RBI ने बैंकों को मोबाइल ऐप्स से 'Dark Patterns' और भ्रामक ट्रिक्स हटाने का आदेश दिया है। अब ग्राहकों से कोई हिडन चार्ज नहीं लिया जा सकेगा। जानें पूरी खबर।
By: Star News
Feb 25, 20265:19 PM
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता है कि मोबाइल बैंकिंग ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसे 'हिडन' (छिपे हुए) विकल्प होते हैं, जो ग्राहकों को अनजाने में महंगी सेवाओं या शुल्कों की ओर धकेल देते हैं। RBI ने अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों को साफ निर्देश दिया है कि वे अपने ऐप्स से ऐसी सभी 'फंसाने वाली ट्रिक्स' को तुरंत हटाएं।
बैंकिंग ऐप्स में अक्सर कुछ ऐसी डिजाइन और सेटिंग्स का इस्तेमाल किया जाता है जिसे तकनीकी भाषा में 'डार्क पैटर्न्स' कहते हैं। इसमें शामिल हैं:
प्री-टिक्ड बॉक्स: ग्राहकों की सहमति के बिना ही इंश्योरेंस या अन्य सेवाओं के बॉक्स को पहले से टिक रखना।
छिपे हुए विकल्प: अनसब्सक्राइब या सर्विस बंद करने का बटन ढूंढना मुश्किल बनाना।
भ्रामक सूचनाएं: ग्राहकों को डराना या जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए उकसाना।
पूर्ण पारदर्शिता: अब बैंकों को लोन, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों की जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी। "कोई छिपी हुई लागत नहीं" (No Hidden Charges) के वादे को सख्ती से लागू करना होगा।
सहमति की अनिवार्यता: किसी भी अतिरिक्त सेवा के लिए ग्राहक की सक्रिय सहमति (Active Consent) जरूरी होगी। प्री-चेक्ड बॉक्स अब मान्य नहीं होंगे।
आसान एग्जिट: अगर ग्राहक ने गलती से कोई सेवा चुन ली है, तो उसे बंद करने का तरीका भी उतना ही आसान होना चाहिए जितना उसे शुरू करना था।
सख्त कार्रवाई: जो बैंक इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस आदेश के बाद अब आपको अपने बैंक स्टेटमेंट में ऐसे किसी चार्ज को देखकर हैरान नहीं होना पड़ेगा, जिसके बारे में आपको पता ही न हो। इससे न केवल ग्राहकों का पैसा बचेगा, बल्कि डिजिटल ट्रांजेक्शन के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा।