सतना और मैहर वनमंडल की 151 बीटों में अखिल भारतीय बाघ गणना का पहला चरण शुरू हुआ। मझगवां में वयस्क टाइगर के पगमार्क, अन्य क्षेत्रों में तेंदुआ, हायना और भालू के प्रमाण मिले, जो जंगलों के सुरक्षित ठिकाना बनने का संकेत हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
यहां के दोनों वनमंडलों में मुस्तैदी के साथ अखिल भारतीय बाघ गणना की शुरूआत हुई। प्रथम चरण के पहले दिन मांसाहारी वन्य प्राणियों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रमाण लेने के प्रयास हुए। इसमें मझगवां के जंगलों में टाइगर्स के पदचिन्ह मिले वहीं बाकी के जंगलों में तेंदुआ का भिष्टा सहित अन्य अप्रत्यक्ष प्रमाण मिले। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि सतना और मैहर वनमंडल के जंगल वन्यप्राणियों के लिए महफूज ठिकाना बनते जा रहे हैं।
गुरुवार की सुबह के साथ शुरू हुई अखिल भारतीय बाघ गणना के प्रथम चरण सतना और मैहर वनमंडल की 151 बीटों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रमाण एकत्र किए गए। इस दौरान बरौंधा, मझगवां, मैहर, चित्रकूट और उचेहरा वन परिक्षेत्र में टाइगर्स, तेंदुआ, हायना सहित अन्य वन्य प्राणियों के अप्रत्यक्ष प्रमाण मिले। जानकारी के मुताबिक मझगवां वनपरिक्षेत्र में टाइगर्स के पगमार्क मिले हैं। ये मार्क करीब सात बीटों में दिखे हैं। इस वन परिक्षेत्र में कुल 17 बीटें हैं। पगमार्क वयस्क टाइगर के देखे गए हैं। इसके अलावा बरौंधा, मैहर, उंचेहरा और चित्रकूट में तेंदुआ के पगमार्क के साथ साथ भिष्टा भी दिखी।
शावक के साथ मादा
दोनों वनमंडलों में वन्य जीवों का कुनबा आबाद है। यही कारण है कि गणना के दौरान पैदल चल रहे वनकर्मियों के तमाम तरह के वन्य प्राणियों के प्रमाण मिल रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मैहर वनमंडल के मैहर वनपरिक्षेत्र में मादा अपने शावकों के साथ देखी गई है। यहां तेंदुआ मादा और शावकों को प्रत्यक्ष रुप से देखा गया है। यहीं कुछ बीटों में तेंदुओं के पंजों का नाखून भी मिला है। इस वनपरिक्षेत्र में 20 बीट हैं जबकि 30 हजार हेक्टेयर का वन क्षेत्र है।
हायना की भिष्टा मिली
इसी क्रम में सतना वन मंडल के उचेहरा वनपरिक्षेत्र में तेंदुआ के पगमार्क तो मिले ही साथ में हायना का भी पगमार्क भी देखा गया। पैदल चल रहे वनकर्मियों ने इस बात को एप में आॅफलाइन अपलोड कर लॉक कर लिया है। इसके अलावा भालू के भी पदचिन्ह उचेहरा के जंगलों में देखने को मिले हैं। इस वनपरिक्षेत्र में कुल 16 बीट हैं इसका एरिया करीब 29 हजार हेक्टेयर का है।
चित्रकूट में पुराना मल
बाघ गणना के क्रम में 5 किलोमीटर पैदल चल कर वनकर्मी डाटा एकत्र करने में लगे रहे। चित्रकूट के जंगल में वनप्राणियों की मौजूदगी के प्रमाण मिले। इस जंगल में कई जगह पुराना मल मिला जिसे उपयोगी नहीं माना गया। इस तरह से कई जगह देखने को मिला जिसे अपलोड नहीं किया गया। जानकारी के मुताबिक चित्रकूट वनपरिक्षेत्र में 15 बीट हैं इसका एरिया करीब 18 हजार हेक्टेयर में फैला हुआ है।

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