शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर केस दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज अपने आरोपों से पलट गए हैं। उन्होंने रामचंद्र दास पर फर्जी मुकदमा लिखवाने और गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है।

मथुरा/बेंगलुरु। स्टार समाचार वेब
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दो बटुकों के यौन शोषण का मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज अपने आरोपों से पीछे हट गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सनसनीखेज दावा किया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने उन पर दबाव बनाकर अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। आशुतोष ब्रह्मचारी के इस यू-टर्न से इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद में एक नया मोड़ आ गया है।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि उन्हें गुमराह कर इस पूरे मामले में घसीटा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गहरी साजिश में कुछ प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल थे। आशुतोष ने दावा किया कि उनके पास इस पूरी साजिश से जुड़े पुख्ता सबूत और वॉट्सऐप चैट मौजूद हैं, जिन्हें वे जल्द ही सार्वजनिक करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनके गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य को कोई भी नुकसान पहुँचता है, तो उसके लिए सीधे तौर पर रामचंद्र दास जिम्मेदार होंगे।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अपने गुरु भाई रामचंद्र दास पर तीखे हमले करते हुए उन्हें ढोंगी और फ्रॉडी करार दिया। आशुतोष ने दावा किया कि रामचंद्र दास ने एक फर्जी वसीयत तैयार कर 'श्री देव बाबा जी आश्रम' पर अवैध कब्जा किया है। इस संबंध में उन्होंने मथुरा के एसएसपी को एक लिखित शिकायत भी भेजी है। आशुतोष का कहना है कि यदि पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और रामचंद्र दास के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। हालांकि, मथुरा के एसएसपी श्लोक कुमार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें फिलहाल ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है और न ही उनकी आशुतोष ब्रह्मचारी से कोई मुलाकात हुई है।
इससे पहले सोमवार को तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आशुतोष ब्रह्मचारी के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि आशुतोष उनकी और उनके उत्तराधिकारी रामचंद्र दास की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहा है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भावुक होते हुए कहा, "मुझे आशुतोष का आपराधिक इतिहास जानकर अब डर लगने लगा है, मैं कांप रहा हूँ।"
आशुतोष द्वारा खुद को शिष्य बताए जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे देश-दुनिया में कथा करने जाते हैं, संभव है कि आशुतोष ने कहीं उनसे दीक्षा ली हो, लेकिन वे उसके इस स्वभाव और गलत मंशा से अनजान थे। उन्होंने किसी शिष्य द्वारा गुरु की हत्या की आशंका जताए जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और प्रशासन से इसकी जांच कराने की बात कही।
इस पूरे मामले पर कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई मामला गंभीर आपराधिक धाराओं से जुड़ा है, तो उसे महज बयान बदलकर वापस नहीं लिया जा सकता। इसके लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य होती है और दोनों पक्षों को कोर्ट के समक्ष पर्याप्त सबूत पेश करने होते हैं। यदि यह साबित हो जाता है कि किसी ने जानबूझकर झूठी एफआईआर दर्ज कराई थी, तो अदालत उस व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है। साथ ही पीड़ित पक्ष मानहानि और मुआवजे का दावा भी ठोक सकता है।
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