जबलपुर हाईकोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल और पूर्व सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन के ढुलमुल और उदासीन रवैये पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। एक महत्वपूर्ण अवमानना याचिका (CONC-4449-2025) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रशासनिक स्तर पर लगातार हो रही अनदेखी के चलते तत्कालीन प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। अदालत के इस कड़े कदम से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस तंत्र को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आगामी 21 सितंबर 2026 को दोनों अधिकारियों को हर हाल में अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश किया जाए। इस वारंट को सही तरीके से तामील कराने की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी को सौंपी गई है। अदालत का यह आदेश यह सुनिश्चित करने के लिए है कि न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन गंभीरता से किया जाए।
न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया है कि सितंबर 2025 में ही दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को अवमानना याचिका से जुड़े नोटिस मिल चुके थे। इसके बावजूद, अधिकारियों की तरफ से न तो किसी अधिवक्ता ने अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही अदालत के आदेश के पालन से संबंधित कोई रिपोर्ट पेश की गई। सागर कलेक्टर कार्यालय की ओर से केवल दिसंबर 2025 में एक औपचारिकता निभाते हुए तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त करने का एक पत्र रजिस्ट्री विभाग को भेजा गया था, जिसे अदालत ने नाकाफी माना।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यशैली की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवमानना के मामलों में अधिकारी पूरी तरह से निष्क्रियता और गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखा रहे हैं। केवल औपचारिकता के लिए संपर्क अधिकारी नियुक्त करने का पत्र भेजकर कानूनी प्रक्रियाओं से दूरी बना लेना प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बदतर उदाहरण है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली के चलते अधिकारियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प शेष नहीं बचा था।
यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ अनुभाग अधिकारी शीला सेन के नियमितीकरण से जुड़े आदेश का समय सीमा के भीतर पालन न किए जाने से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से सक्षम पैरवी वरिष्ठ वकीलों कविता गुप्ता और विद्या प्रसाद द्वारा की गई। इस मामले की अगली और बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई अब निर्धारित तिथि 21 सितंबर 2026 को होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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