सतना में बढ़ती गर्मी के बावजूद पार्वो वायरस का असर कम नहीं हुआ है। पशु चिकित्सालय में रोजाना कई पिल्ले गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं, चिकित्सकों ने समय पर टीकाकरण की सलाह दी है।
By: Yogesh Patel
Mar 19, 20267:53 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मौसम में लगातार बढ़ती गर्मी के बावजूद कुत्तों में फैलने वाला घातक पार्वो वायरस इस बार उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हुआ है। जिले के पशु चिकित्सालय में रोजाना बीमार पिल्लों की संख्या चिंता बढ़ा रही है। अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार प्रतिदिन औसतन 15 पिल्ले पार्वो जैसे गंभीर लक्षणों के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पशु चिकित्सकों के मुताबिक पार्वो वायरस मुख्य रूप से 1 से 6 माह तक के पिल्लों को प्रभावित करता है और यह बेहद संक्रामक होने के साथ जानलेवा भी है। संक्रमित पिल्लों में अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो जाते हैं, शरीर में पानी की कमी तेजी से बढ़ती है और कुछ ही घंटों में हालत गंभीर हो सकती है। कई मामलों में देर से अस्पताल पहुंचने के कारण पिल्लों को बचाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि सामान्यत: तापमान बढ़ने के साथ इस वायरस का प्रभाव कम होने लगता है, लेकिन इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव और संक्रमण के प्रसार के कारण इसका असर अभी भी बना हुआ है। चिकित्सकों का अनुमान है कि अप्रैल के अंत तक इसमें कमी आ सकती है, बशर्ते तापमान स्थिर रूप से बढ़े।
लापरवाही पड़ सकती है भारी, टीकाकरण जरूरी
चिकित्सकों ने पालतू पशु पालकों को चेताया है कि पार्वो वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। कई मामलों में देखा गया है कि बिना टीकाकरण वाले पिल्ले तेजी से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। इसके अलावा संक्रमित पिल्लों को अन्य कुत्तों से अलग रखना, उनके बर्तनों और स्थान की नियमित सफाई करना तथा बाहर से आने वाले कुत्तों के संपर्क से बचाना भी जरूरी है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि यदि पिल्ले में उल्टी, दस्त या सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें तो देरी किए बिना तुरंत पशु चिकित्सालय में उपचार कराना चाहिए, क्योंकि शुरूआती इलाज ही उसकी जान बचा सकता है।
60 पहुंची ओपीडी
इधर, जिला पशु चिकित्सालय की ओपीडी भी इन दिनों काफी व्यस्त है। यहां रोजाना औसतन 60 पशु इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें करीब 40 नए मामले होते हैं, जबकि 20 पुराने मरीज फॉलोअप के लिए आते हैं। कुल मामलों में बड़ी संख्या कुत्तों के पिल्लों की है, जिससे अस्पताल स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।