ग्वालियर की चंबल माटी से छात्र राजनीति के शिखर तक पहुंचे और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्णकालिक कार्यकर्ता से मध्य प्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष बने प्रवीण शर्मा के साथ स्टार समाचार की खास बातचीत।

मध्य प्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष बने प्रवीण शर्मा से खास बातचीत
ग्वालियर की चंबल माटी से छात्र राजनीति के शिखर तक पहुंचे और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्णकालिक कार्यकर्ता से मध्य प्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष बने प्रवीण शर्मा के साथ स्टार समाचार की खास बातचीत। इस साक्षात्कार में उन्होंने अपने संघर्ष, संघ के संस्कारों, युवा विज़न और राजनीतिक सफर पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
सवाल: प्रवीण जी, भोपाल से चंबल और चंबल में भिंड और उसमें आपका क्षेत्र बहुत दूर है। कैसे इतना लंबा सफर तय किया?
जवाब: सफर ऐसा था कि संगठन में काम करते-करते ग्वालियर में संगठन से जुड़ना हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कार्यकर्ता बना। 2006 में पढ़ाई पूरी होने के बाद पूर्णकालिक के रूप में काम करना शुरू किया।
सवाल: विद्यार्थी परिषद की तरफ झुकाव कैसे हुआ? कौन आपके लिए प्रेरणा बना?
जवाब: मैं केमिस्ट्री की कोचिंग पढ़ता था। हमारे दिवंगत शिक्षक डॉ. हरेंद्र शर्मा जी सुबह-सुबह हरि ओम पवार की कविताएं सुनाते थे और राष्ट्रवाद की बात करते थे। कैंपस में विद्यार्थी परिषद राष्ट्रवाद की बात करता था, इसलिए स्कूल समय से ही दीवारों पर 'जॉइन एबीवीपी' लिखा देखकर इस संगठन से जुड़ने की प्रेरणा मिली। ग्वालियर के मिल स्कूल में मेरी पढ़ाई हुई और कोचिंग के माध्यम से मैं संगठन से कनेक्ट हुआ।
सवाल: क्या छात्र राजनीति पढ़ाई को डिस्टर्ब करती है?
जवाब: यह बात बिल्कुल गलत है। जो पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह बिल्कुल भी बाधा नहीं बनती। विद्यार्थी परिषद में कई अच्छे पढ़ने वाले लोग आपको पूर्णकालिक और उच्च स्थानों पर मिलेंगे। हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की डिग्रियां और उनका उदाहरण हमारे सामने है। छात्र राजनीति और पढ़ाई दोनों का कोई मेल न होने वाली बात सही नहीं है।
सवाल: विद्यार्थी परिषद में प्रवीण शर्मा को किसने पहचाना और आगे बढ़ाया?
जवाब: संगठन में जब काम करते हैं तो कोई एक आंख नहीं होती, बहुत सारी आंखें आपको देख रही होती हैं। मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली—चाहे ग्वालियर में काम करना हो, टेक्निकल स्टूडेंट्स के बीच काम करना हो, या उज्जैन में संगठन मंत्री जाना हो—मैंने पूरी निष्ठा से निभाई। स्कूल का अध्यक्ष बनने से लेकर मध्य प्रदेश सह-संगठन मंत्री तक का सफर इसी तरह तय हुआ।
सवाल: जब आप पूर्णकालिक बन रहे थे, तब आपके पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर कोई विरोध हुआ था क्या?
जवाब: पिताजी रेलवे में थे, इसलिए घर का कोई बहुत ज्यादा राजनीतिक कल्चर नहीं था। जब मैं प्रदेश सह-संगठन मंत्री बन गया, तब भी मेरे घर पर किसी को मेरी सटीक जिम्मेदारी का अंदाजा नहीं था। बस उन्हें यह लगता था कि यह कैसी राजनीति है जो कभी इस शहर में तो कभी उस शहर में होती है। एक बार रेलवे स्टेशन पर एक छात्र ने फेसबुक पर मेरा फोटो मेरे पिताजी को दिखाया, तब उन्हें पता चला कि मैं क्या जिम्मेदारी संभाल रहा हूं।
सवाल: एबीवीपी और अन्य छात्र संगठनों जैसे एनएसयूआई के काम करने के तरीके में क्या अंतर है?
जवाब: विद्यार्थी परिषद में हम चेहरा देखकर नियुक्तियां नहीं करते। हम कैंपस में सदस्यता अभियान चलाते हैं और सभी छात्रों को जोड़ते हैं। जो छात्र काम में जुड़ते हैं, उनकी पर्सनालिटी डेवलपमेंट के लिए हम उन्हें मौके देते हैं। यहां कोई बड़ा सीनियर लीडर नहीं जाता, सामान्य विद्यार्थी ही अपनी बात रखता है।
सवाल: महाकौशल, उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर—आपको किस शहर में काम करने का सबसे ज्यादा आनंद आया?
