सतना के मझगवां क्षेत्र की आदिवासी बस्तियों में पेयजल संकट गंभीर हो गया है। दूषित पानी और सूखे हैंडपंपों से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम के सामने नाराजगी जताई, जबकि अधिकारियों ने स्थायी समाधान और जल संरक्षण कार्यों का भरोसा दिया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के आदिवासी बाहुल्य मझगवां क्षेत्र में पेयजल संकट अब प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करने लगा है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह, पीएचई विभाग के ईई श्वेतांक चौरसिया, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी मवासी और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की टीम जब गोडान टोला और भट्ठन टोला पहुंची, तो वहां ग्रामीणों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। लोगों ने अधिकारियों को उन जलस्रोतों तक ले जाकर दिखाया, जहां से वे मजबूरी में दूषित पानी भर रहे हैं।
कुआं गंदा, हैंडपंप सूखा
बस्तियों में कई जगह हैंडपंप बंद पड़े मिले जबकि कुछ कुओं का पानी गंदगी और काई से भरा दिखाई दिया। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ जल संकट और गहरा जाता है। कई परिवारों को सुबह से शाम तक पानी के इंतजार में रहना पड़ता है, जबकि कुछ लोगों को दूर के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि पीने के लिए इस्तेमाल हो रहा पानी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
जिम्मेदार ने बनाए बहाने
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जलस्रोतों की स्थिति देखी तो मौके पर मौजूद कर्मचारियों से जवाब-तलब किया गया। जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि केवल टैंकर भेजकर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती। उन्होंने बंद पड़ी पेयजल सप्लाई लाइन को तत्काल चालू करने, कुओं की साफ-सफाई कराने और जरूरत पड़ने पर नए नलकूप खनन कराने के निर्देश दिए।
टैंकर सप्लाई पर भिड़े ग्रामीण और अधिकारी
दौरे के दौरान स्थिति उस समय असहज हो गई जब पीएचई विभाग की ओर से क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए टैंकर व्यवस्था को पर्याप्त बताया गया। इस पर पंचायत के उपसरपंच राजू सौदागर ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक-दो टैंकरों से इतनी बड़ी आबादी की प्यास नहीं बुझ सकती। ग्रामीणों ने भी बताया कि टैंकर कभी समय पर नहीं पहुंचते और कई बार पानी की मात्रा जरूरत से काफी कम होती है। लोगों का कहना था कि हर साल गर्मी में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस काम नहीं होता।
खेत तालाब और जल संरक्षण पर जोर
ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि केवल तात्कालिक राहत नहीं बल्कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्थायी जल प्रबंधन पर भी काम किया जाएगा। उन्होंने खेत तालाब निर्माण और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके और हर साल बनने वाले जल संकट को कम किया जा सके। अधिकारियों ने यह भी भरोसा दिलाया कि जिन बस्तियों में पेयजल सप्लाई बाधित है, वहां जल्द सुधार कार्य शुरू कराया जाएगा। साथ ही जलस्रोतों की नियमित निगरानी और सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
लंबे समय से बनी हुई है समस्या
ग्राम पंचायत मझगवां के गोडान टोला, भट्ठन टोला, मिचकुरिन सहित कई आदिवासी बस्तियां लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रही हैं। ग्रामीण लगातार सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की मांग करते रहे हैं लेकिन अब तक समस्या का स्थायी हल नहीं निकल सका है। गुरुवार का प्रशासनिक दौरा भले ही राहत की उम्मीद लेकर आया हो, लेकिन अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि घोषणाएं जमीन पर कब उतरती हैं।


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