सीबीआई ने भारत के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले 'Gain Bitcoin' में डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार किया है। ₹20,000 करोड़ के इस पोंजी स्कीम मामले में आरोपी मुंबई एयरपोर्ट से विदेश भागने की फिराक में था। जानें कैसे तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल कर लाखों निवेशकों से ठगी की गई।
By: Ajay Tiwari
Mar 11, 20261:59 PM
मुख्य गिरफ्तारी: डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय गिरफ्तार।
बड़ी साजिश: पोंजी स्कीम के लिए तकनीकी ढांचा और MCAP टोकन तैयार किया।
लुक आउट सर्कुलर: आरोपी के खिलाफ पहले से LOC जारी था, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया।
पीड़ित: देशभर के लाखों निवेशकों के ₹20,000 करोड़ डूबने का अनुमान।
नई दिल्ली/मुंबई। स्टार समाचार वेब
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देश के बहुचर्चित ₹20,000 करोड़ के गेन बिटकॉइन (Gain Bitcoin) घोटाले में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। एजेंसी ने डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, वार्ष्णेय को उस समय हिरासत में लिया गया जब वह मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे।
डिजिटल साजिश का खुलासा
जांच में सामने आया है कि आयुष वार्ष्णेय और उनकी कंपनी डार्विन लैब्स ने ही वह तकनीकी बुनियाद तैयार की थी, जिस पर यह पूरा घोटाला खड़ा था। सीबीआई का आरोप है कि आरोपियों ने मिलकर 'MCAP' नामक क्रिप्टो टोकन और ERC-20 स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट विकसित किए थे। इन डिजिटल उपकरणों का उपयोग निवेशकों को भ्रमित करने और पोंजी स्कीम चलाने के लिए किया गया।
इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बुना गया जाल
सीबीआई की जांच के अनुसार, डार्विन लैब्स ने घोटाले को अंजाम देने के लिए कई महत्वपूर्ण पोर्टल बनाए थे:
GBMiners.com: बिटकॉइन माइनिंग पूल के लिए।
कॉइन बैंक: बिटकॉइन वॉलेट के तौर पर।
गेन बिटकॉइन वेबसाइट: निवेशकों से सीधा संपर्क करने के लिए।
कैसे हुई ₹20,000 करोड़ की ठगी?
यह घोटाला 2015 में अमित भारद्वाज (अब मृत) और उसके भाई अजय भारद्वाज द्वारा शुरू किया गया था। कंपनी ने निवेशकों को लुभाने के लिए 18 महीने तक हर महीने 10% रिटर्न का वादा किया था। यह पूरी योजना एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) मॉडल पर आधारित थी। जब 2017 में नए निवेशकों का आना कम हुआ, तो कंपनी ने बिटकॉइन में भुगतान बंद कर दिया और निवेशकों को अपना खुद का 'MCAP' टोकन देना शुरू कर दिया, जिसकी बाजार में कोई कीमत नहीं थी। इस धोखाधड़ी के तार दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक जुड़े हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच
मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी थी। एजेंसी अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि निवेशकों से हड़पा गया पैसा किन विदेशी खातों में भेजा गया है।