आषाढ़ी अमावस्या पर चित्रकूट में लाखों श्रद्धालु पहुंचे, लेकिन प्रकाश, पेयजल और विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। प्रशासनिक तैयारियों और जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे।

हाइलाइट्स:
चित्रकूट, स्टार समाचार वेब
14 जुलाई को आषाढ़ी अमावस्या के अवसर सोमवार देर रात से ही लाखों लोग धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचने लगे थे। प्रशासन ने इस बार लगभग चार लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया था लेकिन मौके पर भीड़ इससे कहीं अधिक दिखाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार श्रद्धालुओं की संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच सकती है। सोमवार देर रात बांदा मार्ग से राम सैया होते हुए श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहा। रात करीब एक बजे तक सड़कों पर लंबी कतारें देखी गईं। कई परिवारों ने राम सैया स्थित चबूतरों पर रात बिताई। यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए रैन बसेरे में ताला लगा होने से प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठे।
श्रद्धालुओं को बांदा-राम सैया मार्ग पर सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण लोगों को अंधेरे में ही पैदल चलना पड़ा। महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से कठिनाई हुई। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि रास्ते में पीने के पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं थी जिससे उन्हें उमस भरी गर्मी में परेशानी झेलनी पड़ी।
प्रशासन ने अमावस्या मेले के लिए व्यापक तैयारियों का दावा किया था। हालांकि जमीनी हकीकत अलग दिखी जहां श्रद्धालुओं के लिए विश्राम पेयजल और प्रकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं कई स्थानों पर अनुपलब्ध थीं। इस स्थिति में व्यवस्थाओं के केवल कागजों तक सीमित रहने के आरोप भी लगे।
प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। हालांकि बढ़ती भीड़ के बीच मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। बेहतर पेयजल प्रकाश और विश्राम व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की यात्रा को अधिक सुगम बना सकती थीं।
इधर प्रथम द्वार पर मुस्तैद रहे प्रभारी तहसीलदार
चित्रकूट में अमावस्या मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला व्यवस्था को सुचारु एवं सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहा। प्रभारी तहसीलदार एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट मझगवां डॉ. सुदामा प्रसाद प्रथम द्वार पर स्वयं मौजूद रहकर व्यवस्थाओं का लगातार निरीक्षण करते रहे। उन्होंने पुलिस एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ समन्वय स्थापित कर श्रद्धालुओं के आवागमन, सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाते हुए शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से मेले का संचालन सुनिश्चित करना रहा। प्रथम द्वार पर प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार मौजूदगी से मेला क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली और श्रद्धालुओं का आवागमन सुचारु रूप से चलता रहा।
चित्रकूट में मंदाकिनी फिर मैली
धर्मनगरी चित्रकूट की आस्था का केंद्र मां मंदाकिनी नदी एक बार फिर सरकारी दावों की पोल खोलती दिखाई दे रही है। रामघाट एवं उसके आसपास किए गए मौके के निरीक्षण, वीडियो और तस्वीरों में कई स्थानों पर नालों से काला, दुर्गंधयुक्त सीवर का पानी सीधे मंदाकिनी नदी में गिरता दिखाई दे रहा है। नदी के किनारों पर प्लास्टिक, कचरा, जलकुंभी और गंदगी के ढेर साफ नजर आ रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब वर्षों से नदी को स्वच्छ बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं और समय-समय पर न्यायालयों तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण ( एनजीटी) भी सख्त निर्देश जारी कर चुका है। आरोप है कि रामघाट सहित कई घाटों पर दर्जनों स्थानों से सीवर का गंदा पानी सीधे मां मंदाकिनी में मिल रहा है और इसे रोकने में मध्यप्रदेश तथा उत्तरप्रदेश सरकारें विफल रही हैं। आखिर यह सीवर कब रुकेगा और यह तस्वीरें कब बदलेंगी। धर्मनगरी चित्रकूट में मां मंदाकिनी केवल एक नदी नहीं, करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। यदि आस्था की इस धारा में आज भी सीवर बह रहा है, तो यह केवल पर्यावरणीय विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल है। अब देखना होगा कि सरकारें और जिम्मेदार एजेंसियां इस बार केवल आश्वासन देती हैं या वास्तव में मंदाकिनी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए ठोस कार्रवाई करती हैं।
मौके पर क्या मिला?
