सतना के ऐतिहासिक धवारी तालाब को एसडीएम ने शासकीय घोषित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और वेद ऋचाओं का हवाला देते हुए सभी नामांतरण और बटांक शून्य कर दिए गए। अब नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन तालाब के पुनर्जीवन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर के ऐतिहासिक धवारी तालाब को आखिरकार उसके मूल स्वरूप में पुनस्र्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। एसडीएम सिटी ने एक आदेश जारी करते हुए तालाब, उसकी मेड़ और अगोर को शासकीय घोषित कर दिया। इस आदेश के साथ ही भू-माफियाओं का कब्जा समाप्त हो गया और अब जिम्मेदारी नगर निगम व स्मार्ट सिटी प्रबंधन की है कि वे तालाब को पुनर्जीवित कर शहरवासियों के लिए उपयोगी बनाएं। इस मामले की जांच शिकायतकर्ता रामनरेश पांडे की शिकायत के बाद शुरू हुई थी जिस पर एसडीएम ने फैसला सुनाया है।
शून्य हुए बटांकन
धवारी तालाब के शासकीय घोषित होने से महेन्द्र कुमार अग्निहोत्री, प्रकाश चन्द्र निगम, साधना पांडेय पत्नी रामदास पांडेय, रमादेवी, सुधीर पिता मल्लू उर्फ मुकुंदी कनौजिया, सुनील देवी, राजेश प्रसाद, आशीष आरख, अमित द्विवेदी, राजेश कुमार, रुक्मिणी देवी, विकास पिता रामदास पांडेय, श्रीकांत पिता रामानुज तिवारी, सूर्य प्रकाश सिंह, रत्ना तिवारी, देवेन्द्र तिवारी, सुमन पत्नी कामता प्रसाद, मनीष कुमार पांडेय, सुंदरलाल पांडेय, प्रमोद कुमार मिश्रा, रंजना गर्ग, रामऔतार त्रिपाठी, राजकुमार शर्मा, वंदना शुक्ला, बृजकिशोर गुप्ता, अशोक कुमार गुप्ता, पार्वती गुप्ता, राहुल कुमार गुप्ता, जसोमति पाल, घनश्याम पंजवानी, रंजना गर्ग, सुनीता तिवारी, रिया मिश्रा, जीतेन्द्र प्रताप सिंह, अनीता तिवारी, श्रीमती राजकुमार गुप्ता पत्नी छितानी गुप्ता, रामसजीवन, गौरा सिंह, सत्यवती तिवारी, रामसजीवन, प्रभा मिश्रा, प्रमोद कुमार, वीरेन्द्र सिंह, विनय कुमार पांडेय, भगवानदास, लालजी तिवारी, पूर्णिमा तिवारी, मुन्नीबाई तिवारी, ममता उपाध्याय, रजनी मिश्रा, किंधा तिवारी, रामलखन सेन व भाग बाई के नाम की आराजियों के नामान्तरण और बटांक शून्य हो गए हैं। उपरोक्त व्यक्तियों के नाम 65 नामांतरण और बटांक हैं।
फैसले में सुप्रीम कोर्ट से लेकर वेद की ऋचाओं तक का प्रयोग
एसडीएम ने अपने फैसले में न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया बल्कि विभिन्न वेदों और ऋचाओं का उल्लेख करते हुए तालाब को जीवंत व अखण्ड पारिस्थितिक इकाई बताया। आदेश में कहा गया है कि तालाब का खंड-खंड विभाजन न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से असंगत है, बल्कि सार्वजनिक उपयोग के भी प्रतिकूल है। प्रकरण में आदेशजारी करते हुए एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने स्पष्ट किया है कि खसरा क्रमांक 503 (1.72 एकड़) और 504 (0.55 एकड़) की भूमि का विभाजन व नामांतरण 1984-85 में अवैध तरीके से किया गया था, जबकि 1926-27 से लेकर 1983-84 तक के अभिलेखों में इसे 'अगोर, चरनोई और पानी' के रूप में दर्ज किया गया था। मप्र भू-राजस्व संहिता, 1959 तथा विन्ध्य प्रदेश मालगुजारी एवं काश्तकारी अधिनियम, 1953 के तहत तालाब व सार्वजनिक भूमि पर किसी भी व्यक्ति का निजी स्वामित्व मान्य नहीं है।
इन्होंने दिए तर्क, नहीं चली दलील
सुनवाई के दौरान रोशनलाल श्रीवास्तव, मुल्लू उर्फ मकुन्दी, ज्योति, कामता प्रसाद तिवारी, मनीष पाण्डेय, साधना पाण्डेय, प्रकाश पाण्डेय, रंजना गर्ग, प्रकाशचंद्र निगम, संजय निगम, रामऔतार त्रिपाठी आदि ने तर्क दिए और अपना स्वामित्व साबित करने का प्रयास किया लेकिन आदेश में एसडीएम ने साफ साफ लिखा है कि भूमिस्वामी हकदार नहीं हैं। ऐसे में सभी नामांतरण व बंटाक शून्य घोषित किए जाते हैं। अब राजस्व सीमांकन, अवैध संरचनाओं और बांध-नालियों का निष्कासन, जलनिकास व अगोर की बहाली की कार्रवाई होगी।


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