जवाब: मध्य प्रदेश के हर अंचल का अपना अलग टेस्ट है। जबलपुर में नर्मदा जी के प्रभाव के कारण छात्र दिन-रात काम में लगे रहते हैं। इंदौर का विद्यार्थी लेट उठता है और रातभर काम करता है। उज्जैन महाकाल की नगरी है और छात्र राजनीति का गढ़ रहा है। ग्वालियर का तापमान थोड़ा हाई और आक्रामक है। सभी शहरों का अपना अलग मजा है और हर जगह बेहतरीन दोस्त बने।
सवाल: चंबल से होने के कारण क्या आपके अंदर अग्रेशन है?
जवाब: अग्रेशन स्थिति के अनुसार होता है। जो लोग मुझे जानते हैं, वे जानते हैं कि संगठन मंत्री के नाते कहाँ टोकना है और कहाँ तारीफ करनी है। अग्रेशन भी है, पर उसे कहाँ दिखाना और कहाँ नहीं, यह तय करना जरूरी होता है।
सवाल: 2022 में एबीवीपी से मुक्त होने के बाद राजनीति में आपकी एंट्री कैसे हुई?
जवाब: 27 नवंबर 2022 को जयपुर अधिवेशन के बाद मैंने परिषद से वापसी की। 2023 के चुनाव के समय पार्टी ने मुझे नव-मतदाता विभाग का सह-संयोजक बनाया और बाद में उज्जैन उत्तर व दक्षिण विधानसभा में युवाओं का काम देखने की जिम्मेदारी दी।
सवाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आपका पहला परिचय कब हुआ था?
जवाब: मेरा डॉ. मोहन यादव जी से पहला परिचय 2015 में उज्जैन में हुआ था। तब वे विधायक थे और छात्रों के कुछ विषयों को लेकर सीधे कुलपति के चेंबर में पहुंच गए थे। तब मैंने महसूस किया कि छात्र राजनीति से आया हुआ नेता कैसा होता है।
सवाल: मध्य प्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में आपका क्या विज़न है?
जवाब: हमारा विज़न है कि युवा आयोग सिर्फ सरकार की योजनाओं का हितग्राही बनकर न रह जाए, बल्कि मध्य प्रदेश के विकास में अपना योगदान दे। हम एक 'फ्यूचर रेडी यूथ इकोसिस्टम' तैयार करना चाहते हैं। हाल ही में हमने कृषि नवाचार संवाद किया, जिसमें मुख्यमंत्री जी के साथ युवाओं का वन-टू-वन डिस्कशन हुआ। ऐसे प्रयोग हम जिला और ब्लॉक स्तर तक ले जाएंगे ताकि छोटे-छोटे नवाचार करने वाले युवाओं को मंच मिल सके।
सवाल: मध्य प्रदेश में बेरोजगारी और स्किल्ड यूनिवर्सिटी न होना एक बड़ी चुनौती है, इस पर सरकार क्या कर रही है?
जवाब: पिछले दो-तीन सालों में मध्य प्रदेश में लगातार उद्योग और निवेश बढ़ रहे हैं। हम इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से युवाओं को स्किल्ड बनाने के लिए काम कर रहे हैं। हम कॉलेजों और इंडस्ट्री के बीच एक सेतु का काम कर रहे हैं ताकि युवाओं को उनकी जरूरत के अनुसार सही प्रशिक्षण और रोजगार मिल सके।
सवाल: विपक्ष और अन्य संगठनों द्वारा युवाओं के मुद्दों पर लगातार आंदोलन किए जा रहे हैं, इसे आप कैसे देखते हैं?
जवाब: कई बार राजनीतिक फायदे के लिए फेक नैरेटिव सेट किए जाते हैं, जैसे पूर्व में सीजीआई के एक बयान को लेकर युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश की गई। जहां तक वास्तविक समस्याओं की बात है, सरकार पूरी तरह संवेदनशील है। यदि कहीं कोई समस्या आती है (जैसे हाल ही में बस किराए या अन्य मुद्दों पर), तो सरकार तत्काल संज्ञान लेती है और एसडीएम स्तर तक के अधिकारी मौके पर पहुंचकर त्वरित कार्रवाई करते हैं।
सवाल: आपके जीवन के प्रेरणापुंज कौन हैं?
जवाब: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई प्रचारक और वे लोग जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा में होम कर दिया, वे सभी मेरे प्रेरणापुंज हैं। दीपक जिस तरह खुद जलकर दूसरों को रोशनी देता है, वही प्रेरणा लेकर मैं समाज और संगठन के लिए कार्य कर रहा हूँ।
सवाल: क्या राजनीतिक जीवन में आपकी विधायक या सांसद बनने की कोई महत्वकांक्षा है?
जवाब: राजनीतिक जीवन में लोग महत्वाकांक्षाएं रखते हैं, मेरी भी हैं। लेकिन वह मेरे काम के साथ जुड़ी हैं। संगठन मुझे जो भी भूमिका देगा, मैं उसमें अपने आपको सार्थक सिद्ध करना चाहता हूँ।
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स्टार समाचार, स्टार स्ट्रेट, सुशील शर्मा, साप्ताहिक कॉलम
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