जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रांसफर होने पर अब टीए और एचआरए मिलेगा। कोर्ट ने सरकार को 6 महीने में नीति बनाने के दिए निर्देश।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में पदस्थ लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के लिए जबलपुर हाईकोर्ट से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने रोजगार सहायकों के तबादलों और मिलने वाले आर्थिक लाभों से जुड़ी याचिकाओं पर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत के इस निर्णय के बाद अब राज्य सरकार जब भी किसी रोजगार सहायक का तबादला करेगी, तो उसे अनिवार्य यात्रा भत्ता (CTA), यात्रा भत्ता (TA), डोमेस्टिक अलाउंस और मकान किराया भत्ता (HRA) प्रदान करना होगा।
इस पूरे मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ में हुई। 14 अक्टूबर को विस्तृत दलीलों और तथ्यों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिका पर अंतिम आदेश जारी करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रोजगार सहायकों को केवल स्थानांतरित करना ही काफी नहीं है, बल्कि दूरी और आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें उचित भत्ते दिया जाना भी अनिवार्य है। इस दिशा में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के उद्देश्य से अदालत ने राज्य सरकार को 6 महीने के भीतर एक ठोस नीति बनाने का सख्त निर्देश दिया है।
यह कानूनी लड़ाई राज्य के पांच ग्राम रोजगार सहायकों ने मिलकर शुरू की थी। सिंगरौली जिले के अमित कुमार मिश्रा, शहडोल के शिवाकांत मिश्रा व राजेश कुमार, सागर जिले के रानू राजपूत और टीकमगढ़ के अभिषेक पटेरिया ने 18 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासनिक स्तर पर बिना किसी वित्तीय सहायता और भत्तों के किए जा रहे दूर-दराज के तबादलों को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने रोजगार सहायकों के पक्ष में यह दिशानिर्देश जारी किया।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता गोपेश यश तिवारी ने अदालत के समक्ष रोजगार सहायकों की वित्तीय स्थिति का ब्योरा रखा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ग्राम रोजगार सहायकों को महज 18 हजार रुपये का सीमित मासिक वेतन मिलता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी का तबादला उसके मूल स्थान से 100 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर कर दिया जाता है, तो नए स्थान पर किराए का मकान लेने और आने-जाने के खर्च के कारण उसे गंभीर आर्थिक संकट झेलना पड़ता है।
अदालत ने इन व्यावहारिक कठिनाइयों को जायज मानते हुए राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे आगामी छह महीने के भीतर ट्रांसफर अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार करें। इस नीति के लागू होने से प्रदेश भर के लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों को बड़ा आर्थिक संबल मिलेगा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण संतुलन भी बनाया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से तबादला प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगाने या ट्रांसफर न किए जाने की मांग रखी गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य सरकार और प्रशासन अपनी प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार ग्राम रोजगार सहायकों का स्थानांतरण करने के लिए स्वतंत्र रहेगा। हालांकि, सरकार अब बिना भत्तों के मनमाने तरीके से तबादला नहीं कर सकेगी; सरकार को तय नीति के तहत कर्मचारियों को सभी अनिवार्य भत्ते और वित्तीय लाभ मुहैया कराने होंगे।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित जमानत अर्जियों के शीघ्र निराकरण के लिए चीफ जस्टिस के निर्देश पर 7 विशेष एकल पीठों का गठन किया गया है। 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे सुनवाई हो रही है। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रांसफर होने पर अब टीए और एचआरए मिलेगा। कोर्ट ने सरकार को 6 महीने में नीति बनाने के दिए निर्देश।
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