी तीखी बहस
यह संदर्भ सरमा की उन टिप्पणियों के लिए था, जिन्हें सिंघवी ने कोर्ट में दोहराने से इनकार कर दिया था। उन्होंने उन्हें अप्रकाशनीय बताया और कोर्ट को केवल इतना बताया था कि उनके मुवक्किल को आजीवन कारावास की धमकी दी गई थी। सिंघवी ने कहा था, अगर डॉ. अंबेडकर यह कल्पना करते कि कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति किसी काउबॉय या रैम्बो की तरह बोलेगा, तो वे अपनी कब्र में करवटें बदलते।
मानहानि और प्रतिष्ठा को नुकसान
सिंघवी ने यह भी बताया था कि उनके मुवक्किल के खिलाफ ज्यादातर आरोप मानहानि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से जुड़े हैं, और इनमें से किसी के लिए भी गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है, जैसा कि मांगा गया था। उन्होंने कहा, मान लीजिए कि मैं अंतत दोषी ठहराया जाता हूं, उसके बाद भी इसमें गिरफ्तारी की जरूरत कहां है। इस मामले में ऐसा क्या है जो बिना गिरफ्तारी के नहीं किया जा सकता।
गिरफ्तारी की जरूरत पर दिया था जोर
इसके जवाब में, मेहता ने जोर देकर कहा था कि, खेड़ा से हिरासत में पूछताछ की जरूरत है। ताकि उन तस्वीरों और दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाया जा सके। जिन्हें कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री की पत्नी के बारे में अपने बयानों के समर्थन में पेश किया था सॉलिसिटर जनरल ने विदेशी तत्वों द्वारा हमारे चुनावों में हस्तक्षेप का अस्पष्ट संदर्भ दिया और यह भी दावा किया कि खेड़ा फरार थे।
हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी याचिका
खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट द्वारा पिछले हफ्ते उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था; हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता के देश छोड़कर भाग जाने का जोखिम है और उन पर धोखाधड़ी और जालसाजी सहित गंभीर आरोप हैं। वहीं, दो हफ्तों में यह दूसरी बार है, जब पवन खेड़ा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए हैं। 17 अप्रैल को उन्हें बताया गया था कि, कोर्ट तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट बेल पर लगी रोक को नहीं हटाएगा।
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