अंधत्व निवारण के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान देने वाले पद्मश्री डॉ. बीके जैन का चित्रकूट में निधन। सतना से पूरे विंध्य अंचल में शोक की लहर, चिकित्सा जगत ने खोया कर्मयोगी सेवक।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
अंधत्व निवारण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य कर करोड़ों लोगों की आंखों में उजाला भरने वाले पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात नेत्र चिकित्सक डॉ. बुधेन्द्र कुमार जैन (डॉ. बीके जैन) अब नहीं रहे। शुक्रवार शाम ठीक 4 बजकर 24 मिनट पर उन्होंने जानकीकुंड चिकित्सालय, चित्रकूट में अंतिम सांस ली। श्री सद्गुरू सेवा संघ ट्रस्ट के निदेशक एवं ट्रस्टी, पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बी. के. जैन के निधन पर चित्रकूट सहित समूचे विंध्य क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। ट्रस्ट परिवार ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। वे विगत कई महीनों से अस्वस्थ थे और मुंबई में उनका उपचार चल रहा था। वेंटिलेटर से हटाए जाने के बाद उनका शांतिपूर्वक देहावसान हो गया। उनके निधन की पुष्टि सद्गुरू सेवा संघ ट्रस्ट परिवार ने की है।
परिवार का योगदान और सेवा की निरंतरता
उनकी पत्नी ऊषा जैन और पुत्र डॉ. इलेश जैन निरंतर इस सेवा कार्य में सहभागी रहे। वर्तमान में डॉ. इलेश जैन संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ट्रस्ट के अंतर्गत नेत्र चिकित्सालय के साथ-साथ एक सामान्य चिकित्सालय, प्राथमिक विद्यालय और संस्कृत विद्यालय भी संचालित हैं।
सतना की धरती से उठकर सेवा का विश्वव्यापी विस्तार
सतना जिले में जन्मे डॉ. जैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शासकीय वेंकट क्र.1 विद्यालय से प्राप्त की। वर्ष 1973 में उन्होंने श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा से एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त की तथा वर्ष 1979 में लोकमान्य तिलक चिकित्सा महाविद्यालय, सायन (मुंबई) से नेत्र रोग में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। मुंबई जैसे महानगर में उज्ज्वल भविष्य छोड़कर वे वर्ष 1970 में चित्रकूट पहुंचे। उस समय यह क्षेत्र अत्यंत पिछड़ा और आदिवासी बहुल्य था, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग नगण्य थीं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने सेवा का जो दीप प्रज्जवलित किया, वही आगे चलकर विश्वस्तरीय संस्थान में परिवर्तित हो गया।
पांच जिलों को बनाया मोतियाबिंद मुक्त
डॉ. जैन के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 130 से अधिक प्राथमिक नेत्र जांच केंद्र स्थापित किए गए। गांव-गांव शिविर लगाकर मरीजों को चिकित्सालय तक लाना, शल्यक्रिया के बाद लेंस प्रत्यारोपण कर सुरक्षित घर पहुंचाना, यह सेवा आज भी निरंतर जारी है। उनकी विशेष उपलब्धि रही पन्ना, सतना, बांदा, हमीरपुर और फतेहपुर जिलों को मोतियाबिंद मुक्त क्षेत्र बनाना। अंधत्व निवारण के इस ऐतिहासिक कार्य ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
पद्मश्री से सम्मानित
चिकित्सा और अंधत्व निवारण के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए 27 मई 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसे उन्होंने ‘देश की ओर से मिला सबसे बड़ा सम्मान बताया था। इससे पूर्व भी उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए।
टेंट से शुरू हुआ सफर एशिया के अग्रणी नेत्र केंद्र तक
