टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे 5 साल के कार्यकाल के विस्तार पर सवाल उठाए हैं। नोएल टाटा ने नियमों की अनदेखी, हितों के टकराव और वोटिंग के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। जानिए इस विवाद से जुड़ी सभी अहम जानकारियां विस्तार से।

टाटा समूह के भीतर एक बार फिर नेतृत्व और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को दिए गए दूसरे 5 साल के एक्सटेंशन को आधिकारिक तौर पर चुनौती दी है। नोएल टाटा ने इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, वोटिंग के नियमों के उल्लंघन और 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' यानी हितों के टकराव के गंभीर आरोप लगाए हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा ने कंपनी सेक्रेटरी को कड़ा खत लिखकर मामले से जुड़े तमाम दस्तावेज और रिकॉर्ड्स की मांग की है।
नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी सुप्रकाश मुखोपाध्याय को 26 अक्टूबर को एक पत्र लिखकर 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड मीटिंग के उस फैसले पर आपत्ति जताई है, जिसमें एन चंद्रशेखरन को फिर से पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इस विरोध का मुख्य तात्कालिक कारण यह बना कि बोर्ड में एक मौजूदा डायरेक्टर द्वारा आपत्ति जताए जाने के बावजूद, कंपनी ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के पास फाइलिंग जमा कर चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट की आधिकारिक पुष्टि कर दी।
इस सितंबर पास किए गए प्रस्ताव के तहत एन चंद्रशेखरन को आगामी 21 फरवरी 2027 से अगले 5 साल के लिए इस शीर्ष पद पर दोबारा जिम्मेदारी सौंपी जानी तय की गई है। हालांकि, नोएल टाटा का कहना है कि यह पूरा फैसला उनकी आपत्तियों और कंपनी के तय नियमों को ताक पर रखकर लिया गया है।
नोएल टाटा ने 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग के एजेंडे को लेकर भी गंभीर खामियां उजागर की हैं। उनका कहना है कि ओरिजिनल या रिवाइज्ड एजेंडे में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के री-अपॉइंटमेंट के प्रस्ताव का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया था। ओरिजिनल एजेंडे में इस विषय को केवल नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (NRC) की एक संक्षिप्त ब्रीफिंग बताया गया था, जबकि बाद के रिवाइज्ड एजेंडे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 11 सितंबर के पत्र पर चर्चा को जोड़ दिया गया था।
इसके अलावा, बोर्ड प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हुए नोएल टाटा ने आरोप लगाया है कि कंपनी के स्थापित नियमों के मुताबिक सिलेक्शन कमेटी का विधिवत गठन नहीं किया गया था और इस मामले में जरूरी अफर्मेटिव वोट भी प्राप्त नहीं किए गए थे।
इस विवाद का एक सबसे संवेदनशील पहलू 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' यानी हितों के टकराव से जुड़ा हुआ है। नोएल टाटा ने टाटा संस के डायरेक्टर और टाटा ट्रस्ट्स के वेणु श्रीनिवासन पर प्रत्यक्ष रूप से यह आरोप लगाया है कि उनके और चंद्रशेखरन के बीच व्यावसायिक संबंध हैं। खत में 'हैनो वन वेयरहाउसिंग प्रा. लिमिटेड' नाम की एक कंपनी का विशेष तौर पर जिक्र किया गया है, जिसे एन चंद्रशेखरन की पत्नी और बेटा संभालते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कंपनी के कारोबारी रिश्ते टीवीएस मोटर (TVS Motor) के साथ हैं, जिसके चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन हैं। नोएल टाटा का तर्क है कि संभावित टकराव की इस स्थिति के बावजूद वेणु श्रीनिवासन को इस पूरी चर्चा और वोटिंग प्रक्रिया से खुद को दूर रखना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएल टाटा ने प्रबंधन से 7 दिनों के भीतर कई अहम दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है। इनमें 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग, मीटिंग के फाइनल और हस्ताक्षरित मिनट्स, वोटिंग रिकॉर्ड, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास दाखिल किए गए सभी दस्तावेज तथा 3 सितंबर को हुई नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की मीटिंग के रिकॉर्ड्स शामिल हैं।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब असंतोष सामने आया हो। नोएल टाटा ने इससे पहले 30 सितंबर और 8 अक्टूबर को भी पत्र लिखे थे। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, टाटा संस ने उनके 30 सितंबर के पहले पत्र का कोई भी आधिकारिक जवाब नहीं दिया था और दो बार लिखित अनुरोध करने के बावजूद मीटिंग की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
नोएल टाटा मूल रूप से टाटा संस के दो बड़े फैसलों के खिलाफ मुखर हैं। पहला, एन चंद्रशेखरन को फिर से 5 साल का लंबा कार्यकाल दिया जाना और दूसरा, टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग की प्रक्रिया को शुरू करना। ये दोनों ही बड़े फैसले नोएल टाटा की स्पष्ट आपत्तियों के बावजूद बोर्ड द्वारा बहुमत के आधार पर आगे बढ़ाए गए हैं।
भविष्य के घटनाक्रम की बात करें तो नोएल टाटा ने सभी रिकॉर्ड्स, ऑडियो-वीडियो और रेगुलेटरी फाइलिंग्स को पूरी तरह सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। उम्मीद की जा रही है कि नोएल टाटा के इस कड़े पत्र को टाटा संस की ऑडिट कमेटी के सामने विचार के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद समूह के भीतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर और गहमागहमी देखने को मिल सकती है।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दूसरे 5 साल के कार्यकाल के विस्तार पर सवाल उठाए हैं। नोएल टाटा ने नियमों की अनदेखी, हितों के टकराव और वोटिंग के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। जानिए इस विवाद से जुड़ी सभी अहम जानकारियां विस्तार से।
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