रीवा की बाणसागर कॉलोनी में विवादित सरकारी जमीन पर नगर निगम ने निर्माण अनुमति दे दी। मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के बावजूद यह चूक सामने आई, जांच के निर्देश और निर्माण रोकने की प्रक्रिया शुरू हुई।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
शहर के पॉश इलाके बाणसागर कॉलोनी में करोड़ों की सरकारी जमीन के मामले में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की ढिलाई का फायदा उठाकर एक निजी पक्ष ने न केवल जमीन अपने नाम करा ली, बल्कि नगर निगम से भवन निर्माण की अनुमति लेकर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में नगर निगम के आयुक्त स्वयं नोडल अधिकारी हैं, इसके बावजूद उनके विभाग ने विवादित भूमि पर नक्शा पास कर दिया।
क्या है पूरा मामला
मामला बाणसागर कॉलोनी से लगी आराजी क्रमांक 631/2 (रकबा 1.19 एकड़) भूमि का है। सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन लोक निर्माण विभाग के नाम दर्ज थी। सूत्रों के अनुसार पीडबल्यूडी अधिकारियों द्वारा कोर्ट में सही ढंग से पक्ष न रखने और लापरवाही बरतने के कारण हाईकोर्ट ने इस जमीन का नामांतरण विश्वनाथ पटेल नामक व्यक्ति के पक्ष में करने का आदेश दिया। इसी आदेश के आधार पर हुजूर तहसीलदार को जमीन निजी पक्ष के नाम करने पर विवश होना पड़ा।
प्रशासन की सक्रियता और निगम की चूक
जब यह मामला जिला प्रशासन की जानकारी में आया, तो कलेक्टर के निर्देश पर इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील दायर की गई। वर्तमान में यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। हैरानी की बात यह है कि कलेक्टर ने इस मामले की पैरवी के लिए नगर निगम आयुक्त को नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। इसके बावजूद नगर निगम के भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियरों ने तथ्यों को दरकिनार करते हुए 30 दिसंबर 2025 को उक्त जमीन पर 634.51 वर्ग मीटर के बिल्डअप एरिया में व्यावसायिक और रिहायशी निर्माण की मंजूरी दे दी।
सच्चाई छिपाकर ली अनुमति
आरोप है कि आवेदक विश्वनाथ पटेल ने जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे अदालती विवाद और 'डबल बेंच' में लंबित प्रकरण की जानकारी छिपाई। निगम के संबंधित अधिकारियों ने भी बिना स्थल निरीक्षण या कानूनी स्थिति की जांच किए आनन-फानन में निर्माण की अनुमति जारी कर दी। अनुमति मिलते ही विवादित जमीन पर धड़ल्ले से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
आयुक्त ने दिए जांच के निर्देश
इस गंभीर चूक ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद निगम आयुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए पूरे मामले की जांच के लिए कार्यपालन यंत्री सिद्धार्थ सिंह को जिम्मा सौंप दिया है तथा दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश के साथ निर्माण कार्य पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।


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