स्वामी रणछोड़ दास के आशीर्वाद और आह्वान पर प्रारंभ हुआ ‘तारा नेत्रदान यज्ञ’ से शुरू हुआ अभियान उद्योगपति अरविंद भाई मफतलाल के सहयोग से आगे बढ़ा। प्रारंभिक वर्षों में नेत्र शिविर टेंट और टीन शेड के नीचे लगाए जाते थे। ग्रामीणों को अंधविश्वास और भय से बाहर निकालकर उपचार के लिए प्रेरित करना एक बड़ी चुनौती थी। आज वही प्रयास सद्गुरू नेत्र चिकित्सालय चित्रकूट के रूप में अंर्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर चुका है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 55 हजार से अधिक नेत्र आॅपरेशन किए जाते हैं तथा 17 लाख से अधिक लोगों को नेत्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। संस्थान में विश्व का सबसे बड़ा मॉड्यूलर नेत्र शल्य कक्ष स्थापित है। जरूरतमंदों को आज भी नि:शुल्क या अत्यंत कम खर्च पर उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
आज अंतिम दर्शन, कल पंचतत्व में होंगे विलीन
पद्मश्री डॉ. बी. के. जैन के अंतिम दर्शन आज 28 फरवरी को प्रात: 11 बजे से सायं 5 बजे तक उनके चित्रकूट स्थित निवास पर किए जा सकेंगे। उनका अंत्येष्टि संस्कार रविवार, 1 मार्च को प्रात: 10 बजे सद्गुरु परिसर में संपन्न होगा। डॉ. जैन के निधन से चिकित्सा सेवा जगत ने एक कर्मयोगी, दूरदर्शी और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता को खो दिया है। उनकी स्मृतियां और कार्य समाज को सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे। उनके निधन का समाचार मिलते ही चित्रकूट, सतना सहित समूचे विंध्य क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। संत समाज, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और लाखों लाभार्थियों ने गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
डा. जैन का जाना- सेवा, समर्पण और करुणा के एक युग का अवसान
विंध्य अंचल ने डॉ. बी.के. जैन के रूप में शुक्रवार को एक ऐसे युगदृष्टा को खो दिया, जिन्होंने लाखों लोगों की आंखों में उजाला भरकर मानव सेवा की मिसाल कायम की। डा. जैन के निधन की खबर से स्तब्ध स्टार ग्रुप के चेयरमैन रमेश सिंह ने कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता, ग्रामीण और वंचित वर्ग को समर्पित कर दिया। जब चित्रकूट स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा था, तब उन्होंने सीमित संसाधनों में नेत्र चिकित्सा सेवा का जो दीप जलाया, वह आगे चलकर देश-विदेश में पहचान का प्रतीक बन गया। पांच दशकों तक उन्होंने अंधेरे में डूबे जीवनों को रोशनी दी। उनका जाना केवल एक चिकित्सक का निधन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और करुणा के एक युग का अवसान है। श्री सिंह ने व्यथित लहजे में कहा कि विंध्य की यह धरती अपने इस महान सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार और असंख्य लाभार्थियों को यह अपार दु:ख सहने की शक्ति दें।
अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक: सांसद
सांसद गणेश सिंह ने कहा कि पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन के निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। सांसद ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. जैन का अतुलनीय योगदान, सेवा भाव और जनकल्याण के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने पूरे जीवन को समाजसेवा और मानवता की भलाई के लिए समर्पित कर दिया था। उनके प्रयासों से असंख्य लोगों को नई दृष्टि मिली और नया जीवन प्राप्त हुआ। डॉ. जैन ने नेत्र संबंधी जटिल समस्याओं का सफल समाधान कर हजारों मरीजों की आंखों में रोशनी लौटाई। उनकी यह सेवा पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी रही। सांसद गणेश सिंह ने कहा कि डॉ. जैन का निधन न केवल जिले बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका योगदान और उज्ज्वल व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले तथा शोक संतप्त परिजनों को इस दु:ख की घड़ी में संबल और शक्ति प्राप्त हो। सांसद गणेश सिंह ने परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व की कमी हमेशा खलती रहेगी।


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