वैलेंटाइन डे मनाने बांधवगढ़ से मैहर पहुंचा हाथी का जोड़ा। बांधवगढ़ से भागकर मैहर पहुंचे हाथी जोड़े ने रात भर वन अमले को छकाया, खेतों में नुकसान, ग्रामीणों में दहशत।
By: Yogesh Patel
Feb 17, 20264:11 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जंगल का रास्ता नापकर मैहर वनमंडल की सीमा में दाखिल हुए हाथी के जोड़े ने वन विभाग के रातों की नींद हराम कर दी। रात पर चौकसी में लगे वन अमले को जोड़ा नहीं मिला लेकिन अल सुबह तक आधा दर्जन से भी कम वनमंडलों की दलों को छकाए रखा। इस बीच खेतों में पगमार्क से नुकसान हुआ।
मैहर वनमंडल के मुकुंदपुर वनपरिक्षेत्र में रविवार-सोमवार की दरमियानी रात हाथी के जोड़े को लेकर चहलकदमी रही। इस रेंज की सरिया बीट अंतर्गत आने वाले हरहरी गांव के खेतों में जोड़ा दिखा था। इसकी सूचना मिलने पर मैहर वनमंडल के अमरपाटन, मैहर और मुकुंदपुर वनपरिक्षेत्र की समूची टीम स्पॉट पर पहुंची थी। रात 9 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे तक तीनों रेंज की टीम हाथी जोड़े की जानकारी लेती रही। हालांकि इनके पगमार्क और लीद मिली थी। बताया गया है कि हाथी का जोड़ा सीधी और मैहर वनमंडल के बीच के चरकी घाटी से सटे इलाके में घूम रहे थे। दोनों 40 किमी की यात्रा कर यहां पहुंचे थे। दोपहर 12 बजे इनकी लोकेशन सीधी वनमंडल की चुरहट बीट के शिकारगंज में मिली थी। यहां तक यात्रा 90 किमी के आसपास मानी जा रही है। रात्रि में मैहर वन मंडल अधिकारी विद्याभूषण मिश्रा ने मोर्चा संभाल रखा था। इनके साथ वन परिक्षेत्र अधिकारी मैहर शुभम खरे, अमरपाटन प्रफुल्ल त्रिपाठी, मुकुंदपुर रेंजर आदि अपने मय स्टाफ मौजूद रहे।
बांधवगढ़ से आए थे
मैहर वनमंडल की सीमा में दाखिल हुआ हाथी का जोड़ा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भागकर आया था। इस जोड़े में एक-एक मेल और फीमेल थे। इनमें से एक में कॉलर आईडी लगा हुआ था जिस कारण उनकी लोकेशन ट्रेस हो सकी। इसके लिए बांधवगढ़ की टीम लगातार उनकी लोकेशन लेती रही।
दो साल से फ्री घूम रहे
यहां आए इस जोड़े के बारे में कहा जा रहा है कि दो साल पहले ही इन्हें फ्री घूमने के लिए छोड़ा गया था। जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में कॉलर आई डी वाला हाथी (व्हीटी-01)को फ्री छोड़ा गया था। इससे पहले तक यह बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रहा। बताया गया है कि मानपुर-जयसिंहनगर में उत्पात मचाने में यह माहिर था जिसे ठीक करने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रखा गया था। इसने दो लोगों को मरा भी था। ठीक होने के बाद इसे फ्री छोड़ गया था। हालांकि लगातार इसे मानिटर किया जा रहा है।
उड़ीसा से भागे, पहुंचे बांधवगढ़
मैहर वनमंडल की धरती पर चहलकदमी कर वापस लौटे हाथी के जोड़े असल में उड़ीसा से आए थे। जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में उड़ीसा राज्य से झारखंड इसके बाद संजय डुबरी होते हुए अनूपपुर तक आए थे। यहां उत्पात करने के बाद इन 45 हाथियों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाया गया था। इन्हीं में से 10 की मौत सुर्खियों में थी फिलहाल 60 की संख्या में हैं।
खेतों में पगमार्क और लीद
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से करीब 40 किमी का रास्ता तय कर हरहरी गांव तक पहुंचे हाथी के जोड़े तो नहीं दिखे लेकिन इनके पगमार्क और लीद मिली। इसके अलावा जिन खेतों से गुजरे वहां वहां की फसल खराब हो गई। इस पर जब सुबह किसान अपने खेत पहुंचा तो जानकारी ली। इसके बाद मदद की गुहार लगाई।