जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में 13 लोगों की जान जाने के बाद पर्यटन विभाग की लापरवाही सामने आई है। इंजन फेलियर, बीमा की कमी और सबूत मिटाने के आरोपों के बीच जांच तेज।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
जबलपुर के बरगी डैम में हुए भीषण क्रूज हादसे ने पर्यटन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। इस हादसे में 13 लोगों (4 बच्चे, 8 महिलाएं और 1 पुरुष) की दर्दनाक मौत के बाद अब तकनीकी खामियों और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर तीखे सवाल पूछे जा रहे हैं। क्रूज के पायलट महेश पटेल के ताजा बयान ने इस पूरी घटना में 'सिस्टम की खराबी' की ओर इशारा किया है।
हादसे के वक्त क्रूज चला रहे पायलट महेश पटेल ने दावा किया है कि क्रूज का एक इंजन पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा था। पायलट के अनुसार, वापसी के दौरान अचानक तेज हवाएं और ऊंची लहरें उठने से क्रूज में पानी भरने लगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संचालन से पहले उन्हें मौसम के 'यलो अलर्ट' की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। पायलट ने सुरक्षा में चूक की बात स्वीकारते हुए कहा कि कई यात्री फोटो-वीडियो बनाने के मोह में लाइफ जैकेट नहीं पहन रहे थे।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल क्रूज के मेंटेनेंस पर उठ रहा है। पर्यटन निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2024 में ही इस क्रूज का 'मीडियम री-फिट' किया गया था, जिस पर करीब 38 लाख रुपये खर्च हुए थे। दावा किया गया था कि इंजन, शॉफ्ट और हल समेत 17 तकनीकी बदलावों के बाद क्रूज की उम्र 10 साल बढ़ गई है। विशेषज्ञों का पूछना है कि यदि क्रूज अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप री-फिट हुआ था, तो हाल ही में उसका इंजन कैसे फेल हो गया? क्या मेंटेनेंस के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति और भ्रष्टाचार किया गया?
घटनास्थल पर एक और संदिग्ध कार्रवाई देखने को मिली। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के पहुंचने से पहले ही क्षतिग्रस्त क्रूज को तोड़ दिया गया। जानकारों का मानना है कि इस जल्दबाजी की वजह से अहम तकनीकी सबूत नष्ट हो गए होंगे, जो हादसे के असली कारणों (जैसे इंजन की स्थिति या लीकेज) का खुलासा कर सकते थे। इस कदम ने विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि 20 साल पुराना यह क्रूज बिना किसी वैध बीमा (Insurance) के चलाया जा रहा था, जो सीधे तौर पर केंद्रीय कानूनों का उल्लंघन है। हैरानी की बात यह है कि 200 रुपये का टिकट लेने के बावजूद यात्रियों का कोई व्यक्तिगत बीमा नहीं था। अन्य राज्यों में क्रूज टिकट के साथ 5 लाख रुपये तक का सुरक्षा कवर अनिवार्य होता है, लेकिन मध्य प्रदेश में पर्यटन विभाग ने इस ओर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा।
इस पूरे मामले पर राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा है कि घटना की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जांच समिति तकनीकी खामियों, मेंटेनेंस और प्रशासनिक लापरवाही जैसे सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करेगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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