घरों और नालों का गंदा पानी मिलने से रीवा की बीहर व बिछिया नदियां प्रदूषित, पानी पीने योग्य नहीं, बी कैटेगरी में दर्ज।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
घरों का गंदा पानी नदियों को दूषित कर रहा है। रीवा आबादी के मामले में महानगरों से पीछे हैं फिर भी नदियां इतनी प्रदूषित हैं कि इसका पानी सीधे तौर पर पिया नहीं जा सकता। बीहर और बिछिया मानक के हिसाब से बी श्रेणी की नदियों में आ गई हंै। जबकि इन नदियों में सालभर पानी प्रवाह के साथ बहता है। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदियों की हालत कितनी बदतर कर दी गई है।
भारत सरकार ने शुद्ध और अशुद्ध नदियों के मानक को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें शुद्ध नदियों का मानक कितना होना चाहिए, यह भी तय किया गया है। इस मानक के हिसाब से बीहर और बिछिया नदी फिट तो बैठती है लेकिन सबसे शुद्ध नदियों की श्रेणी में भी नहीं आतीं। पूरे शहर का गंदा पानी इन्हीं नदियों में प्रवाहित किया जाता है। इसके कारण इस नदी का जल सीधे पीने लायक नहीं रह गया है। इसमें डिजाल्व आक्सीजन, बॉयोकेमिकल आक्सीजन डिमांड और फेकल कॉलीफार्म मानक से ज्यादा हैं। इन नदियों के पानी का उपयोग नहाने में कर तो सकते हैं लेकिन सीधे तौर पर पी नहीं सकते। धीरे धीरे पानी की क्वालिटी घटिया होती जा रही है। यह हालात तब हैं जब इन नदियों में सालभर बाण सागर का पानी बहता रहता है। अब जरा सोचिए यदि इन नदियों में पानी का प्रवाह रुक जाए तो इसकी हालत क्या होगी।
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शहर में सबसे दूषित है नदी
बीहर और बिछिया दोनों ही नदियां शहर में सबसे अधिक दूषित हैं। बिछिया से शुरू होकर जयंती कुंज के पीछे तक नदी का स्तर सबसे खराब है। शहर के दोनों तरफ नदियां साफ सुथरी है। जैसे ही शहर के अंदर यह नदियां गुजरती है दूषित होने लगती है। हालांकि नदी में पानी का प्रवाह बना रहता है। इसके कारण यह अपने आप को शुद्ध करती रहती हैं वर्ना यह पीने तो ठीक नहाने लायक भी नहीं बचतीं।
डिजोल्वड आक्सीजन
यह पानी में घुलित आक्सीजन होता है। इसे मिलीग्राम/ लीटर या संतृप्ति प्रतिशत में मापा जाता है। इसका स्तर तापमान और कार्बनिक प्रदूषण से प्रभावित होता है। स्वस्थ्य स्तर पर आमतौर पर 5 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है। जबकि 2 मिलीग्राम प्रति लीटर खतरनाक होता है। जिससे मछलियां मर सकती हैं।
बीओडी यानि बायोकेमिल आक्सीजन डिमांड
नदी के पानी में बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक कचरे को विघटित करने के लिए आवश्यक आक्सीजन की मात्रा को मापता है। पानी की गुणवत्ता का एक प्रमुख संकेतक है। उच्च बीडीओ सीवेज, औद्योगिक कचरे से होने वाले प्रदूषण को दर्शाता है। इससे घुलित आक्सीजन कम हो जाती है और जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाता है। 3 मिलीग्राम/लीटर से अधिक मानक अक्सर भारी प्रदूषण का संकते देता है। उच्च बीओडी मतलब पानी में बहुत अधिक कार्बनिक पदार्थ जैसे मल, उर्वरक, खाद्य अपशिष्ट अधिक मात्रा में मौजूद हैं।
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फेकल कोलीफार्म
नदी के पानी में मल कोलीफार्म की उपस्थिति मानव या पशु मल से होने वाले संदूषण का संकेत देती है। जो रोग पैदा करने वाले रोगाणुओं की संभावित उपस्थिति को दर्शाती है। इससे गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टाइफाइड और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा पैदा होता है। शुद्ध पीने लायक पानी तभी होगा जब इसका मानक जीरो तक पहुंच जाएगा।
रीवा से होकर गुजरने वाली बीहर और बिछिया नदी बी कैटेगरी में आती हैं। शहर के अंदर जहां नाले मिलते हैं। वहां नदियां ज्यादा प्रदूषित हैं। शहर के बाहर नदियों का पानी साफ है।
शुभी माथुर, जिला अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रीवा

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