पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर बुधनी और रायसेन में हुए 40 हजार टन गेहूँ घोटाले की EOW जांच की मांग की है।

भोपाल: स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'गेहूँ घोटाले' को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र (बुधनी) और वर्तमान लोकसभा क्षेत्र (विदिशा/रायसेन) में हुए कथित 150 करोड़ रुपये के गेहूँ घोटाले की राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (EOW) से जांच कराने की मांग की है।
दिग्विजय सिंह के पत्र के अनुसार, वर्ष 2017 से 2020 के बीच सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बकतारा, आमोन और जहानपुर के निजी गोदामों में करीब 66 हजार टन गेहूँ जमा कराया गया था। आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त गोदाम मालिकों को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से इस गेहूँ को जानबूझकर 4-5 साल तक वहीं रखा रहने दिया गया, जिससे करीब 40 हजार टन गेहूँ पूरी तरह खराब हो गया और उसमें घुन लग गया।
आर्थिक हानि: दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि 35 करोड़ रुपये की लागत वाले गेहूँ की देखरेख और किराए पर शासन ने 150 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, फिर भी अनाज सड़ गया।
निजी हितों का आरोप: पत्र में आरोप लगाया गया है कि ये गोदाम पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबियों के हैं। उन्हें लाखों रुपये का किराया दिलाने के लिए अनाज का उठाव नहीं किया गया।
साजिश के तहत स्थानांतरण: जब गेहूँ पूरी तरह खराब हो गया, तो उसे चुपचाप बुधनी (सीहोर) से हटाकर रायसेन जिले की ओबेदुल्लागंज तहसील के नूूरगंज और दिवाटिया स्थित वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के गोदामों में भेज दिया गया।
परिवहन घोटाला: खराब गेहूँ को शिफ्ट करने के लिए भी करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। सिंह ने इसमें अनिल चौहान नामक व्यक्ति की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्गार "न खाऊँगा, न खाने दूँगा" के अनुरूप कड़ा निर्णय लें और घोटालेबाजों को जेल भेजें। उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सड़े हुए गेहूँ के कारण आसपास के क्षेत्रों में भयंकर बदबू फैल रही है, जिससे महामारी फैलने का खतरा बना हुआ है।

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