भोपाल में UCC के खिलाफ AIMPLB की बैठक आयोजित। शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और आरिफ मसूद ने यूसीसी को नकारा, 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की अपील की।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्यों ने सोमवार को भोपाल के खानूगांव कैंपस में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर एक अहम बैठक की। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और AIMPLB के रुक्न-ए-आमला व कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने यूसीसी को सिरे से खारिज करते हुए इसका कड़ा विरोध किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय इस कानून को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा और इसके खिलाफ संवैधानिक व कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि देश का संविधान देश के सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पूरी गारंटी देता है। ऐसे में यूसीसी की वास्तविक जरूरत और समाज पर इसके दूरगामी प्रभावों पर बेहद गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के 1972 के एक भाषण का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि राष्ट्रीय एकता (कौमी इत्तेहाद) के लिए सिविल कोड कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। शहर काजी ने जोर देकर कहा कि पर्सनल लॉ के मामलों में केवल मुस्लिम समाज और उसके जानकार ही अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं।
सरकार को चेतावनी भरे लहजे में शहर काजी ने कहा कि जो सरकारें या हुकूमतें अल्पसंख्यकों पर जुल्म और ज्यादती करती हैं, उनका सूरज आखिरकार गुरूब (अस्त) हो जाता है, उनका जहाज डूब जाता है और वे इतिहास में पनप नहीं पातीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह बयान किसी के प्रति दुश्मनी या द्वेष की भावना से नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि देश में अमन, शांति और भाईचारा कायम रहे। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम ने सदियों पहले महिलाओं को मां, बेटी, पत्नी और संपत्ति में हिस्सेदारी के रूप में पूर्ण अधिकार और सम्मान दिया है।
कांग्रेस विधायक और बोर्ड के सदस्य आरिफ मसूद ने जानकारी दी कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कभी भी किसी संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसले नहीं लेता। देश भर के विभिन्न संगठनों और वर्गों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं। उन्होंने घोषणा की कि मध्य प्रदेश के बोर्ड से जुड़े पांच प्रमुख सदस्यों की बैठक के बाद, अब 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन में मध्य प्रदेश के लोगों से भारी संख्या में शामिल होने की अपील की जा रही है।
यूसीसी के खिलाफ कानूनी रणनीति पर बात करते हुए आरिफ मसूद ने बताया कि बोर्ड की लीगल टीम पूरी तरह तैयार है और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी वकील अपने स्तर पर होमवर्क कर रहे हैं। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे जल्दबाजी में व्यक्तिगत स्तर पर अलग से याचिकाएं दाखिल न करें, बल्कि बोर्ड द्वारा तैयार किए गए मसौदे और विशेषज्ञ वकीलों के मार्गदर्शन में ही एकजुट होकर कानूनी कदम उठाएं। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर संविधान प्रदत्त अधिकारों के दायरे में रहकर पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी।

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