जानिए मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों की अंदरूनी खबरें। निर्माण विभाग की वेबसाइट से संपत्ति का ब्योरा गायब, दो संभागों में अफसरों की तनातनी और अन्य चर्चित मामले विस्तार से पढ़ें।

वेबसाइट पर सब कुछ... बस संपत्ति का पता नहीं!
मध्यप्रदेश के निर्माण से जुड़े एक विभाग की वेबसाइट इन दिनों बड़ी दिलचस्प चर्चा का विषय बनी हुई है। विभाग से जुड़ी जानकारी चाहिए तो वेबसाइट पर काफी कुछ मिल जाएगा जैसे आदेश, योजनाएं, सूचनाएं और अधिकारियों से जुड़ी तमाम जानकारियां भी। बस एक छोटी-सी जानकारी ढूंढने पर नहीं मिलती... अधिकारियों की संपत्ति! अब सवाल उठना तो लाजिमी है कि जब अधिकारियों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, तो फिर वेबसाइट पर यह जानकारी आखिर नजर क्यों नहीं आती? मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि पारदर्शिता की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन संपत्ति के कॉलम पर आते ही वेबसाइट जैसे मौन साध लेती है.. सवाल यही है कि आखिर अधिकारियों की संपत्ति छुपाने के पीछे की वजह क्या है..
दो संभागों में कलेक्टर-कमिश्नर सिस्टम बेपटरी
मध्यप्रदेश के दो बड़े संभाग इन दिनों विकास और प्रशासन से ज्यादा कलेक्टर-कमिश्नर की खटपट को लेकर चर्चा में हैं। दोनों जगह कहानी थोड़ी अलग है, लेकिन नतीजा एक साहबों के बीच अबोला! एक संभाग में कलेक्टर पहले पहुंचे और कमिश्नर बाद में आए, तो दूसरे में कमिश्नर पहले से जमे थे और कलेक्टर की एंट्री बाद में हुई। पद भले अलग हों, लेकिन दोनों संभागों में आपसी ट्यूनिंग ऐसी बिगड़ी कि अब बातचीत तक सीमित होने की खबरें मंत्रालय के गलियारों तक पहुंच गई हैं। बताया जा रहा है कि दोनों ही जगह अफसर एक-दूसरे को खास पसंद नहीं कर रहे। नतीजा यह कि समन्वय की जगह दूरी और संवाद की जगह अबोला दिखाई दे रहा है। अब निगाहें ऊपर हैं। सवाल सिर्फ इतना है कि मुख्यमंत्री की कैंची चली तो पहले किस पर चलेगी? कलेक्टर पर या कमिश्नर पर? क्योंकि दोनों के बीच की ठन गई कहानी में फिलहाल किसी एक का ‘शिकार’ होना तय माना जा रहा है।
हनुमान अंश के बाद डटे हनुमान
देश में इन दिनों नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की चर्चा है। कैंची धाम से लेकर सोशल मीडिया तक हनुमान भक्ति की धूम मची हुई है। ऐसे में महाकाल की नगरी के हनुमान जी का अंदाज कुछ अलग है..यहां तो हनुमान जी ने ऐसा मोर्चा संभाला है कि उनकी चर्चा देश से निकलकर विदेश तक पहुंचने लगी है। मामला सड़क निर्माण का है। सड़क की राह में आ रहे हनुमान मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी हुई, लेकिन हनुमान जी टस से मस होने को तैयार नहीं! तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी पूरी ताकत लगा ली, प्रशासन ने भी खूब माथापच्ची कर ली, लेकिन संकट वहीं का वहीं है। मंदिर हटाने की कोशिशें मानो हनुमान जी के सामने आकर थम गई हैं। अब तकनीक भी परेशान है और प्रशासन भी।मामला अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां सबकी निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर टिक गई हैं। देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री सड़क निकालते हैं या हनुमान जी के लिए रास्ता बदलते हैं! पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया पर हनुमान जी को वहीं रहने देने की पैरवी कर दी है।
साहब के रौब के सामने कार्रवाई मौन
राजधानी भोपाल में आवासीय मकानों में चल रहे व्यावसायिक कारोबार पर नगर निगम की सीलिंग की कार्रवाई क्या शुरू हुई, कई लोगों की धड़कनें बढ़ गईं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद निगम का अमला नियम-कायदे तलाशते हुए आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस कार्रवाई ने अफसरों के बीच एक अलग ही चर्चा छेड़ दी है। चर्चा यह है कि जिस विभाग के कुछ अफसर दूसरों के आवासीय परिसरों पर कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं, उसी विभाग के एक बड़े साहब का आवास भी कथित तौर पर व्यावसायिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल हो रहा है। बताया जा रहा है कि वहां एक बैंक का संचालन भी हो रहा है। अब मामला कार्रवाई तक पहुंचा तो फाइल आगे बढ़ने लगी, लेकिन तभी साहब का रौब और गुस्सैल मिजाज अफसरों को याद आ गया! बताते हैं कि कार्रवाई की गर्मी अचानक कुछ ठंडी पड़ गई और अब रास्ता निकालने की कवायद चल रही है। यानी शहर में सवाल यही है आम आदमी के घर में कारोबार हो तो सीलिंग, और साहब के घर में कारोबार हो तो फाइल की स्पीड धीमी?
