गढ़ क्षेत्र में पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पिछले छह वर्षों से गड्ढों में तब्दील है। प्रशासन और विभाग की लापरवाही से यह मार्ग अब हादसों का कारण बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश में सड़क पर कीचड़ और पानी भर जाता है, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। विधायक इंजी. नरेंद्र प्रजापति के निर्देशों के बाद भी सुधार अधूरा रहा। ग्रामीणों ने अब पक्की नालियों और टिकाऊ सड़क निर्माण की मांग की है।

हाइलाइट्स:
गढ़, स्टार समाचार वेब
कभी आवागमन का प्रमुख मार्ग रहा पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग-27 आज अपनी पहचान खो चुका है। पिछले छह वर्षों से यह सड़क गड्ढों में तब्दील है, जिससे आमजन का जीवन संकट में पड़ गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब यह सड़क नहीं, बल्कि गड्ढों की श्रृंखला बन चुकी है, जहां से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा है।
सन् 2019-20 में बाईपास निर्माण के बाद इस पुराने मार्ग की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली। प्रशासन और विभाग दोनों ने मानो इसे भगवान भरोसे छोड़ दिया है। परिणामस्वरूप ग्राम गढ़, चंदन बाग, थाना परिसर के दक्षिण क्षेत्र में सड़क जगह-जगह टूटी पड़ी है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि बरसात के दिनों में सड़क पर कीचड़ और पानी भर जाता है, जिससे पैदल और दोपहिया वाहनों से चलना बेहद कठिन हो जाता है। कई बार राहगीर और मोटरसाइकिल सवार गिरकर घायल हो चुके हैं, लेकिन फिर भी विभागीय अमले के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
हादसों का खतरा बढ़ा
गढ़ ग्राम पंचायत और आसपास के क्षेत्र में इस सड़क पर प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली बच्चे, ग्रामीण, व्यापारी और पशुपालक आवागमन करते हैं। यहां पांच विद्यालय, थाना परिसर, आयुर्वेद औषधालय, पशु औषधालय, सेवा सहकारी समिति और पंचायत भवन स्थित हैं। सड़क की दुर्दशा के कारण लोगों को अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
आम जनता में बढ़ रहा आक्रोश
यह सड़क अब जानलेवा बन चुकी है। आए दिन बच्चे और बाइक सवार गिरते हैं, लेकिन अधिकारी देखने तक नहीं आते। लगता है किसी निजी स्वार्थ के कारण इस सड़क को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है। गढ़ और आसपास के लोगों में इस बदहाल सड़क को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा और शिथिलता का आरोप लगाया है। कई बार शिकायतों के बावजूद न तो विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और न ही किसी स्थायी समाधान की पहल हुई।
विधायक ने दिए थे निर्देश
क्षेत्रीय नागरिकों ने मनगवां विधायक इंजी. नरेंद्र प्रजापति से मिलकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विधायक ने तत्काल मौके पर पहुंचकर संबंधित अधिकारियों को सड़क दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। किंतु यह आदेश हवा हवाई में चला गया। जून माह में विभाग द्वारा सड़क मरम्मत का कार्य कराया गया परंतु यह सुधार मात्र दिखावे का साबित हुआ। सिर्फ एक माह बाद जुलाई में ही सड़क फिर से गड्ढों में तब्दील हो गई। लोगों का कहना है कि घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही के कारण सड़क टिक नहीं पाई।
नालियां व पक्की सड़क बनाने की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, सांसद एवं मनगवां विधायक से मांग की है कि सड़क के दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण किया जाए। वर्षा जल निकासी की समुचित व्यवस्था हो और इस मार्ग को पुन: मजबूती के साथ बनाया जाए, ताकि आवागमन सुचारू रूप से चालू रह सके। लोगों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के शैक्षणिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक जीवन की धुरी है, इसे दुरुस्त किए बिना विकास की कल्पना संभव नहीं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि जनता की पुकार कब सुनते हैं। क्या यह सड़क फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट पाएगी या गढ़ और आसपास के लोग यूं ही गड्ढों में सफर करने को मजबूर रहेंगे।


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