मैहर जिले में 32 बाल मृत्यु मामलों में बर्बल ऑटॉप्सी नहीं होने पर कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाई। तीन दिन में जांच पूरी कर सीडीआर पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मैहर जिले में 0 से 5 साल के बच्चों की मौत के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत बर्बल ऑटॉप्सी (मौत का कारण) नहीं किए जाने का मामला सामने आने पर मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने कड़ा रुख अपनाया है। जानकारी के अनुसार मैहर जिले में 32 बच्चों की मौत का आंकड़ा सीडीआर पोर्टल में दर्ज तो है लेकिन उनकी बर्बल आटॉप्सी आज तक नहीं की गई। इस गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को तत्काल कारणों की जांच कर सीडीआर पोर्टल में जांच रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि बुधवार को मैहर जिले में कलेक्टर द्वारा स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की गई जिसमें गर्भवती पंजीयन, हाईरिस्क प्रबंधन, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, दस्तक पोर्टल में दर्ज आंकड़ों की जानकारी ली गई।
सीडीआर पोर्टल में अमरपाटन, रामनगर में शून्य जानकारी
जानकारी के अनुसार 0 से 5 साल के 32 बच्चों की मौत चाइल्ड डेथ रिपोर्ट (सीडीआर) पोर्टल में दर्ज तो की गई है लेकिन इन बच्चों की मौत का कारण यानि बर्बल आटॉप्सी नहीं की गई है। अमरपाटन और रामनगर ब्लाक में 0 जानकारी दिखाई गई है। जबकि मैहर में कुल 5 बच्चों की बर्बल ऑटॉप्सी की गई।
मेडिकल ऑफीसर की नियुक्ति, हुई बैठक
जानकारी के अनुसार कलेक्टर ने जब बर्बल ऑटॉप्सी न होने का कारण पूछा तो बताया गया कि मेडिकल ऑफीसर की नियुक्ति न होने के चलते इसमें देरी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब मेडिकल ऑफीसर ही बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाते हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिले के अधिकारियों द्वारा मैहर के प्रभारी बीएमओ डॉ. विश्वमोहन प्रजापति के साथ बैठक की गई जिसमें मैहर जिले में सीडीआर पोर्टल के अनुसार मृत बच्चों की बर्बल आटॉप्सी तीन दिन के भीतर करने के निर्देश दिए गए। बैठक में जिले से डीपीएम राकेश कर्स, डीसीएम डॉ. ज्ञानेश मिश्रा, बीपीएम मनोज सिंह, बीसीएम सुधीर तिवारी मौजूद रहे। मेडिकल ऑफीसर के साथ ग्राम की आशा, एएनएम और सीएचओ को भी सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है बर्बल ऑटॉप्सी
0 से 5 साल के बच्चों की मौत के बाद बच्चे की जानकारी सीडीआर पोर्टल में दर्ज की जाती है वहीं बच्चे की मौत का कारण भी पता किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौत के कारणों को जानने के लिए बर्बल आटॉप्सी की जाती है। इसमें मेडिकल ऑफीसर अपनी टीम के साथ बच्चे के घर जाकर बच्चे की मौत का कारण जानते हैं। इसमें संस्थागत प्रसव, घर में प्रसव, बच्चे को कोई बीमारी, बच्चे का हायर सेंटर रेफर न होना, आशा का घर में भ्रमण करना, बच्चे को टीका लगना आदि जानकारियां एकत्र की जाती हैं। इनमें लापरवाही बरतने वाले कार्यकर्ता एवं अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।

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