रीवा के स्कूल शिक्षा विभाग में करोड़ों के घोटालों के बावजूद न कार्रवाई, न वसूली। अनुदान, गुरुजी, रंगाई-पुताई और फर्जी नियुक्ति मामलों की फाइलें अफसरों की मेहरबानी से वर्षों से दबी पड़ी हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
स्कूल शिक्षा विभाग घोटालों का विभाग बन गया है। यहां इतने घोटाले हुए कि गिनती भूलने लगी है लेकिन किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। गुरुजी से लेकर अनुदान घोटाला, सामग्री घोटाला, फर्जी अनुकंपा नियुक्ति घोटाला हुआ। अब रंगाई पुताई घोटाला भी हो गया। सभी मामले में जांच हुई। जिम्मेदारी तय हुई लेकिन किसी पर गाज नहीं गिरी। शासन की जो राशि घोटाले में डूबी, एक पाई तक रिकवर नहीं हुई। घोटाला करने के बाद एक एक कर अधिकारी, शिक्षक रिटायर होते जा रहे हैं। हाल ही में एक पूर्व डीईओ भी रिटायर होकर चले गए। अब एक की फाइल खुद कमिश्नर कार्यालय में दबी हुई है।
स्कूल शिक्षा विभाग का काम स्कूलों की मॉनीटरिंग और बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है। बस यही काम स्कूल शिक्षा विभाग नहीं कर रहा है। कुर्सी पर बैठे अधिकारी और बाबू शासन से मिलने वाले बजट पर नजरे गड़ाए बैठे रहते हैं। अब तक स्कूल शिक्षा विभाग में इतने बड़े बड़े घोटाले हुए कि इनकी कल्पना भी करना मुश्किल है। इन फर्जीवाड़ा का खुलासा भी हुआ। कईयों में एफआईआर हुई लेकिन जेल कोई नहीं गया। सब खुली हवा में सांस ले रहे हैं। कई रिटायर हो गए और पेंशन उठा रहे हैं। प्रशासन और पुलिस की सुस्ती के कारण ही फर्जीवाड़ा और घोटालों पर ब्रेक नहीं लग रहा। सिर्फ दो सालों में ही स्कूल शिक्षा विभाग ने इतने बड़े बड़े घोटाले किए जो प्रदेश में सुर्खियां बटोर रहे हैं। रीवा फर्जीवाड़ा का गढ़ बनता जा रहा है और यहीं के अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है।
5 करोड़ का अनुदान और सामग्री घोटाला हुआ, वसूली तक नहीं हुई
स्कूल शिक्षा विभाग में बहुचर्चित अनुदान और सामग्री घोटाला हुआ। 5 करोड़ 41 लाख रुपए का घोटाला किया गया था। इस मामले में 25 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। लेखाअधिकारी भी फंसे थे। अभी इस मामले में 18 लोगों का और नाम एफआईआर में दर्ज होना है लेकिन लेटलतीफी चल रही। इतने बड़े घोटाले में जो बाबू फंसे वह कोर्ट से राहत लेकर वापस डीईओ आफिस में ही डटे रहे। प्रशासन भी इनके सामने घुटने टेक दिया। वर्तमान में कई बाबू उसी कुर्सी पर काम कर रहे हैं।
2 करोड़ का हुआ था गुरुजी घोटाला, रिकवरी निकली थी
स्कूल शिक्षा विभाग में तत्कालीन डीईओ उदयभान पटेल और एसएन तिवारी के कार्यकाल में गुरुजी घोटाला हुआ था। इसमें अपात्र गुरुजी को माध्यमिक और प्राथमिक अध्यापक बना दिया गया था। उन्हें 2 करोड़ से अधिक की राशि का एरियर का भुगतान कर दिया गया था। जांच के बाद डीईओ और प्राचार्यों पर रिकवरी निकली थी। कोर्ट से राहत लेकर सभी आ गए। कई रिटायर हो गए। मामले में कुछ नहीं हुआ।
मार्तण्ड स्कूल एक में शाला विकास राशि का घोटाला
मार्तण्ड स्कूल क्रमांक 1 में भी तत्कालीन कलेक्टर डॉ इलैयाराजा टी ने घोटाला पकड़ा था। प्राचार्यों ने अनुदान और शाला विकास की राशि का जमकर बंदरबाट किया था। इस मामले की जांच कराई गई थी। जांच में चार प्राचार्य फंसे थे। इनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भी जांच कमेटी ने तत्कालीन सीईओ जिला पंचायत को भेजी थी। इस जांच में तत्कालीन डीईओ जीपी उपाध्याय, वीपी खरे, सुरेश सोनी और रमानंद पिड़िया फंसे थे। फाइल जिला पंचायत आफिस में ही दफन हो गई। कुछ नहीं हुआ।
32 लाख का फर्जी आनंदम प्रशिक्षण घोटाला
मार्तण्ड स्कूल क्रमांक 1 में हाल ही में आनंदम प्रशिक्षण का आयोजन किया गया था। इसमें संभागभर के शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था। इनके रहने खाने आदि की व्यवस्था के लिए लोक शिक्षण से 32 लाख रुपए आए थे। इस राशि का ऐसा बंदरबांट किया गया कि जांच में सब की पोल खुल गई थी। ठेकेदार ने ऐसे सामानों की लिस्ट तैयार की थी जो प्रशिक्षण के दौरान उपयोग ही नहीं की गई थी। प्राचार्य को नगद राशि का भुगतान तक किया गया था। जांच के बाद कार्रवाई का प्रस्ताव लोक शिक्षण को भेजा गया। अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
फर्जी अनुकंपा नियुक्ति घोटाला, कोई जेल नहीं गया
रीवा में सबसे बड़ा फर्जी अनुकंपा नियुक्ति घोटाला हुआ। दो डीईओ इस मामले में फंसे। एक डीईओ को तत्काल जांच के बाद निलंबित कर दिया गया था। दूसरे डीईओ का नाम हाल ही में उनके रिटायरमेंट के चंद दिन पहले ही सामने आया। इसकी फाइल भी अधिकारियों ने दबा दी और उन्हें रिटायर होने दिया गया। इसके अलावा इस फर्जी अनुकंपा नियुक्ति में 7 लोगों पर एफआईआर हुई। लिपिक भी शामिल था। वह भी अब कोर्ट से राहत लेकर वापस कार्यालय पहुंच गया है। वहीं फर्जी नौकरी पाने वाले आज तक पुलिस की पकड़ में नहीं आए।
28 करोड़ का रंगाई पुताई घोटाला
पुराने घोटालों में प्रशासन ने ठोस एक्शन नहीं लिया तो नया घोटाला हो गया। स्कूल शिक्षा विभाग को 50 लाख रुपए रंगाई पुताई के लिए मिले थे। 6 स्कूलों में बिना काम कराए ही 28 लाख से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया। जांच में डीईओ, लेखाअधिकारी सहित 7 लोग दोषी पाए गए। 1 प्राचार्य इसमें भी रिटायर हो गए। 6 को नोटिस जारी हुई। नोटिस का जवाब आ गया। हालांकि इसके बाद भी अब इनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कमिश्नर कार्यालय में ही फाइल लंबित है। वहीं दूसरी तरफ मैहर और सतना में इसी तरह के घोटाले में एफआईआर हो गई।


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