RBI Transferred Record Dividend: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) केंद्र सरकार को ₹2.86 लाख करोड़ का रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर करेगा। जानिए RBI की इस बंपर कमाई की वजह और सरकार को इससे क्या फायदा होगा।

वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र की मोदी सरकार को एक बड़ी राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा (रिकॉर्ड) डिविडेंड (सरप्लस) ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है।
विश्लेषकों का अनुमान था कि यह डिविडेंड ₹2.7 लाख करोड़ से ₹3.5 लाख करोड़ के बीच रह सकता है, और यह फैसला उम्मीदों के मुताबिक ही रहा।
RBI द्वारा ट्रांसफर की गई यह रिकॉर्ड राशि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में सरकारी खजाने और अर्थव्यवस्था को जबरदस्त सहारा देगी। मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा (क्रूड ऑयल और गैस) की बढ़ती कीमतों से जो चुनौतियां पैदा हो रही हैं, उनसे निपटने में इस फंड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे सरकार को अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलेगी।
यह पहला मौका नहीं है जब RBI ने सरकार को इतनी बड़ी रकम सौंपी है, लेकिन इस बार का आंकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ चुका है।
केंद्रीय बैंक के मुनाफे और सरप्लस में आई इस भारी तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण रहे:
मुद्रा विनिमय (Currency Exchange) में उतार-चढ़ाव: विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल का RBI को फायदा मिला।
विदेशी मुद्रा परिचालन (Forex Operations): डॉलर-रुपये के लेन-देन से हुआ मुनाफा।
वैश्विक निवेश पर रिटर्न: विदेशी संपत्तियों और बॉन्ड्स पर मिला शानदार ब्याज।
इस बंपर मुनाफे में सबसे बड़ा योगदान वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई लगभग 10% की गिरावट का रहा। रुपये के कमजोर होने से RBI की बैलेंस शीट का विस्तार हुआ और उसकी विदेशी मुद्रा संपत्तियों (Foreign Currency Assets) का वैल्यूएशन (मूल्यांकन लाभ) काफी बढ़ गया।
इसके अलावा, रुपये को बहुत अधिक गिरने से बचाने के लिए RBI ने मुद्रा बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया और ऊंचे दामों पर डॉलर बेचे, जिससे केंद्रीय बैंक को मोटा मुनाफा हुआ।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने रिलायंस जियो और 4,500 कंपनियों पर लगे प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। साक्ष्यों के अभाव में आयोग ने इसे एक बड़ा राहत भरा फैसला माना है।
एशियाई बाजारों में हाहाकार और कच्चे तेल के 85 डॉलर के पार जाने के बावजूद आज भारतीय शेयर बाजार हरे निशान पर खुला। एशियाई बाजार के शुरुआती कारोबार में चिपमेकर कंपनियों के शेयर लगातार बेचे जाने से दबाव में रहे।
भारतीय शेयर बाजार आज भी हरे निशान पर खुला और वह भी तब जब एशियाई बाजारों में आज चौतरफा भारी बिकवाली का माहौल है। कच्चे तेल की भी कीमतें और बढ़ी हैं। एशियन मार्केट पूरी तरह से क्रैश हो गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजार ने अपनी अद्भुत मजबूती का प्रदर्शन किया है।
आज अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित नरमी के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। बैंक और वित्तीय शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया। अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों ने सकारात्मक रुझान दिखाया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल ईंधन का पुरजोर समर्थन करते हुए इस पर लगे निजी हितों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में 100 फीसदी पेट्रोल का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसके लिए उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी होगी।
भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से शेयर मार्केट पर काफी असर पड़ा है। सेंसेक्स टूटकर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ निचले स्तर पर आ गया।
13 जुलाई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट। जानें क्या हैं दाम, गिरावट के मुख्य कारण और एक्सपर्ट्स की निवेश को लेकर दी गई सलाह।
ईरान पर अमेरिका के ताबड़तोड़ हमले के बाद शेयर बाजार में एक बार फिर हाहाकार मच गया है। निफ्टी और सेंसेक्स गिरावट के साथ खुले हैं। ईरान ने स्ट्रेट आफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे कच्चे तेल के दाम में फिर उछाल आ गया है। कच्चे तेल में तेजी से शेयरों में गिरावट आ गई है जबकि ओएनजीसी के स्टॉक उछल गए हैं।
आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शानदार रही। सेंसेक्स और निफ्टी तेजी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में रौनक लौटती हुई नजर आई। वहीं, चुनिंदा एफएमसीजी और फार्मा शेयरों में सीमित कारोबार देखने को मिला।
भारतीय शेयर बाजार में कल की भारी मंदी के बाद आज सुबह दर्ज हुई बड़ी रिकवरी। सेंसेक्स मजबूत हुआ, जबकि निफ्टी फिर से छलांग लगता नजर आया। दूसरी ओर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 4 पैसे गिरकर 95.52 पर आ गया।

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