धारकुंडी धाम में परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज के महाप्रयाण पर श्रद्धा का महासंगम उमड़ा। मुख्यमंत्री समेत हजारों श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन किए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
विंध्यांचल की पर्वतमालाओं और बियावान जंगलों के बीच बसे पावन धारकुंडी धाम में इन दिनों शोक, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा है। सनातन साधना, सेवा और करुणा के साकार स्वरूप, धारकुंडी आश्रम के संस्थापक 102 वर्षीय परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज के महाप्रयाण ने पूरे विंध्य अंचल सतना, रीवा, चित्रकूट सहित दूर-दराज के प्रदेशों को भाव-विह्वल कर दिया है। एक संत का देहावसान नहीं, बल्कि एक युग की तपश्चर्या का विराम मानकर श्रद्धालु उन्हें नमन कर रहे हैं। रविवार को जब मुंबई के बदलापुर आश्रम से परमहंस स्वामीजी की पार्थिव देह धारकुंडी लाई गई तो आश्रम परिसर आस्था के विराट तीर्थ में बदल गया। शनिवार रात लगभग 8 बजे वीरेंद्र महाराज, अनिल महाराज, कमलेंद्र महाराज और जगदीश महाराज सहित संतों का काफिला करीब 25 वाहनों के साथ बदलापुर से रवाना हुआ था। जबलपुर, अमरपाटन, रीवा-ढेकहा होते हुए बड़ी सेमरिया मार्ग से यह काफिला रविवार दोपहर लगभग 1.15 बजे धारकुंडी पहुंचा। जैसे ही पार्थिव शरीर आश्रम पहुंचा, वातावरण भजन-कीर्तन से गूंज उठा। भक्तों की आंखें नम थीं, पर हृदय में गुरु-स्मरण की ज्योति प्रज्वलित थी।
सीएम-डिप्टी सीएम ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार शाम लगभग 4:25 बजे आश्रम पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री की हेलीपेड में आगवानी सांसद गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, रामपुर बाघेलान विधायक विक्रम सिंह विक्की ने की। इसके पूर्व उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने भी संत चरणों में नमन किया। जनप्रतिनिधियों और संत समाज की उपस्थिति ने इस क्षण को सामूहिक श्रद्धांजलि का रूप दे दिया।
कई राज्यों से उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब
स्वामी सच्चिदानंद महाराज के प्रति जन-आस्था की विराटता रविवार को साफ दिखाई दी। सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र से लेकर उत्तर प्रदेश के मानिकपुर, इलाहाबाद, कर्वी-चित्रकूट, बांदा, तथा छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से हजारों श्रद्धालु अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। बड़ी सेमरिया से धारकुंडी तक के गांवों में लोग सुबह से सड़कों के किनारे खड़े होकर श्रद्धांजलि अर्पित करते रहे। सतना और रीवा की ओर से आने वाली सड़कें हों या मानिकपुर-कल्याणपुर मार्ग हर दिशा में आस्था की निरंतर धारा बहती रही।

मुख्यमंत्री बोले, विंध्य की आत्मा को छू लेने वाली क्षति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धारकुंडी पहुंचकर ब्रह्मलीन संत के अंतिम दिव्य दर्शन किए और श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए महाराज जी के पार्थिव शरीर के अंतिम दिव्य दर्शन कर भावपूर्ण नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराज जी के ब्रह्मलीन होने से पूरे विंध्य क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। वे लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, अध्यात्म और मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र थे। उनका सानिध्य जनमानस को सदैव आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेरणा एवं सकारात्मक दिशा प्रदान करता रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि धारकुंडी आश्रम, जहां महाराज जी ने तप व साधना की, आज एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बन चुका है। उनका महान व्यक्तित्व एवं साधना की अमिट छाप आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि स्वामी सच्चिदानंद जी का ब्रह्मलीन होना केवल एक संत का देहावसान नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र की आत्मा को छू लेने वाली क्षति है। वे लाखों लोगों के लिए आस्था, अध्यात्म और जीवन मूल्यों के प्रकाशस्तंभ थे। उनका सान्निध्य समाज को साधना, संयम और सकारात्मक दिशा देता रहा। मुख्यमंत्री ने धारकुंडी आश्रम को एक जीवंत तीर्थ बताते हुए कहा कि यहां की साधना परंपरा आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
हर आंख नम, पर हर मन कृतज्ञ
धारकुंडी धाम में आज हर आंख नम है, पर हर मन कृतज्ञ भी, क्योंकि एक संत देह से विदा हुआ है, पर उसकी वाणी, सेवा और साधना की ज्योति आने वाली पीढ़ियों का मार्ग आलोकित करती रहेगी। यही परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज की अमर विरासत है।
दर्शन के साथ सेवा की परंपरा
गुरुदेव द्वारा स्थापित सेवा-संस्कार अंतिम क्षणों तक जीवंत दिखाई दिए। अंतिम दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालुओं के साथ-साथ पंगत में प्रसाद वितरण का क्रम निरंतर चलता रहा। शाम तक 50 हजार से अधिक भक्त प्रसाद ग्रहण कर चुके थे। देर रात तक पंगत सेवा ठीक उसी तरह जारी रही जिस अनुशासन और करुणा से स्वामीजी ने इस सेवा की नींव रखी थी।
उप मुख्यमंत्री ने बताया अपूरणीय क्षति
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी आश्रम पहुंचकर अंतिम दर्शन किए। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामीजी का जीवन धर्म, अध्यात्म और मानव सेवा को समर्पित रहा। उनका देवलोक गमन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
प्रशासनिक मुस्तैदी, फिर भी चुनौती
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। आश्रम परिसर और पहुंच मार्गों पर जिला पुलिस, विशेष बटालियन और प्रशिक्षण इकाइयों सहित लगभग 600 जवान तैनात रहे। रीवा और सतना की दिशा से आने वाले वाहनों के लिए आश्रम से करीब पांच किलोमीटर पहले पार्किंग बनाई गई, जबकि हेलीपेड सहित चार स्थानों पर अतिरिक्त पार्किंग की व्यवस्था की गई। रीवा कमिश्नर बाबू सिंह जामोद, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार, आईजी गौरव राजपूत और पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह ने व्यवस्थाओं की सतत निगरानी की। भीड़ नियंत्रण चुनौतीपूर्ण रहा, पर दर्शन व्यवस्था सुचारु रखने के प्रयास जारी रहे।


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