मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई तेज। चीफ जस्टिस की बेंच ने 100 याचिकाओं को वर्गीकृत करने और तीन दिन तक लगातार सुनवाई का आदेश दिया

सुनवाई स्थगित: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले की फाइनल सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है।
नई तारीखों का ऐलान: कोर्ट ने अब इस मामले की निरंतर सुनवाई के लिए 13, 14 और 15 मई की तारीखें तय की हैं।
स्थगन का कारण: सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर हुई चार लंबित याचिकाओं का रिकॉर्ड और दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश न हो पाना देरी का मुख्य कारण बना।
सरकार को निर्देश: अदालत ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट से संबंधित रिकॉर्ड जल्द से जल्द ट्रांसफर करवाए।
तकनीकी बाधा: सुप्रीम कोर्ट की याचिकाओं की लिस्टिंग और दस्तावेज अपलोड न होने के कारण मंगलवार को सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
पिछला शेड्यूल: इससे पहले 27, 28 और 29 अप्रैल को लगातार सुनवाई होनी थी, जो अब तकनीकी कारणों से मई के मध्य तक खिसक गई है।
जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के विवादास्पद मुद्दे पर जबलपुर हाईकोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पक्ष और विपक्ष की याचिकाओं को अलग-अलग श्रेणीबद्ध करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इस संवेदनशील विषय पर तीन दिनों की निरंतर सुनवाई का शेड्यूल तय किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि इस मामले में कुल 100 याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें से 70 याचिकाएं आरक्षण के विरोध में और 30 याचिकाएं इसके समर्थन में हैं। युगलपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दलीलों को सुव्यवस्थित करने के लिए इन याचिकाओं को अलग-अलग किया जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने अदालत को यह भी याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने इन याचिकाओं के निराकरण के लिए तीन माह की समय सीमा निर्धारित की है।
आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं में मुख्य रूप से इंदिरा साहनी केस और मराठा आरक्षण के फैसलों का हवाला दिया गया है, जिसमें आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% तय की गई थी। साथ ही, 87:13 फॉर्मूले के तहत होल्ड किए गए 13% पदों पर भी आपत्ति जताई गई है। दूसरी ओर, आरक्षण के समर्थकों का तर्क है कि ओबीसी वर्ग की आबादी के अनुपात में आरक्षण देना संवैधानिक और न्यायसंगत है।
यह मामला पहले भी हाईकोर्ट में लंबित था, जहाँ प्रारंभिक सुनवाई के दौरान 27% आरक्षण पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और अन्य पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी 'विशेष अनुमति याचिकाओं' (SLP) को वापस हाईकोर्ट भेजते हुए त्वरित सुनवाई और निराकरण के निर्देश दिए। इसी क्रम में 27 अप्रैल से तीन दिवसीय विशेष सुनवाई शुरू की गई है।
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