कई स्थानों पर नालों से लगातार गंदा पानी नदी में गिरता दिखाई देता है। रामघाट के आसपास पानी की सतह पर कचरा, प्लास्टिक, जलकुंभी और सीवर का बहाव स्पष्ट नजर आता है। कुछ स्थानों पर नाले के आउटफॉल से झागयुक्त गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है, जबकि घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही भी जारी है। इससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
करोड़ों खर्च, लेकिन नतीजा शून्य?
पूर्व में विभिन्न रिपोर्टों और सरकारी दावों में मंदाकिनी नदी के संरक्षण, सीवरेज प्रबंधन, घाट सौंदर्यीकरण और प्रदूषण नियंत्रण पर करोड़ों रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद यदि आज भी बिना उपचार का सीवर सीधे नदी में मिल रहा है, तो यह परियोजनाओं की प्रभावशीलता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
एनजीटी पहले भी जता चुका है सख्त नाराजगी
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ( एनजीटी) देशभर की नदियों में बिना उपचार वाले सीवेज के प्रवाह को रोकने, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने, नालों को इंटरसेप्ट करने तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने के संबंध में कई बार निर्देश दे चुका है। विभिन्न मामलों में यह भी स्पष्ट किया है कि बिना उपचार का सीवर किसी भी नदी में गिरना पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यदि चित्रकूट में आज भी यही स्थिति बनी हुई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि एनजीटी के निर्देशों का पालन किस स्तर पर हुआ और किस स्तर पर लापरवाही बरती गई।
जिम्मेदार कौन?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर निकाय, सीवरेज परियोजनाओं से जुड़ी एजेंसियां, जल संसाधन एवं नगरीय प्रशासन विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारी वर्षों से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर सके। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि बार-बार शिकायतें, समाचार और वीडियो सामने आने के बावजूद स्थिति जस की तस है, तो अब तक किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई?
जनता की मांग


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में महाकाल मंदिर से रामघाट को जोड़ने वाला 14वीं सदी का ऐतिहासिक क्षिप्रा द्वार अचानक ढह गया। हाल ही में इस पर 2.12 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा में बीती देर रात 11 लोगों की मौत हो गई। वहीं पांच लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। घटना के बाद जहरीली शराब पीने की आशंका जताई जा रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस 2026 पर मध्यप्रदेश के 6 उत्कृष्ट शिक्षकों को नेशनल टीचर अवार्ड से सम्मानित किया। जानिए इन शिक्षकों के नाम और उनके विशेष योगदान के बारे में।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर पहुंचकर प्रदेश में वर्षाजनित परिस्थितियों और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बाढ़ प्रभावितों को तत्काल भोजन, कपड़ा और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार की सैद्धांतिक अनुमति पर सवाल उठाए हैं और पुराने ड्राफ्ट का हवाला देते हुए 9 सितंबर को डेढ़ किलोमीटर लंबी 'रन फॉर मास्टर प्लान' दौड़ का ऐलान किया है।
मध्य प्रदेश में शिक्षक वर्ग 1, 2 और 3 के अभ्यर्थी पिछले 15 दिनों से नीलम पार्क, भोपाल में भूख हड़ताल कर रहे हैं। पद बढ़ाने और काउंसलिंग की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन में अब राजनीति तेज हो गई है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मंदिर पर जन्माष्टमी का त्योहार मनाने के बाद पैदल घर जा रही तीन महिलाओं को कंटेनर ने कुचल दिया। हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, दो ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया।
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 के वॉल वर्जन का लोकार्पण किया।
भोपाल के निशातपुरा थाने ने डेयरी की आड़ में गोकशी करने वाले 48 दिन से फरार 3000 के इनामी आरोपी लम्बू उर्फ नफीस को गिरफ्तार कर लिया है। पढ़ें पूरी खबर।