विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2025) विशेष: मानवीय लालच कैसे बना जीवसृष्टि के विनाश का कारण? हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट और विश्व आर्थिक मंच के चौंकाने वाले आंकड़े और इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए हमारी सामूहिक जिम्मेदारी।

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष (05 जून 2025)
पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व पर्यावरण के नाजुक संतुलन पर टिका है, लेकिन मानवीय गतिविधियों ने इस संतुलन को गंभीर रूप से बिगाड़ दिया है। प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, जंगल कटाई, शहरीकरण और सरकारी नियमों की अनदेखी जैसी घटनाएं हमारे पर्यावरण को बर्बाद कर रही हैं, जिसके भयावह परिणाम अब आंकड़ों में सामने आ रहे हैं।
2021 में दुनिया भर में 8.1 मिलियन (81 लाख) मौतें अकेले वायु प्रदूषण के कारण हुईं।
पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में, 2021 में वायु प्रदूषण के कारण 700,000 से अधिक बच्चों की मृत्यु हुई।
500,000 मौतें अफ्रीका और एशिया में घर पर खाना पकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रदूषणकारी ईंधन के कारण हुईं।
विश्व आर्थिक मंच ने चेताया है, यदि उत्सर्जन कम करने के उपाय नहीं किए गए, तो 2050 तक जलवायु संकट के कारण 14.5 मिलियन (1 करोड़ 45 लाख) लोगों की मृत्यु हो सकती है। इसके साथ ही, 2050 तक 1.1 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक व्यय होने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाढ़ से मौसम जनित मृत्यु दर का सबसे अधिक खतरा है, जिससे 2050 तक 8.5 मिलियन लोगों की मृत्यु हो सकती है, जबकि सूखा 3.2 मिलियन मौतों का कारण बन सकता है। उत्पादकता में कमी के कारण, गर्म लहरों से सबसे अधिक आर्थिक नुकसान (अनुमानित 7.1 ट्रिलियन डॉलर) होगा। वायु प्रदूषण, विशेषकर सूक्ष्म कण पदार्थ और ओजोन प्रदूषण, समय से पहले होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना रहेगा, जिससे हर साल लगभग 9 मिलियन मौतें होने की आशंका है।
समाधान की ओर: हमारी जिम्मेदारी
पर्यावरण की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। इस विनाशकारी प्रवृत्ति को रोकने के लिए तेजीसे गंभीर प्रयास करना होंगे।
प्रदूषण नियंत्रण: वायु और जल प्रदूषण कम करने के प्रभावी उपाय लागू करना, उत्सर्जन नियमों को कड़ा करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना।
जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना।
पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण: वनों की कटाई को कम करना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और टिकाऊ भूमि प्रबंधन प्रथाओं को अपनाना।
अपशिष्ट प्रबंधन: प्लास्टिक और ई-अपशिष्ट का अधिकाधिक रीसायकल करना, साथ ही खुले में कचरा जलाने जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना।
ग्रामीण विकास: गांवों से शहरों की ओर पलायन रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सुविधाएं स्थापित करना।
जैविक खेती: फसलों पर हानिकारक रसायनों के छिड़काव पर पाबंदी लगाकर जैविक खेती को बढ़ावा देना।

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