रीवा स्वास्थ्य विभाग में लोकल पर्चेज के नाम पर लाखों की दवा खरीदी और भुगतान को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। शिकायत कलेक्टर और कमिश्नर तक पहुंचने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई और जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
नवागत कलेक्टर कर्मचारियों, अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपना रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग में हुए भ्रष्टाचार की तरफ अब तक ध्यान नहीं हुआ। उनके रीवा आने के पहले ही स्वास्थ्य विभाग में लाखों का घोटाला हुआ। लोकल पर्चेज के नाम पर बजट ठिकाने लगाया गया। इसकी शिकायत कमिश्नर के साथ कलेक्टर तक पहुंची लेकिन अब तक कलेक्टर ने इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया। जबकि भ्रष्टाचार को लेकर नवागत कलेक्टर खूब सुर्खियों में हैं।
आपको बता दें कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं फार्मासिस्ट ने लाखों रुपए की दवाइयां लोकल पर्चेज के नाम पर खरीदी। रंगाई पुताई का काम बिना टेंडर के कराया। लाखों का भुगतान भी कर िदया गया। दवाइयां नियम विरुद्ध खरीदने के आरोप लगे। मामला प्रकाश में आने के बाद क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने जांच बैठा दी है। जांच धीमी चल रही। इसके अलावा अधिवक्ता संतोष तिवारी ने कमिश्नर और कलेक्टर से इस फर्जीवाड़ा की लिखित शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि स्टोर में राज्य स्तर से मप्र पब्लिक हेल्थ सर्विस कार्पोरेशन भोपाल से ही समय समय पर दवाइयां और अन्य सामग्री की सप्लाई की जाती है। मार्च के महीने में जिला स्टोर में पदस्थ स्टोरकीपरों ने सांठगांठ कर लोकल स्तर पर जैम पोर्टल के माध्यम से बिना राज्य स्तर के स्वीकृति के दवाइयां खरीदी। इसका आदेश जारी कर भुगतान भी करवा दिया गया। इन दवाइयों की खरीदी क्रय एनएचएम के ई-वित्त और रेगुलर मद से किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि पब्लिक हेल्थ सर्विस कार्पोरेशन की साइड से स्थानीय स्तर पर फर्जी टेंडर फीड करके सीधे क्रय आदेश जारी किया गया है। जबकि स्थानीय स्तर पर कार्पोरेशन से स्थानीय ई टेंडर की प्रक्रिया के माध्यम से क्रय आदेश जारी किया जाना था। दवा खरीदी के नाम पर चहेती फर्मों को उपकृत किया गया। इस मामले में अब तक कलेक्टर की तरफ से एक्शन नहीं हो पाया है।
फार्मासिस्ट रवि प्रकाश की भी हुई शिकायत
सीएमएचओ कार्यालय में नियम विरुद्ध तरीके से फार्मासिस्ट रवि प्रकाश अटैच हैं। इनकी अटैचमेंट को तत्कालीन सीएमएचओ डॉ संजीव शुक्ला ने 31 दिसंबर 2025 को निरस्त कर दी थी। इन्हें मूल पदस्थापना स्थल जिला अस्पताल के लिए मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया था। बाद में नए सीएमएचओ डॉ यत्नेश त्रिपाठी आए और सांठगांठ से फिर से जिला स्तरीय स्टोर में पदस्थपना आदेश करा लिया गया। जबकि इसके खिलाफ शिकायत सीएम तक पहुंची थी। इसी शिकायत पर जेडी जेल्थ के निर्देश पर उन्हें मुक्त किया गया था। दवा खरीदी में इनकी मुख्य भूमिका मानी जा रही है।
कई फर्मों को किया गया लाखों का भुगतान
कमिश्नर, कलेक्टर को की गई शिकायत में कहा गया है कि जिला स्टोर रीवा में स्टोर की रंगाई, पुताई काकार्य बिना टेंडर के बजट हेड चेंज करके कराया जा रहा है। काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। स्टोर कीपर ने बिल सत्यापित कर लेखापाल से भुगतवान करवा दिया है। इसी तरह मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने स्टोर कीपर और लेखापाल की सांठगांठ से कई फर्म जिसमें जैम पोर्टल से खरीदी की गई हे। इनमें रिद्धि-सिद्धि इंटरप्राइजेज, एसएस साल्यूशन, खंडेलवाल इंटरप्राइजेज, तिवारी इंटरप्राइजेज, श्यामा फार्मा रीवा आदि अनेक फर्मो को 30 से 40 लाख रुपए का भुगतान किया गया है।
कर्मचारी, अधिकारियों से बाहर नहीं निकल पा रहे
रीवा भ्रष्टाचार का गढ़ हैं। यहां पूर्व में कई विभागों के अधिकारियों के खिलाफ जांच बैठी लेकिन किसी पर गाज नहीं गिरी। सभी बच गए। कई शिकायतें अब भी धूल फांक रही हैं। नए कलेक्टर के तेवर देखकर सभी को उम्मीद है कि फर्जीवाड़ा करने वालों पर भी गाज गिरेगी। हालांकि अभी तक यह संभव नहीं हो पाया है। कलेक्टर फिलहाल योजनाओं की प्रगति में ही अटके हुए हैं। इसके कारण स्वास्थ्य विभाग में हुए लाखों के दवा घोटाले पर भी किसी तरह की जांच नहीं हो पा रही है। फर्जीवाड़ा करने वाले यथावत बने हुए हैं।


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