बीमा पॉलिसी बेचने के लिए कंपनियां एजेंटों, बैंकों, ब्रोकरों और दूसरे डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों को कमीशन देती हैं। इस व्यवस्था में कमीशन कितना हो, किस उत्पाद पर कितना भुगतान उचित है और क्या ज्यादा कमीशन पाने की होड़ में ग्राहक को उसकी जरूरत से अलग पॉलिसी बेची जा सकती है—इन सवालों पर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने नए सिरे से विचार शुरू किया है।
स्टार समाचार से खास मुलाकात.. हर सवाल का सीधा जवाब
इबोला वायरस अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहा है। इसके दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का मौजूदा प्रकोप गंभीर है। डीआर कांगो में हजारों पुष्ट मामले और मौतें दर्ज हुई हैं, वहीं नाइजीरिया, युगांडा और केन्या में सामने आए मामलों ने सीमा पार प्रसार की चिंता बढ़ाई है। फिलहाल इसकी वैक्सीन नहीं होना भी एक बड़ी चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित किया है।
मध्य प्रदेश में राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी शिवनारायण सिंह चौहान ने पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी और सदस्य सचिव हर्षल पंचोली पर संस्था के कामकाज में बाधा डालने तथा 237 ‘डीम्ड ईसी’ जारी करने में अनियमितताओं के दोषी तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी एवं सदस्य सचिव उमा महेश्वरी पर कार्रवाई की मांग की है।
मैदान पर पसीना बहाता हुआ एक युवा खिलाड़ी, जिसकी आंखों में देश के लिए मेडल जीतने का सपना है, और दूसरी तरफ जिन्हें खेल का ‘क, ख, ग’ भी नहीं मालूम, वे नेता और उनके ‘राजदुलारे’ खेल संघों के सर्वेसर्वा बने बैठे हैं। पढ़िए स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ा सवाल तैर रहा है-क्या सूबे की अफसरशाही साहस के संकट से जूझ रही है। नियमों का इकबाल बुलंद करना तो दूर, व्यवस्था में कोई ऐसा दबंग चेहरा नजर नहीं आता जो मनमानी करने वालों पर सीधे नकेल कस सके।
जानिए मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों की अंदरूनी खबरें। हर रविवार को सुशील शर्मा की कलम से
किशोर कल्पीवार, साक्षात्कार, स्टार विशेष
मध्यप्रदेश में भले ही अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना तय है, लेकिन राज्य का राजनीतिक पारा अभी से उफान पर आ गया है। दोनों प्रमुख सियासी दल भाजपा और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व समय से दो साल पहले ही मैदान में उतर चुका है। इंदौर, उज्जैन, बालाघाट से लेकर भोपाल तक दिग्गजों की आवाजाही और बैठकों के दौर ने साफ कर दिया है कि सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए घेराबंदी शुरू हो चुकी है।
जानिए मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों की अंदरूनी खबरें। निर्माण विभाग की वेबसाइट से संपत्ति का ब्योरा गायब, दो संभागों में अफसरों की तनातनी और अन्य चर्चित मामले विस्तार से पढ़ें।

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