रीवा में डीईओ पर गंभीर अनियमितताओं के बावजूद निलंबन टल गया। कलेक्टर के प्रस्ताव पर कमिश्नर ने कार्रवाई बदलते हुए अतिरिक्त आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दिए, जिससे मामले पर सवाल उठे।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
जिला शिक्षा अधिकारी एक के बाद एक गड़बड़ी में फंसते गए। हर बार निलंबन की तलवार लटकी लेकिन कमिश्नर अभयदान देते गए। पहले अनुरक्षण मद घोटाले में फंसे तो कमिश्नर ने विभागीय जांच बैठा दी, लेकिन निलंबित नहीं किया। इसके बाद तत्कालीन रीवा कलेक्टर ने तीन बिंदुओं पर लापरवाही मानते हुए निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर के पास भेजा। इस मामले में भी कमिश्नर ने डीईओ को बचा लिया। जेडी लोक शिक्षण को अतिरिक्त आरोप पत्र भेजने का आदेश दे दिया। कुल मिलाकर डीईओ की कारस्तानियों पर कमिश्नर ने पर्दा डालने का काम किया।
आपको बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग में अनुरक्षण मद की राशि का बंदरबांट हुआ था। 6 स्कूलों में बिना काम कराए ही 28 लाख से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया था। इस मामले में डीईओ सहित 7 लोग फंसे थे। 1 प्राचार्य रिटायर हो गए थे। इस मामले में विधानसभा में प्रश्न लगा था। इस मामले में कमिश्नर ने एपीसी सुधाकर तिवारी और गुढ़ प्राचार्य विनय मिश्रा को निलंबित किया था। डीईओ सहित चार के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए थे। इस मामले में भी डीईओ रामराज मिश्रा को बचा लिया गया था। हाल में ही 3 बिंदुओं में अनियमितता और लापरवाही के मामले में कलेक्टर ने 13 मार्च 2025 को कमिश्नर को डीईओ के निलंबन का प्रस्ताव भेजा था। इसमें भी कमिश्नर ने हेरफेर कर दिया। कलेक्टर के प्रस्ताव को मोल्ड करते हुए जेडी के पास दोनों बिंदुओं पर आरोप पत्र जारी करने के निर्देश दे दिए।
कमिश्नर ने अनुरक्षण मद को छोड़कर शेष दो बिंदुओं पर अतिरिक्त आरोप पत्र मांगा
तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल ने तीन बिंदुओं पर डीईओ के निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर रीवा संभाग रीवा के पास भेजा था। इसमें से अनुरक्षण मद में की गई अनियमितता में पहले से ही डीईओ को आरोप पत्र जारी किया जा चुका था। इसी मामले में शेष दो बिंदुओं पर भी अतिरिक्त आरोप पत्र जारी करने के लिए कमिश्नर ने जेडी लोक शिक्षण को पत्र लिखा था। दो बिंदुओं पर जेडी लोक शिक्षण संचालनालय ने आरोप पत्र कमिश्नर के पास भेज दिया था।
इन तीन बिंदुओं पर कलेक्टर ने डीईओ के निलंबन का कमिश्नर के पास भेजा था प्रस्ताव
बिंदु क्रमांक 1: रामराज मिश्रा डीईओ के निलंबन प्रस्ताव में कलेक्टर ने लेख किया था कि 17 मार्च 2026 को कलेक्टर जिला रीवा ने विकासखंड सिरमौर अंतर्गत परीक्ष केन्द्र क्रमांक 321035 शाउमावि बालक बैकुंठपुर और परीक्षा केन्द्र क्रमांक 321034 शाउमावि कन्या बैकुंठपुर का निरीक्षण किया था। परीक्षा केन्द्र में एक बेंच पर दो छात्र बैठे पाए गए थे जो बोर्ड परीक्षा की गाइड लाइन के विपरीत है। इस मामले में डीईओ को दोषी पाया गया था।
बिंदु क्रमांक 2: निलंबन का दूसरा आधार कलेक्टर ने दिया था डीईओ आफिस के निरीक्षण में अनियमितता पाए जाने का। कलेक्टर ने 19 फरवरी 2026 को डीईओ आफिस का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई गर्इं थी। स्कूटी वितरण के लिए बजट आवंटन के बाद भी पात्र 250 छात्राओं को स्कूटी क्रयकिए जाने का भुगतान नहीं किया गया था। साथ ही नवंबर 2025 से 36 असफल भुगतान पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। स्था/सतर्कता/विविध/एनपीएस से संबंधित नस्तियों का सही तरीके से संधारण व रख रखाव नहीं पाया गया गया। अतिथि शिक्षक मानदेय में भी बजट आवंटन के बाद भी मानदेय भुगतान में विलंब किया गया। कई कर्मचारी कार्यालय से अनुपस्थित मिले थे। सेवानिवृत्त कर्मचारी शिवकुमार नापित भृत्य के स्वत्वों के भुगतान में अनावश्यक विलंब किया जाना जांच में पाया गया था। इसके लिए डीईओ को दोषी माना गया था। निलंबन प्रस्ताव इन्हीं दो बिंदुओं पर कलेक्टर ने कमिश्नर को भेजा था।
बिंदु क्रमांक 3: कलेक्टर ने अपने प्रस्ताव में लिखा था कि शाउमावि पैपखरा, खैरा, गुढ़, हाई स्कूल खटखरी, बढ़ैया और दुआरी में अनुरक्षण मद की राशि का अनियमित व्यय, बिना कार्य के नियमों और योजना की गाइडलाइन के विपरीत मापदंडों पर ठेकेदार को 13 लाख 97 हजार 91 रुपए का भुगतान किया जाना पाया गया। भुगतान की गई राशि डीईओ की स्वीकृति के बाद संबंधित ठेकेदार को किया गया था। यह वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। इन तीनों मामलों में डीईओ रामराज मिश्रा के निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी।


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