कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पहली बार अयोध्या के भव्य राम मंदिर पहुंचे। जानें उन्होंने धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल और ईरान-इजराइल युद्ध पर क्या कहा, और भाजपा ने क्या पलटवार किया।
By: Ajay Tiwari
Mar 26, 20263:54 PM
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा है। हवाई अड्डे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, जिसके बाद वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री के निवास पर पहुंचे और उनसे शिष्टाचार भेंट की।
रामलला की चौखट पर मत्था टेकने के बाद दिग्विजय सिंह ने धर्म और राजनीति के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस में प्रत्येक व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसार धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, "हम धर्म का उपयोग न तो व्यापार के लिए करते हैं और न ही राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए।"
सिंह ने आगे जोर देकर कहा कि चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई, धर्म हर व्यक्ति की निजी आस्था का विषय है। इसका राजनीतिक दुरुपयोग करना नैतिक रूप से गलत है। उनके अनुसार, आस्था को व्यवसाय की वस्तु नहीं बनाना चाहिए।
मध्य पूर्व में जारी ईरान-इजराइल संघर्ष और इसके वैश्विक प्रभावों पर टिप्पणी करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि दुनिया के हालात चिंताजनक हैं। उन्होंने ईंधन की बढ़ती कीमतों और पेट्रोल पंपों पर लगती भीड़ का जिक्र किया। अपने दौरे के संदर्भ में उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "जब ईश्वर का बुलावा आता है, तभी भक्त वहां पहुंच पाता है। अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करना और हनुमान गढ़ी में शीश न नवाना संभव नहीं है।"
दिग्विजय सिंह की इस धार्मिक यात्रा पर मध्य प्रदेश भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह की राज्यसभा सदस्यता खत्म होने वाली है, इसलिए वे भगवान की शरण में गए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह दौरा या तो खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की प्रार्थना है या फिर गांधी परिवार पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।