जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। अफवाह फैलाने, भ्रामक जानकारी प्रसारित करने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए सरकार से मांग सकता है जमीन
कोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हुई, 12 मई तक चली
फ्लैग मार्च में एसपी और एएसपी भी जवानों के साथ पैदल चले
कलेक्टर राजीव रंजन ने भोजशाला परिसर का निरीक्षण किया
इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश की हाईकोर्ट में पहुंचे धार भोजशाला मामले में शुक्रवार को फैसला आ गया है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह परिसर हिंदू मंदिर है। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की मांग पर दायर याचिका पर फैसला सुनाया है। सामने आया है कि हाईकोर्ट ने कहा कि भोजशाला का मूल स्वरूप संस्कृत शिक्षा केंद्र का था। अदालत ने एएसआई सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा जताते हुए कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और कोर्ट वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करे। अदालत ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं, कानून-व्यवस्था और संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। वहीं मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन के लिए सरकार से संपर्क करने की छूट दी गई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई को भोजशाला परिसर के प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा से जुड़े फैसले लेने को कहा है। एएसआई परिसर का समग्र प्रशासन और प्रबंधन जारी रखेगा।

एएसआई करेगा संरक्षण
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में कोर्ट ने भोजशाला का संरक्षण एएसआई को दिया है, लेकिन हिंदुओं को यहां पूजा का अधिकार दिया है। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को सरकार से मस्जिद के लिए जमीन मांगने के लिए कहा है।
1200 पुलिसकर्मियों को धार लाया गया
धार पुलिस कंट्रोल रूम में जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है। एसपी सचिन शर्मा ने कंट्रोल रूम पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और पुलिस बल को निर्देश दिए। एसपी ने बताया कि धार शहर की सुरक्षा 12 लेयर में की गई है। रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है।
2022 में दायर हुई थी याचिका
यह मामला 2022 में शुरू हुआ, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की। याचिका में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार, परिसर में नमाज पर रोक, ट्रस्ट गठन और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने जैसी मांगें शामिल हैं।
एएसआई ने किया था वैज्ञानिक सर्वे
2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी। हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली।
हिंदू पक्ष ने मंदिर होने के दिए तर्क
हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताते हुए ऐतिहासिक दस्तावेज, एएसआई सर्वे, शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और वसंत पंचमी पर पूजा की परंपरा का हवाला दिया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ समरांगण सूत्रधार का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना उसमें वर्णित मंदिर निर्माण मानकों से मेल खाती है।
मुस्लिम पक्ष ने सर्वे रिपोर्ट पर उठाए सवाल
मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई तस्वीरें और वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या मामले के विपरीत भोजशाला में कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है।
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