कांग्रेस अध्यक्ष के लिए रायशुमारी में पर्यवेक्षकों ने दागे सवाल, दावेदारों से पूछा जीत-हार और आर्थिक स्थिति तक का ब्यौरा

बताइए,आपको क्यों बनाएं अध्यक्ष
सतना, स्टार समाचार वेब
बताइए, आपको क्यों जिला अध्यक्ष क्यों बनाया जाना चाहिए? यदि आप जिला अध्यक्ष बनते हैं तो कैसे अध्यक्षी चलाएंगे? आपकी अर्थिक स्थिति कैसी है और आपके आर्थिक स्रोत क्या हैं? दरअसल दूसरे दौर की राय शुमारी के लिए सोमवार की रात दूसरी बार सतना पहुंचे पार्टी के एआईसीसी के पर्यवेक्षक व दिल्ली कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अनिल चौधरी एवं पीसीसी पर्यवेक्षक व सतना जिले के संगठन प्रभारी पूर्व विधायक विनय सक्सेना ने ये सवाल पर्यवेक्षकों से जिला कांग्रेस कमेटी शहर व ग्रामीण की अध्यक्षी की दावेदारी कर रहे दावेदारों से पूछे। उल्लेखनीय है कि जिला कांग्रेस कमेटी शहर के अध्यक्ष के लिए 22 और ग्रामीण के लिए 28 नेताओं ने अपना दावा पेश किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक अनिल चौधरी एवं पीसीसी पर्यवेक्षक पूर्व विधायक विनय सक्सेना सोमवार की देर रात सतना पहुंचे,जहां उन्होंने शहर कांग्रेस कमेटी के दावेदारों के साथ राय शुमारी की और उनसे फार्म भरवाए। रायशुमारी रात्रि बारह बजे तक चली इस राय शुमारी में पर्यवेक्षकों ने दावेदारों से संगठन के हर पहलू पर चर्चा की।
दो पद के लिए पचास आवेदन : दो अध्यक्ष भी दौड़ में
जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण व शहर अध्यक्ष के दो पद के लिए पचास कार्यकर्ताओं और नेताओं ने आवेदन किया है। शहर अध्यक्ष के लिए 22 लोगों ने अपनी दावेदारी पेश की। जिन लोगों ने अध्यक्षी के लिए दावेदारी पेश की उनमें वर्तमान शहर अध्यक्ष मुकसूद अहमद, उर्मिला त्रिपाठी, युकां के पूर्व लोकसभा अध्यक्ष राजदीप सिंह मोनू, संजू अग्रवाल, महसूद अहमद शरू, आरिफ सिद्दीकी, दिनेश दुबे डब्बू, डॉली चौरसिया, सविता अग्रवाल, राम मनोहर सोनी, अरुण पाण्डेय, रामप्रताप कुशवाहा लाला, सत्येन्द्र निगम समेत अन्य लोग शामिल हैं। इसी तरह ग्रामीण अध्यक्ष के लिए जिन लोगों ने दावेदारी पेश की है उनमें वर्तमान जिला अध्यक्ष दिलीप मिश्रा, पूर्व जिला अध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा, राजभान सिंह, गजेन्द्र सिंह परसवारा, अजीत कोटर, पूर्व विधायक कल्पना वर्मा, विधानसभा प्रत्याशी डॉ. रश्मि सिंह,कमलेन्द्र सिंह कमलू,प्रदीप समदरिया,गुरूमेन्द्र सिंह एवं के के कुशवाहा समेत अन्य नेता शामिल हैं।
निष्ठावान थे तो कैसे हारे पोलिंग?
जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण व शहर के उन दावेदारों के लिए पर्यवेक्षकों के सवालों ने खतरे की घंटी बजा दी है, जो पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अपनी पोलिंग हार गए गए हैं। दरअसल राय शुमारी के दौरान पर्यवेक्षकों ने दावेदारों से पिछले चुनाव में उनके बूथ के परिणाम को लेकर सवाल किए हैं। पर्यवेक्षकों के सवाल थे कि उनके पोलिंग का चुनाव परिणाम क्या था? पोलिंग में कांग्रेस जीती थी या हारी थी? जिन दावेदारों की पोलिंग में कांग्रेस को पराजय मिली है उनसे पर्यवेक्षकों का सीधा सवाल था कि आप चुनाव में किसके लिए काम कर रहे थे, यदि पार्टी के लिए निष्ठावान थे तो फिर पोलिंग कैसे हार गए।
उचेहरा में भी रायशुमारी
नागौद विधानसभा क्षेत्र के उचेहरा में मंगलवार को कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक अनिल चौधरी एवं पीसीसी के पर्यवेक्षक विनय सक्सेना की मौजूदगी में शहर व ग्रामीण अध्यक्ष के दावेदारों से फार्म भराए गए। साथ ही सभी दावेदारों की जमीनी स्तर तक की जानकारी एकत्र की गई। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष दिलीप मिश्रा, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रश्मि सिंह, ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालबहादुर सिंह, लक्ष्मीदीन कुशवाहा, नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हरीश ताम्रकार, रमाकांत मिश्रा, प्रदीप समदरिया, गुरुमेन्द्र सिंह, राममणि शुक्ला, आदित्य प्रताप सिंह, वीरेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।
ज्यादा दावेदार, ताकि खड़ा हो जाए विवाद
सत्ता से लगातार बाहर रहने के बावजूद जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण व शहर की अध्यक्षी के लिए लगातार दावेदारों की दावेदारी बढ़ती जा रही है। इसके पीछे अध्यक्ष के प्रमुख दावेदारों का दावा है कि यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है ताकि दावेदारों की संख्या ज्यादा होने के कारण शीर्ष नेतृत्व को यह संदेश दिया जा सके कि दावेदारों की संख्या ज्यादा होने से बगावत व विवाद की स्थिति खड़ी हो सकती है। लिहाजा दावेदारों की ज्यादा भीड़ देखते हुए वर्तमान अध्यक्षों को एक और मौका दिया जाए।
गायब हो गए आवेदन!
पार्टी सूत्रों की मानें तो जिला अध्यक्ष के लिए पहले दौर में हुई राय शुमारी में आए कई आवेदन गायब हो गए हैं। इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो आरोप लगाने वाले ही जानें पर जिस तरह से देर रात दावेदारों से दोबारा फार्म भरवाए गए उससे सवाल उठना तो लाजिमी है। बहरहाल यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है कि कैसे रायशुमारी की जाए पर सूत्रों के दावे को मानें तो पर्यवेक्षकों को अपने सतना दौरे के दौरान जिन लोगों ने पहले आवेदन किया था उनसे चर्चा करनी थी लेकिन पर्यवेक्षकों ने पुराने आवेदकों से चर्चा करने के साथ ही नए दावेदारों से फार्म भी भरवाए।
दावेदारों से यह पूछा

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